राकेशधर त्रिपाठी, राजेंद्र त्रिपाठी और विजय मिश्र। तीनों दिग्गजों का घर है सैदाबाद से असड़िया मार्ग पर। बावजूद इसके सड़क बदहाल। जाहिर है कि चुनाव में यह सड़क भी मुद्दा बनेगी। असड़िया में चौपाल लगी तो फूट पड़ा लोगों का गुस्सा। उमेश तिवारी बोले कि सपा सरकार में भी इस गांव में कोई काम नहीं हुआ। लोगों की इच्छा है कि भाजपा की सरकार बने। अशोक शुक्ला हां में हां मिलाते हैं। बोले, गांव में कोई काम नहीं हुआ। लेकिन सब सहमत नहीं हुए। सरकार तिवारी..जउन काम हुआ सब त्रिपाठी जी किहेन। विशाल पांडेय बोल पड़ते हैं.समस्याएं तो बहुत हैं, पर उसे दूर करने वाले नहीं। जो विकास करेगा, वोट वही पाएगा। उनकी बात बीच में ही काटते हुए बालेन्दु शुक्ला..अरे नेता तो आपै लोगन चुनत हैं तो भोगेगा कौन।

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प्रभाकर द्विवेदी बात काटते हुए..विधायक जी हमारे गांव में क्या किए हैं। बीच में ही बोल पड़ते हैं आरएन पांडेय. ई जमाने में नेता ठीक नहीं हैं। इंदिरा गांधी के जमाने में बस चला करती थी। शांत बैठे शेरू यादव से रहा नहीं गया। बोल ही पड़े कि अखिलेश सरकार ने क्या नहीं किया है। उनके बोलते ही हंगामा शुरू हो जाता है। जितने मुंह, उतनी बातें। सरकार तिवारी..अखिलेश सरकार में एंबुलेंस मिल रही हैं। बालेंदु शुक्ला..यह तो सरकार की व्यवस्था है। गरीब गुड्डू भी चौपाल में शामिल हो जाता है..गरीब हूं साहब, ठंड लगती है, पर कंबल नहीं मिल रहा। सभी की सहानुभूति गुड्डू को मिलती है। जितम तिवारी अचानक..त्रिपाठी जी हमेशा पार्टी बदल देते हैं। शेरू यादव फिर बोल पड़ते हैं, अगर वही यहां का विकास कएं हैं तो फिर हार क्यों गए। बालेन्दु शुक्ला..जब टिकट नहीं पाते तो पार्टी बदल देते हैं।

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राजेश पांडेय..त्रिपाठी जी के अलावा हंडिया में किसी ने विकास नहीं किया। हंगामा फिर शुरू हो जाता है..। बालेन्दु शुक्ला क्षतिग्रस्त सड़कें गिनाने लगते हैं। सरकारी तिवारी बीच में बोल उठते हैं..नोट बंदी से मोदी की छवि धूमिल हुई है। बेरोजगार नौकरी ढूंढ़ रहे हैं। बालेंन्दु शुक्ला भी हां में हां मिलाते हैं। अशोक पांडेय फिर बोल पड़ते हैं। साहब गृहस्थी वाले हम पचे रहेन, शादी बियाह को तरस गए। नोट बंदी ने बहुतै परेशान किया। अस्पताली सिंह देर से चौपाल में पहुंचते हैं, लेकिन आते ही मोर्चा संभाल लेते हैं..हंडिया में चुनाव जात-पात और धर्म का है। बालेंदू फिर दखल देते हैं। भविष्य खत्म हो गया, वर्तमान को देखिए। अगर सबसे ज्यादा दिन यहां केशधर ही रहे तो फिर काम कौन किया।

संतोष पांडेय.. भइया इ पांच साल में केवल जाति की जनीति हुई है। बालेंदु फिर..हंडिया का वर्तमान विधायक मृदुभाषी है। बीच में संतोष पांडेय टोकते हैं..इनसे एक हजार गुना ज्यादा मृदुभाषी इनके पिता जी थे। हंगामा फिर शुरू हो जाता है..। संतोष, नेहरू जी के बाद कोई काम नहीं किया। इस बीच, चाय आ जाती है। चाय की चुस्की लेते ही वहां का माहौल बदल जाता है। ठहाके गूंजते हैं और चौपाल से लोग जाने लगते हैं।

प्रस्तुति : संजय कुशवाहा/संजीव त्रिपाठी

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