प्रियंर्का सिंह व दीपेश पांडेय, मुंबई। फिल्मों में अक्सर हम सितारों को ऊंची इमारतों या हवाई जहाज से छलांग लगाते, धधकती आग और तेज रफ्तार गाड़ियों के बीच से निकलने जैसे कई एक्शन स्टंट करते हुए दिखते हैं। दर्शकों में रोमांच भर देने वाले इन दृश्यों को फिल्माना निर्माताओं व कलाकारों के लिए आसान नहीं होता। आने वाले दिनों में हीरोपंती 2, धाकड़, अटैक और बच्चन पांडे समेत कई एक्शन फिल्में रिलीज होने की कतार में हैं। फिल्मों में एक्शन दृश्य गढ़ने की चुनौतियों, सुरक्षा प्रबंध, एक्शन से कलाकारों के लगाव जैसे पहलुओं की पड़ताल कर रहे हमारे संवाददाता प्रियंर्का सिंह व दीपेश पांडेय।

फिल्मों के सेट पर निर्माता निर्देशक सुरक्षा को लेकर यथासंभव सावधानियां बरतते हैं। फिर भी कभी मशीनों की कमी से तो कभी लोगों के बीच आपसी तालमेल की गड़बड़ी की वजह से दुर्घटनाओं की खबरें आती रहती हैं। वर्ष 1983 में रिलीज फिल्म ‘कुली’ की शूटिंग के दौरान हिंदी सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन को फाइट सीन शूट करते वक्त पुनीत इस्सर का मुक्का लगा। जिसके कारण अमिताभ को गंभीर चोट आई, उन्हें महीनों अस्पताल में रहना पड़ा। वर्ष 1996 में रिलीज हुई फिल्म ‘खिलाड़ियों का खिलाड़ी’ की शूटिंग के दौरान ज्यादा वजन उठाने की वजह से अक्षय कुमार की गर्दन में चोट आ गई। उसके बाद उन्हें विदेश जाकर इलाज कराना पड़ा। वर्ष 2004 में रिलीज फिल्म ‘खाकी’ की शूटिंग में जीप द्वारा टक्कर लगने से ऐश्वर्या राय बच्चन की टांग टूट गई थी। उसी साल रिलीज फिल्म ‘युवा’ की शूटिंग के दौरान एक स्टंटमैन ने संतुलन खोकर मोटरसाइकिल सीधे विवेक ओबेराय के पैरों पर चढ़ा दी। जिससे विवेक को काफी चोटें आईं। साल 2013 में रिलीज हुई फिल्म ‘शूटआउट एट वडाला’ की शूटिंग के दौरान गलती से अनिल कपूर द्वारा चलाई एक गोली जान अब्राहम की गर्दन को छूते हुए निकल गई।

इस हादसे में जान बाल-बाल बचे

डर सबको लगता है: कलाकार भले ही जान पर खेलकर स्टंट सीन करें, लेकिन डर तो उन्हें भी लगता है। इस बारे में अक्षय कुमार का कहना है, ‘भले ही मैं बड़े-बड़े स्टंट्स करता हूं, लेकिन मुझे थोड़ी ऊंचाई से भी छलांग लगाने में डर लगता है। स्टंट करते समय अतिआत्मविश्वास घातक होता है। जैसे शरीर में अच्छा-बुरा कोलेस्ट्राल होता है, वैसे ही स्टंट्स को लेकर डर भी अच्छा-बुरा दोनों होता है। अच्छा डर यह होता है कि आप छलांग लगाने से पहले सुरक्षा के इंतजामों की जांच कर लेते हैं। क्या मैं सही जगह पर कूद रहा हूं, कहीं पानी या केले का छिलके जैसी चीजें तो नहीं हैं, लैंडिंग साफ्ट है या उसके और क्या तरीके हैं। स्टंट को लेकर मेरे अंदर जो डर है वो अच्छा डर है।’

त्वरित निर्णय जरूरी

कई बार एक्शन सीक्वेंस के दौरान ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है कि निर्देशक और एक्शन डायरेक्टर को अपनी सूझबूझ से त्वरित निर्णय लेने होते हैं। ‘गदर- एक प्रेम कथा’ और ‘ऐलान-ए-जंग’ फिल्मों के निर्देशक अनिल शर्मा कहते हैं, ‘फिल्म ‘गदर’ में शरणार्थियों को ट्रेन से ले जाने वाले सीन के लिए ट्रेन की पटरियों पर चलने वाली इलेक्ट्रानिक ट्राली की जरूरत थी, लेकिन वह हमें नहीं मिली। फिर हमने मानव संचालित ट्राली पर तीन कैमरे लगाकर शूट करने का निर्णय लिया। ट्राली पर मैं, कैमरामैन और स्टंट डायरेक्टर टीनू वर्मा बैठ गए। ट्रेन करीब 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से आ रही थी और हम उसके सामने ट्राली पर बैठकर शूट कर रहे थे। हमारी ट्राली को करीब 10 लोग धक्का लगा रहे थे। कुछ देर में ही ट्रेन हमारे करीब आ गई। हमने ट्रेन रोकने के लिए आवाज लगाई, लेकिन शोर की वजह से ड्राइवर को सुनाई नहीं दिया। जब ट्रेन और ट्राली के बीच सिर्फ 15 फीट का अंतर रह गया तो हम सब ट्राली से कूद गए, लेकिन एक कैमरा और टीनू वर्मा उस पर फंसे रहे। हमें कूदता देख और हमारे इशारे पाकर ड्राइवर ने ट्रेन में इमरजेंसी ब्रेक लगाया। तब तक ट्राली और ट्रेन के बीच का अंतर सिर्फ पांच फीट रह गया था। त्वरित सूझबूझ से ही उस वक्त बड़ा हादसा टल गया। इसके बाद हमने आगे के सभी सीन बड़ी सावधानी से फिल्माए।’

फिल्मों का बजट बढ़ाते एक्शन

स्टंट करने के लिए जरूरी उपकरण हों, सुरक्षा संबंधी इंतजाम या कलाकारों को उचित ट्रेनिंग मुहैया करानी हो, इनकी वजह से एक्शन फिल्मों का बजट काफी बढ़ जाता है। ‘आर राजकुमार’ और ‘मुन्ना माइकल’ फिल्मों के निर्माता विक्की रजानी कहते हैं, ‘एक्शन फिल्मों की यूनिट का साइज बढ़ जाता है, सेट पर सुरक्षा का ज्यादा ध्यान रखना पड़ता है। सेट एक्शन सीन के मुताबिक तैयार किए जाते हैं। परफेक्ट स्टंट सीन के लिए देर तक शूट करना पड़ता है। हर फिल्म का एक बजट होता है, लेकिन कई वजहों से अक्सर बजट बढ़ भी जाता है। एक्शन फिल्मों के लिए वह तैयारी रखनी पड़ती है।’

तकनीक ने किया आसान

पहले स्टंट करते वक्त सेट पर दुर्घटनाएं ज्यादा होती थीं। अब स्पेशल इफेक्ट्स और स्टंट के लिए सेट पर उच्च गुणवत्ता वाले कई विदेशी उपकरण उपलब्ध होते हैं। वीएफएक्स के जरिए बहुत मुश्किल दिखने वाले सीन को सहजता से फिल्माया जा सकता है। वीएफएक्स आने से पहले एक्शन में केबलों का प्रयोग भी इतने बड़े पैमाने पर नहीं किया जाता था, क्योंकि एडिटिंग में उन्हें हटाना मुश्किल होता था। तब बहुत पतले केबलों का प्रयोग किया जाता था और उसके आस-पास धुआं कर देते थे, जिससे केबल दिखे नहीं। 21वीं सदी की शुरुआत में तकनीक के विकास के साथ धीरे-धीरे हमारे यहां भी रोप वायर, एयरबैग, पैड्स, क्रैशमैट्स समेत हालीवुड में प्रयोग किए जाने वाले कई उपकरणों के प्रयोग का चलन बढ़ गया। पहले आठ-दस मंंजिल से छलांग लगाने वाले स्टंट के लिए स्टंटमैन को गद्देदार बाक्सेस या कम ऊंचाई के मैट पर छलांग लगवाई जाती थी। अब वही काम विंच मशीन, कैप्शटन मशीन, केबल और क्रेन जैसे उपकरणों की मदद से आसानी से किया जाता है। सुरक्षा के विशेष प्रबंध: ‘पृथ्वीराज’, ‘लाल सिंह चड्ढा’ और ‘विक्रम वेधा’ फिल्मों के स्टंट डायरेक्टर और मूवी स्टंट आर्टिस्ट एसोसिएशन के एक्जीक्यूटिव कमेटी मेंबर परवेज शेख कहते हैं, ‘आमतौर पर स्टंट को परफार्म करने से पहले हम सेट पर एंबुलेंस, फिजियोथेरेपिस्ट और डाक्टर की उपस्थिति की मांग रखते हैं।

बजट कम करने के लिए कुछ निर्माता इससे बचते हैं, ऐसी स्थिति में स्टंटमैन को स्टंट करने से मना कर देना चाहिए। पहले सेट पर सुरक्षा को लेकर ज्यादा व्यवस्था नहीं होती थी, पर अब यशराज फिल्म्स और धर्मा प्रोडक्शन जैसी बड़ी प्रोडक्शन कंपनियों में सुरक्षा प्रबंध काफी बेहतर हो गए हैं। सेट पर एंबुलेंस, फिजियोथेरेपिस्ट और डाक्टर की उपस्थिति में ही स्टंट परफार्म किया जाता है। फिल्म ‘पृथ्वीराज’ के सेट पर घुड़सवारी का स्टंट सीन फिल्माते वक्त एक स्टंटवुमन ने संतुलन खो दिया, जिससे वह सीधे दीवार से टकरा गई और उसके सिर में चोट लग गई। चोट गंभीर थी, वह लड़की कोमा में जा सकती थी, लेकिन उचित सुविधाएं मौजूद होने के कारण उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया और उपयुक्त उपचार से वह बच गई।’

पीरियड फिल्मों की विशेष तैयारी

पीरियड फिल्मों के एक्शन सीन को फिल्माने के लिए एक्शन डायरेक्टर को विशेष खयाल रखना पड़ता है। एक्शन डायरेक्टर को देखना होता है कि कहां डमी तलवार और कहां असली तलवार का प्रयोग करना है, कौन से एक्टर के लिए कास्टयूम हल्का रखना है और किसके लिए भारी। स्टंट से पहले उन्हें घोड़े, हाथी, तीर, कमान सारे सामानों की जांच करनी होती है। इस बारे में एक्शन डायरेक्टर शाम कौशल कहते हैं, ‘छोटे से छोटे स्टंट में भी स्टंटमैन, मशीन और उसमें शामिल जानवरों का तालमेल सही होना चाहिए। मैंने जब ‘बाजीराव मस्तानी’ का वार सीक्वेंस किया था, तब उसमें 400 घोड़े और 500-600 से ज्यादा लोग थे। मेरे पास प्रोफेशनल फाइटर्स 200 ही थे। बाकी सबको कैसे संभालना है, वह दिक्कत थी। जब घोड़े भागते हैं तो वे कैसे टकराएंगे, उस वक्त किन चीजों का ध्यान रखना पड़ेगा, यह सब बताना होता है। पूरे क्रू की सुरक्षा आप पर निर्भर करती है। मेरा ध्यान भी इसी पर होता है कि किसी को कोई चोट न लगे।’

हिम्मत है तो मुमकिन है

एक्शन फिल्माते वक्त एक्शन डायरेक्टर को कलाकार की शारीरिक बनावट का भी ध्यान रखना पड़ता है। एक्शन करना मुश्किल होता है, लेकिन जब कलाकार खुद प्रशिक्षित हों तो वे मैनेज कर लेते हैं। रितिक रोशन, विद्युत जामवाल और टाइगर श्राफ जैसे कलाकार पहले से कई प्रकार की एक्शन विधाओं में प्रशिक्षित हैं। आमतौर पर अभिनेत्रियों की तुलना में अभिनेता काफी ज्यादा स्टंट करते नजर आते हैं, लेकिन इस मामले में महिलाएं भी बेहतरीन प्रदर्शन करती हैं। ‘धाकड़’ और ‘टाइगर 3’ के एक्शन डायरेक्टर परवेज कहते हैं, ‘प्रियंका चोपड़ा, दीपिका पादुकोण और कंगना रनोट जैसी अभिनेत्रियां जिस तरह का स्टंट करती हैं, वे काफी मुश्किल होते हैं। उनकी एकाग्रता स्टंट सीन को बेहतर बनाती है।’

अक्षय ने थामी बड़ी जिम्मेदारी स्टंटमैन के लिए काम करने वाली संस्था मूवी स्टंट आर्टिस्ट एसोसिएशन की तरफ से बीते कई वर्षों से स्टंटमैन्स के जीवन बीमा का प्रयास किया जा रहा था, लेकिन अलग-अलग कारणों से बीमा कंपनिया उनका बीमा करने से हाथ खड़ा कर देती थीं। साल 2017 में अक्षय कुमार ने इस संस्था से जुड़े सभी कर्मियों के मेडिकल और जीवन बीमा की जिम्मेदारी उठाई। बीते करीब चार वर्ष से वह इससंस्था से जुड़े सभी कर्मियों के मेडिकल और जीवन बीमा का प्रीमियम भर रहे हैं। कुछ स्टंटमैन की मौत होने पर उनके स्वजनों को बीमा राशि के तौर पर 20-20 लाख रुपये भी मिले।

आने वाली एकशन फिल्में

'अटैक', 'मेजर', 'बच्चन पांडे', 'शमशेरा', 'हीरोपंती 2', 'मिशन मजनू' , 'एक विलन रिटर्न्स', 'विक्रम वेधा', 'योद्धा', 'गणपत', 'एनिमल'

Edited By: Nitin Yadav