नई दिल्ली, जेएनएन। हिंदी सिनेमा की कल्ट फिल्मों में शुमार 'मुगल-ए-आजम' की रिलीज को बुधवार को 60 साल पूरे हो गए। यह फिल्म 5 अगस्त, 1960 को रिलीज हुई थी। इस फिल्म से जुड़ी कई ऐसी बातें हैं, जिसने इस फिल्म को और खास बना दिया। शीश महल में शूट हुआ रंगीन गाना हो या पृथ्वीराज कपूर, दिलीप कुमार और मधुबाला की बेहतरीन अदायगी हो, सेट से लेकर गानों तक सब कुछ भव्य था।

इस फिल्म को बनाने में 16 साल लग गए थे। साठवीं सालगिरह का जश्न मनाने के लिए फिल्म के निर्देशक के आसिफ के बेटे अकबर आसिफ ने इस फिल्म के स्क्रीनप्ले को ऑस्कर लाइब्रेरी को सौंप दिया है। अकबर लंदन में व्यवसाय करते हैं और वहीं रहते हैं। मार्गरेट हैरिक लाइब्रेरी में इस फिल्म का स्क्रीनप्ले तीन भाषाओं हिंदी, रोमन और अंग्रेजी में उपलब्ध है। साठ साल पहले अमान, कमाल अमरोही, वजाहत मिर्जा, एहसान रिजवी और के आसिफ ने मिलकर फिल्म का स्क्रीनप्ले तैयार किया था।

अकबर कहते हैं कि स्क्रीनप्ले कई दिग्गजों ने मिलकर लिखा था। उनको सम्मान देने का यह बेहतरीन तरीका था कि फिल्म के स्क्रीनप्ले को हमेशा के लिए दुनिया की सबसे जानी-मानी लाइब्रेरी में रखा जाए। आने वाली पीढ़ी इसे पढ़कर सीखेगी और इससे प्रेरित होगी। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2004 में इस ब्लैक एंड व्हाइट फिल्म को रंगीन में तब्दील कर दोबारा थिएटर में रिलीज किया गया था।

कहा जाता है, कि इस फ़िल्म के निर्माण में के आसिफ इस कदर अपनी आर्थिक स्थिति को बिगाड़ चुके थे कि उन्होंने पान और सिगरेट भी उधार पर लेना शुरू कर दिया था। निर्देशक के आसिफ की फ़िल्म ‘मुगल-ए-आजम’ जिन्होंने देखी है, उन्हें इसका ये गाना ‘जब प्यार किया तो डरना क्या...’ जरूर याद होगा। भव्य सेट में लगे शीशों में नृत्य करती अभिनेत्री मधुबाला के अक्स को देखकर दर्शक शीशमहल की शानो-शौकत से दंग रह गए थे। तब इस गाने को फ़िल्माने पर दस लाख रुपये का खर्च आया था! उस वक़्त तो इतने बजट में एक पूरी फ़िल्म तक बन जाया करती थी।

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