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मतगणना को लेकर आयोग ने कसी कमर तो BJP-TMC रच रहे हैं व्यूह, हाई अलर्ट पर पार्टियों के कार्यकर्ता

Published: Fri, 01 May 2026 05:35 AM (IST)Updated: Fri, 01 May 2026 06:59 AM (IST)

चुनाव आयोग ने इस बार गिनती की प्रक्रिया को न केवल पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने का संकल्प लिया है, बल्कि ...और पढ़ें

77 केंद्रों पर कड़ी पहरेदारी में होगी मतगणना (फोटो- पीटीआई)

77 केंद्रों पर कड़ी पहरेदारी में होगी मतगणना (फोटो- पीटीआई)

HighLights

  1. 77 केंद्रों पर कड़ी पहरेदारी में होगी मतगणना, अब असली मुकाबला गिनती का 

  2. सुरक्षा, पारदर्शिता और रणनीति, भाजपा-तृणमूल ने काउंटिंग डे के लिए कसी कमर 

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दोनों चरणों का मतदान शांतिपूर्वक संपन्न हो चुका है। अब सबकी नजरें चार मई की मतगणना पर टिक गई हैं। चुनाव आयोग ने इस बार गिनती की प्रक्रिया को न केवल पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने का संकल्प लिया है, बल्कि सुरक्षा और गति को प्राथमिकता देते हुए मतगणना केंद्रों की संख्या में कटौती भी की है।

इस रणनीतिक बदलाव के साथ ही राज्य का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है, जहां सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने अपनी-अपनी 'काउंटिंग वॉर रूम' रणनीतियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।

मुख्यमंत्री ममता ने चुनाव प्रचार के दौरान ही ईवीएम में संभावित हेराफेरी का अंदेशा जताते हुए अपने कार्यकर्ताओं को 'हाई अलर्ट' पर रहने का निर्देश दिया था। तृणमूल कांग्रेस का पूरा ध्यान स्ट्रांग रूम से लेकर मतगणना टेबल तक त्रिस्तरीय निगरानी पर है।

वहीं, वाममोर्चा और कांग्रेस ने भी अपने-अपने मतगणना एजेंटों की नियुक्ति के लिए मंथन तेज कर दिया है। मतगणना केंद्रों में कटौती इस बार चुनाव आयोग ने एक अहम बदलाव करते हुए 294 सीटों की मतगणना के लिए केंद्रों की संख्या एक सप्ताह पहले घटाकर 87 की थी, जिसे अब 77 कर दिया गया है, जो 2021 के 108 केंद्रों से काफी कम है।

यह निर्णय अचानक नहीं, बल्कि चरणबद्ध तरीके से लिया गया-पहले 165, फिर 150, उसके बाद 112, फिर 87 और अंतत: 87 केंद्रों पर सहमति बनी।

इस बदलाव के पीछे सिर्फ समय बचाने की मंशा नहीं, बल्कि पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता भी है। 2021 के अनुभवों से सबक लेते हुए आयोग इस बार किसी भी तरह की अव्यवस्था या हिंसा की आशंका को न्यूनतम करना चाहता है।

यही वजह है कि मतदान के बाद भी सुरक्षा बलों की भारी तैनाती जारी है और स्ट्रांग रूम से लेकर मतगणना केंद्रों तक बहुस्तरीय निगरानी सुनिश्चित की गई है। दो मई को अहम बैठक पिछले अनुभवों से सबक लेते हुए भाजपा ने इस बार अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है।

पार्टी के बंगाल चुनाव प्रभारियों ने दो मई को कोलकाता में एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है, जिस में वे नेता शामिल हैं जो अन्य राज्यों से आकर पिछले कई माह से बंगाल में चुनाव को लेकर रणनीति और कार्यों को गति दे रहे थे। इस बार भाजपा का मुख्य जोर इस बात पर है कि मतगणना एजेंट अंतिम वोट की गिनती तक केंद्रों पर डटे रहें।