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तिरूवनंतपुरम। प्रख्यात गायक के.जे. येसुदास को लाइफटाइम एचीवमेंट पुरस्कार हासिल करने के लिए अभी और इंतजार करना होगा। केरल के संस्कृति मंत्री के.सी. जोसेफ ने सोमवार को राज्य विधानसभा में कहा कि यहां के नियम राज्य सरकार को येसुदास को यह सम्मान देने की इजाजत नहीं देते।

जोसेफ ने कहा संविधान बहुत स्पष्ट कहता है कि राज्य व्यक्तियों को कोई खिताब नहीं दे सकता और इसलिए हम येसुदास का सम्मान करने में अक्षम हैं लेकिन हम एक पेशेवर गायक के रूप में उनके 50 साल पूरा करने के बाद उन्हें सम्मानित करने के विषय में निश्चित रूप से सोचेंगे।

वह कांग्रेसी विधायक हिबि ईडन के एक निवेदन पर यह बात कही। ईडन ने सदन को बताया था कि येसुदास संगीत उद्योग में आधी सदी पूरी कर रहे हैं। उन्होंने नवंबर 1962 में पहली व्यावसायिक रिकॉर्डिग की थी और इसके बाद वह केरल की सीमा के बाहर भी बहुत लोकप्रिय हो गए थे।

ईडन ने बताया अपनी पहली रिकॉर्डिग के बाद से उन्होंने 14 भाषाओं के करीब 35,000 गीतों में अपनी आवाज दी। उन्होंने मनोरंजन उद्योग में संगीत जगत की विभिन्न हस्तियों के साथ काम किया। राज्य की ओर से उन्हें सम्मानित किया जाना उपयुक्त था। इकहत्तर वर्षीय येसूदास फोर्ट कोच्चि में ऑगस्टीन जोसेफ व एलिस कुट्टी के घर जन्मे थे। उनके पिता जाने-माने मलयालम शास्त्रीय संगीतकार व रंगकर्मी थे। वही उनके पहले गुरु भी थे। बाद में उन्होंने कोच्चि के नजदीक त्रिप्पुनिथूरु में आर.एल.वी. म्यूजिक एकेडमी से संगीत का प्रशिक्षण लिया।

उन्हें फिल्मों में गायन के लिए सात राष्ट्रीय व 17 राज्य फिल्म पुरस्कारों सहित पद्मश्री व पद्मभूषण पुरस्कार भी मिल चुके हैं। उनके दूसरे बेटे विजय येसुदास बताते हैं कि उनके पिता को गायन के लिए राज्य सरकार से पहला पुरस्कार 2007 में मिला था। वह चेन्नई में बस गए हैं लेकिन फिर भी केरल आते रहते हैं।

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