मुंबई। सुपरस्टार राजेश खन्ना और महानायक अमिताभ बच्चन की फ़िल्म 'आनंद' 12 मार्च 1971 में रिलीज़ हुई थी।अब इस फ़िल्म को रिलीज़ हुए पूरे 47 वर्ष हो चुके हैं मगर, अब भी इसकी कहानी, इसके पात्र, इसके गाने सभी एक दिल में बिलकुल ताज़ा है। मशहूर डायरेक्टर ऋषिकेश मुखर्जी द्वारा डायरेक्ट हुई इस फ़िल्म को देखर जब लोग थिएटर से निकले तो सभी की आंखें नम थी और ज़हन में सिर्फ एक बात थी कि 'ज़िन्दगी बड़ी होनी चाहिए, लम्बी नहीं'!

इस फ़िल्म से लोगों ने ज़िन्दगी के हर लम्हे को खुलकर जीने का सबक सीखा। यह फ़िल्म उस समय की सुपरहिट फ़िल्मों में से एक थी। आइये आपको बतातें अहिं इस फ़िल्म के बारे में कुछ अनसुनी बातें जो आपको चौंका भी सकती हैं -

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राजेश खन्ना नहीं थे इस फ़िल्म के इए पहली पसंद 

है तो शॉकिंग मगर सच यही है कि ऋषिकेश मुखर्जी इस फ़िल्म में पहले राज कपूर के भाई शशि कपूर को आनंद के किरदार के लिए चाहते थे। मगर, किसी कारणवंश शशि कपूर ने फ़िल्म के लिए मना कर दिया। इसके बाद ऋषिकेश ने राज कपूर को आनंद बनाने का सोचा मगर, उस समय राज बीमारी से ताज़ा ताज़ा उठे थे और ऋषिकेश नहीं चाहते थे कि वो फ़िल्म में राज को मरते हुए दिखाएं। इसके बाद यह रोल राजेश खन्ना तक पहुंचा।

गाने 'ज़िन्दगी कैसी ये पहेली...' के लिए बनाई फ़िल्म में ख़ास सिचुएशन 

आपको बता दें कि फ़िल्म के मशहूर गाने 'ज़िन्दगी कैसी ये पहेली...' को पहले टाइटल के बैकग्राउंड के लिए इस्तेमाल किया जाना था मगर, जब राजेश खन्ना ने यह गाना सुना तो उन्हें लगा कि इतने खूबसूरत गाने को बैकग्राउंड में डालकर व्यर्थ नहीं करना चाहिए इसलिए उन्होंने ऋषिकेश से कहकर इस गाने के लिए ख़ास सिचुएशन तैयार करवाया था।

ऋषिकेश ने की थी गुलज़ार से ये ख़ास गुज़ारिश 

ऋषिकेश को 'आनंद' की यह कहानी बहुत पसंद थी मगर, वो नहीं चाहते थे कि लोगों को यह अंत में पता चले कि 'आनंद' को कैंसर है। इसलिए, ऋषिकेश ने राइटर गुलज़ार से ये गुज़ारिश की थी कि वो कुछ ऐसा लिखें जिससे लोगों को शुरू में ही पता चल जाए कि आनंद बीमार है और वो इस बीमारी से लड़कर जीतते हैं या हारते हैं, यह सवाल पूरी फ़िल्म के दौरान लोगों के ज़हन में बना रहे।

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यहां से आया फ़िल्म में 'बाबु मोशाय'

'आनंद' में राजेश खन्ना अमिताभ को बाबु मोशाय कह कर बुलाते थे। आपको बता दने कि बाबु मोशाय मतलब 'जेंटलमैन' जो राज कपूर रियल लाइफ में ऋषिकेश मुखर्जी को कहा करते थे। ऋषिकेश ने ही यह शब्द राजेश खन्ना को बताया और इसे फ़िल्म में इस्तेमाल भी किया गया।

28 दिनों में पूरी हुई थी 'आनंद' की शूटिंग 

70 के उस दशक में फ़िल्म बनाना काफी मेहनत का काम था और इसमें कई महीने लग जाते थे। मगर, एक इंटरव्यू में राजू हिरानी ने बताया था कि 'आनंद' को ऋषिकेश ने 28 दिनों में शूट कर लिया था। 

Posted By: Shikha Sharma