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बंगाल में भगवा: सुवेंदु ने ममता को फिर दी करारी मात, भाजपा की आंधी में एक दर्जन से अधिक हेवीवेट मंत्री भी हारे

Published: Mon, 04 May 2026 10:59 PM (IST)Updated: Tue, 05 May 2026 12:12 AM (IST)

भवानीपुर में सुवेंदु को कुल 73,917 वोट जबकि ममता को 58,812 वोट मिले। सुवेंदु ने न सिर्फ भवानीपुर में ममता ...और पढ़ें

सुवेंदु ने ममता को फिर दी करारी मात (फोटो- एक्स)

सुवेंदु ने ममता को फिर दी करारी मात (फोटो- एक्स)

HighLights

  1. सुवेंदु नंदीग्राम के बाद अब ममता को उनके घर भवानीपुर में हराकर ज्वाइंट किलर बनकर उभरे

  2. मुख्यमंत्री को उनकी परंपरागत सीट पर 15,105 वोटों के बड़े अंतर से हराया

  3. ममता सहित उनके अधिकतर मंत्रियों को करारी हार का करना पड़ा सामना

राजीव कुमार झा, कोलकाता। बंगाल में भाजपा की आंधी में 15 साल से सत्ता पर काबिज रही तृणमूल कांग्रेस सरकार व सत्तारूढ़ पार्टी का प्रमुख चेहरा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद की अपनी घर की सीट तक नहीं बचा सकीं।

2021 के चुनाव में नंदीग्राम में धूल चटाने के बाद नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी अब 2026 के चुनाव में ममता को उनके घर कोलकाता के भवानीपुर में भी करारी शिकस्त देकर बड़े ज्वाइंट किलर बनकर उभरे हैं।

राज्य की सबसे हाई प्रोफाइल भवानीपुर सीट, जिसपर इस बार पूरे देश की नजर थी, सुवेंदु ने दिलचस्प मुकाबले में वहां ममता को 15,105 वोटों के बड़े अंतर से हराकर विजय हासिल की हैं।

भवानीपुर में सुवेंदु को कुल 73,917 वोट जबकि ममता को 58,812 वोट मिले। सुवेंदु ने न सिर्फ भवानीपुर में ममता को हराने में कामयाबी हासिल की है, बल्कि पूर्व मेदिनीपुर की अपनी परंपरागत नंदीग्राम सीट से भी तृणमूल प्रत्याशी पवित्र कर को 9,665 वोटों से हराकर वहां फिर शानदार जीत दर्ज की है।

2021 में सुवेंदु ने नंदीग्राम में करीबी मुकाबले में ममता को 1,956 वोटों से हराकर सबको चौंका दिया था। नंदीग्राम में सुवेंदु ने जीत का अंतर बढ़ाने के साथ अपने गृह जिले पूर्व मेदिनीपुर की सभी 16 की 16 सीटों पर पार्टी को जीत दिलाने में कामयाबी हासिल की है।

भाजपा की आंधी में न सिर्फ मुख्यमंत्री बल्कि उनकी सरकार के एक दर्जन से अधिक हेवीवेट मंत्रियों और कई पुराने विधायकों को भी करारी हार का सामना करना पड़ा है।

बंगाल में दोहराया 2011 का इतिहास

2011 में जिस तरह ममता की आंधी में वाममोर्चा सरकार के तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य समेत अधिकांश मंत्रियों का सफाया हो गया था, ठीक उसी तरह का इतिहास बंगाल में दोहराया है। ममता लगातार 34 साल के वाममोर्चा शासन का अंत कर 2011 में सत्ता पर काबिज हुई थीं।

बिजली मंत्री अरूप विश्वास से लेकर शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु तक हारे

हारने वाले हेवीवेट मंत्रियों में ममता के बेहद करीबी अरूप विश्वास से लेकर शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु तक शामिल हैं। इसके अलावा वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य, मंत्री शशि पांजा, वरिष्ठ मंत्री मलय घटक व डा मानस भुइयां, मंत्री शशि पांजा, मंत्री सुजीत बोस, मंत्री उदयन गुहा, वन मंत्री बीरबाहा हांसदा, मंत्री रथिन घोष (मध्यमग्राम में 15वें राउंड तक रात 10.30 बजे तक भाजपा प्रत्याशी से पीछे), मंत्री बंकिम चंद्र हाजरा, मंत्री बेचाराम मन्ना को करारी हार का सामना करना पड़ा है।

विधानसभा उपाध्यक्ष आशीष बनर्जी को भी हार का सामना करना पड़ा। परिवहन मंत्री स्नेहाशीष चक्रवर्ती भी रात 10.30 बजे तक पीछे चल रहे थे।

राशन घोटाले में आरोपित पूर्व वन मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक और शिक्षक भर्ती घोटाले में बेटी को नौकरी दिलाने को लेकर विवादों में घिरे पूर्व शिक्षा राज्यमंत्री परेश चंद्र अधिकारी को भी हार का सामना करना पड़ा।

तृणमूल के कई स्टार उम्मीदवार भी हारे

तृणमूल के कई स्टार उम्मीदवारों व मौजूदा विधायकों को भी करारी हार का सामना करना पड़ा है। जिसमें बरानगर से अभिनेत्री सायंतिका बनर्जी, बैरकपुर से अभिनेता राज चक्रवर्ती, सोनारपुर दक्षिण से लवली मैत्रा, राजरहाट- गोपालपुर से गायिका अदिति मुंशी व अन्य शामिल हैं। मानिकतल्ला सीट से पूर्व मंत्री साधन पांडेय की बेटी अभिनेत्री श्रेया पांडेय को भी हार का सामना करना पड़ा।

कुछ मंत्री सीट बचाने में रहे कामयाब

वहीं, कुछ वरिष्ठ मंत्री अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे। जिसमें कोलकाता के मेयर व मंत्री फिरहाद हकीम, कृषि व संसदीय कार्य मंत्री शोभनदेव चट्टोपाध्याय, अरूप राय, जावेद खान, बिप्लब मित्रा, पुलक राय, चंद्रनाथ सिन्हा शामिल हैं।