वाराणसी, जेएनएन। लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण में अहम सीट बनारस में गुरुवार को सपा-बसपा-रालोद गठबंधन प्रत्‍याशसी शालिनी यादव के समर्थन में ताकत दिखाया। संत रविदास की स्थली सीरगोवर्धन में दोपहर करीब एक बजे जनसभा को संबोधित करने मायावती, अखिलेश यादव व अजीत सिंह पहुंचे। जनसभा को तीनों दलों के प्रमुख बनारस के साथ ही चंदौली व मीरजापुर में भी चुनाव को धार देंगे। इस‍के लिए सुबह से सपा और बसपा कार्यकर्ताओं की कार्यक्रम स्‍थल पर जुटान शुरु हो चुकी थी।

वाराणसी के सीर गोवर्धन में जनसभा को संबोधित करते हुए बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि - कांग्रेस के शासनकाल में गलत नीतियों की वजह से ही फिर पार्टी को केंद्र और राज्यों की सत्ता से वापस होना पड़ा है। अंग्रेजों के जाने के बाद कांग्रेस लंबे अरसे से सत्ता में रही। मगर कांग्रेस ने गरीबी बेरोजगारी दूर नहीं की। किसान खुशहाल नहीं हुए। इसके साथ डा. आंबेडकर ने आदिवासियों व दलितों को जो कानूनी अधिकार दिये उसका लाभ लोगों को नहीं मिल सका। कांग्रेस ने निष्ठा से काम किया होता तो बहुजन व समाजवादी पार्टी की जरुरत नहीं होती। इसके लिए कांग्रेस जिम्मेदार है। अब लोकसभा के लिए आम चुनाव में बीजेपी पूजीवादी और संप्रदायिक सरकार है। इस बार भाजपा केंद्र की सत्ता से बाहर चली जाएगी। पीएम नरेंद्र मोदी ने पिछले चुनाव में कमजोर लोगों को अच्छे दिन के सपने दिखाए वह पूरे नहीं हो सके। 

कांग्रेस ने निष्ठा से काम किया होता तो बहुजन व समाजवादी पार्टी की जरुरत नहीं होती। इसके लिए कांग्रेस जिम्मेदार है। अब लोकसभा के लिए आम चुनाव में बीजेपी पूजीवादी और संप्रदायिक सरकार है। इस बार भाजपा केंद्र की सत्ता से बाहर चली जाएगी। पीएम नरेंद्र मोदी ने पिछले चुनाव में कमजोर लोगों को अच्छे दिन के सपने दिखाए वह पूरे नहीं हो सके। भाजपा की चौकीदारी अमीरों के लिए है। उप्र में भाजपा सरकार ने अपने आवारा जानवरों व पशुओं से लोग परेशान हैं। भाजपा जातिवादी और सांप्रदायिक व पूंजीवादी सोच के कारण गरीबों दलितों पिछडों व मुस्लिमों का विकास नहीं हो सका है। आपको मालूम है कि सरकारी नौकरियों में आरक्षण का कोटा अधूरा है। पदोन्नति में आरक्षण प्रभावहीन है। विरोधी दलों की सरकार में प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण की व्यवस्था नहीं है। पूंजीपतियों को ठेका दिया जा रहा है जिससे आरक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा है। मुस्लिम व अल्पसंख्यकों की हालत खराब है। आए दिन जुल्मों चरम पर हैं। केंद्र ने नोटबंदी व जीएसटी को बिना तैयारी के लागू किया है तो गरीबी बेरोजगारी और बढ़ा है। कारोबारी दुखी हैं। अर्थव्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। जिससे भाजपा सरकार में सीमाएं सुरक्षित नहीं हैं। आतंकी हमले हो रहे हैं जिसमें जवान शहीद हो रहे हैं। इसे भी चुनाव में भुनाने में लगे हैं। काशी को विकसित करने में स्वच्छता बुनकरों की समस्याओं को दूर करने का जो वादा है वह भी पूरा नहीं हो सका है। पीएम ने यहां सैकडों प्राचीन मंदिरों को तोड़ा है जिससे परिवारों को दुख झेलना पड़ा। गंगा की सफाई देश का मुद्दा है मगर लाखों करोडों खर्च के बाद भी वादा पूरा नहीं हुआ। अपनी गंगा मैया से मोदी ने वादाखिलाफी की है। गंगा मैया जरुर सजा देगी।

अखिलेश ने भाजपा पर लगाए आरोप

सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि ये चुनाव जिस समय हम और आप मिल रहे हैं, चुनाव प्रचार का एक दिन बाकी है। कल के बाद चुनाव प्रचार खत्म हो जाएगा। चुनाव प्रचार खत्म होते ही वोट डालना है और जैसे ही वोट डाल कर खत्म होगा, अगर आप दिन गिन लें केवल सात दिन बाकी हैं, देश को नया प्रधानमंत्री मिलने जा रहा है। आप गिन लो, आज के बाद केवल सात दिन हैं और सात दिन बाद एक देश का नया प्रधानमंत्री होगा। इसलिए हम बनारस के अपने सभी लोगों से निवेदन करने आए हैं, अपील करने आए हैं। वैसे तो न जाने कितने लोग धोखा खाए होंगे। ये धोखे वाली सरकार और धोखे वाले प्रधानमंत्री जी ने न जाने कितनों को धोखा दिया होगा लेकिन जो धोखा बनारस वालों को मिला ऐसा धोखा किसी को न मिला होगा। बताओ यही तो शहर है, यही तो धार्मिक नगरी, सांस्कृतिक नगरी और धरती का सबसे पुराना शहर, यही तो शहर है जिसमें देश के प्रधानमंत्री ने कहा था हम बनारस को क्योटो बना देंगे। बताओ हमाने बनारस के साथियों हम वाराणसी में आए हैं या क्योटो में आए हैं। यदि क्योटो में नहीं आए हैं तो देश को नया प्रधानमंत्री दीजिए यही निवेदन करने आया हूं। वैसे मुझे नहीं लगता कोई क्योटो गया होगा। यहां जितने लोग बैठे हैं कोई क्योटो गया क्या।

अरे ये नौजवान हैं, मोबाइल चला लेते हैं, कभी तस्वीर तो देखी होगी क्योटो की और न देखी होगी तो टाइप करें क्योटो और देख लो तस्वीरें और अपने शहर के किसी कोने से मिला लेना तो समझ जाओगे कि कितना बड़ा धोखा देश के पीएम ने दिया है। हम कभी गए थे अपने बचपन में क्योटो, हमें देखने का मौका मिला कभी क्योटो और जब हमने सुना कि भाजपा के लोग और देश के प्रधानमंत्री हमारे वाराणसी को क्योटो बनाना चाहते हैं, हमें भी थोड़ी देर के लिए अच्छा लगा। हमें भी याद है जब मैं क्योटो देखने के लिए गया तो टोकियो बेलेट ट्रेन में बैठकर गया था। आज जब बनारस के बारे में सुनता हूं तो दूख होता है तकलीफ होती है। बताओ धोखा किसी को दे देते, हमें दे देते, किसी और को दे देदे, लेकिन जरा सोचो बाबा भोले की नगरी को, भगवान को धोखा दिया। बताओ गलियों में कूड़ा है कि नहीं है और जो लाइन पड़ी थी सीवर की अभी तक नहीं जोड़़ पाए हैं. न जाने कितना कचरा है। यही शहर जिसके बगल में हमनारी गंगा मइया बहती हैं, और वरुणा भी हैं, बताओ शहर के लोगों पानी पीने के इंतजाम की क्या व्यवस्था की है। पानी पीने के लिए नहीं और स्वच्छ भारत का सपना दिखाया। पैर धोए और हम पैर धोने के चक्कर में रहे, नौजवानों की नौकरियां धो दी। कैसा हाल है गलियों का, क्या हाल बना दिया बताओ। गंगा मइया की कसम खाई थी कि गंगा मइया हम तुम्हें साफ कर देंगे। जिनकी नीयत साफ नहीं वे कभी गंगा मइया को साफ नहीं कर सकते। हमारे नाव चलाने वालों को धोखा दे दिया, हमारे नाव चलाने वालों को भी परेशानी में डाल दिया। वादा तो क्योटो का था, गंगा मइया को साफ करने का था, यह तो न था कि नाव चलाने वालों को धोखा दे देंगे। सोचो कैसे-कैसे धोखे खाएं हैं आपने। यही बनारस जब लोकसभा के चुनाव में जब मैं आया था, हमारे साथी जानते होंगे कि हमने आखिरी में वादा किया था कि जिता दोगे तो तारों को अंदर कर देंगे, बताइए कितने तार अंदर हो गए। यह जो बिजली का दावा करते हैं, हमारे बाबा मुख्यमंत्री कि हमने बिजली दी है बनारस में।

आप जानते होंगे कि वह तो समाजवादी लोग थे, हमारा सीना बड़ा हो या न हो, दिल बड़ा है। एक बूढ़े-बुजुर्ग विधायक धरने पर बैठ गए थे, वो ऐसे धरने पर बैठे और कहा जब तक वाराणसी को 24 घंटे बिजली न मिलेगी धरने से न उठेंगी। जानकारी मिली कि एक बुजुर्ग विधायक हैं, उम्र बहुत हैं, आपने बिजली न दी तो हो सकता है उनका स्वास्थ्य गड़बड़ हो जाए। बुलाया तकलीफ सुनी, कहा यही मांग है तो हम आपका वादा पूरा करते हैं, उस दिन के बाद बनारस में 24 घंटे बिजली रही। हम तो बधाई देंगे, कि बुजुर्ग विधायक धरने पर न बैठते तो शायद 24 घंटे बिजली न मिलती। उन बुजुर्ग विधायक जी से हमने वादा किया था, उन्होंने भी वादा किया था कि उप्र का बिजली का कोटा बढ़वा देंगे। कोटा तो न बढ़ा बिजली का, जिन्होंने बिजली बढ़वाई 24 घंटे उनका टिकट काट दिया। अब पता नहीं रिटायरमेंट के बाद न जाने किस घाट पर बैठ कर भजन सुन रहे होंगे। अपने लोगों को धोखा देते हैं ये। बाबा मुख्यमंत्री न जाने क्या क्या कहते हैं। ये चाय वाला बनकर आए और हमें आपको धोखा दे दिया। चाय के बहाने लोगों ने समर्थन दे दिया, अब तो जान गए होंगे चाय कैसी निकली है। वही चाय वाले अब चौकीदार बन कर आ रहे हैं। क्या आपको भरोसा है कि ऐसे चौकीदारों पर। आपके प्राचीन न जाने कितने ौंदिर तोड़ दिए गए। विरासत को तोडड़ दिया। बताओ मंदिर तोड़े कि नहीं। मंदिर तोड़ दिए जो हमारी विरासत थी जो हम आने वाली पीढ़ी को देकर जाते। इस तरह उन लोगों ने हमारी विरासत को भी खत्म करने का काम किया है। ये चौकीदार बन कर आए हैं और वहीं बाबा मुख्यमंत्री यूपी में आए हैं। उन्होंने कानून व्यवस्था ठीक करने के लिए सदन में कहा कि जाओ कानून व्यवस्था ठीक हो जाएगी। अगर आप ठोक दोगे। और ठोको नीति का असर यह हुआ है कि कोई किसी की सुनवाई नहीं, बताओ यहां चोरियां हुई हैं, यहां कानून व्यवस्था क्या है बनारस के लोगों। डकैती हुई नहीं पता लगा, सोनारों का सोना चला गया। हमारे सराफा व्यापारी जानते होंगे पुलिस के सामने पूरा का पूरा चोरी हो गया आज तक नहीं मिला। बताओ ठोको नीति का असर क्या हुआ। हमने तो देखा कई जगह जो ठोको नीति सिखाई थी हमारे मुख्यमंत्री जी ने हमारे विधायक व सांसदों में भी आजकल ठोको नीति चल रही है। कभी सांसद जी विधायक जी को ठोक रहे हैं, कहीं पर पुलिस ठोकी जा रही है और हमने जो अच्छा इंतजाम किया था 100 नंबर पुलिस का। वैसे तो आपके सांसद दुनिया के हर कोने घूम आए। शायद कोई ही कोना बचा हो लेकिन बनारस को कुछ मिला या नहीं मिला। सबसे गले मिले लेकिन मिला कुछ नहीं आपको। समाजवादियों ने दिया सबसे बेहतरीन चीज सौ नंबर की पुलिस, फोन मिलाओ और पुलिस पहुंच जाएगी और मदद करेगी। यही बनारस शहर है, कोई मोहल्ला न होगा जहां समाजवादियों का लैपटाप न पहुंच होगा। ऐसे लैपटाप दिए जो आज भी चलते हैं तो नेताजी और हमी लोग दिखाई देते हैं। बाबा सीएम ने लैपटाप नहीं दिए क्योंकि वे चलाना नहीं चाहते हैं तो क्या हो डिजिटल इंडिया का, स्टैंड अप इंडिया, स्किल इंडिया क्या हुआ मेड इन इंडिया। इस बार बनारस बताएगा मेड इन इंडिया क्या है। वोट देकर बताएगा। इसलिए धोखा खाए। ये सरकार धोखे से बनी, गंगा मइया साफ नहीं कर पाए। हमने कहा वरुणा साफ कर देंगे लेकिन पता नहीं क्या किया इन लोगों ने काम रोक दिया। नहीं हो रहा काम, बताओ काम हो रहा वरुणा नदी का की नहीं हो रहा। हम तो कहते हैं, आज काम पर बात कर लो लेकिन नहीं कर रहे हैं। बताओ अच्छे दिन आ गए क्या, नौकरी मिल गई क्या। नोट बंदी के बहाने हमारा आपका का सब पैसा छीन लिया, सब जमा करा लिया। याद करो वो दिन हमारे बनारस के साथियों जब नोटबंदी हुई थी बताओ काम रूक गया था कि नहीं। हमारे बुनकर भाई जानते होंगे कि मजदूरी से लेकर तमाम लोग जो हाथ से काम करते हैं उनकी रोजी रोटी छीन गई कि नहीं। जो लोग दूर कहीं जाकर काम करते थे लेकिन नोटबंदी और जीएसटी ने उनको वापस घर भेज दिया। यह भाजपा की गलत नीतियों का असर रहा। नोटबंदी से कहां काला धन आया और जो पैसा जमा भी था वो तमाम उद्योगपति भारत छोड़ कर भाग गए। वो हमारे आपके नहीं किसी और के साथी थे। इसलिए ये प्रधानमंत्री हमारे आपके नहीं हैं, ये देश की एक पसरेंट संपन्न आबादी के पीएम हैं। इन्होंने धोखा दिया और अर्थव्यवस्था हमारी नीचे जा रही है और जिस समय अर्थव्यवस्था नीचे जाती है, नौकरी व रोजगार किसी के हाथ नहीं लगने वाला। इस लिए बहुत सारे सवाल हैं, यह पीएम का क्षेत्र जरूर है लेकिन भाजपा के लोग जानते हैं कि आने वाले समय में महागठबंधन आ रहा है, ये घबड़ाए हुए हैं। अब सो नहीं पा रहे हैं, और अब तो हार चेहरे पर दिखाई देने लगी है। और सिर्फ यूपी से नहीं घबड़ाए हैं, बंगाल से भी घबड़ा गए। हमारे गठबंधन को जो हमारा आपका गरीबों का गठबंधन है, उसे कहते हैं जाति का गठबंधन है, हम उन्हें बताना चाहते हैं कि यह गठबंधन जातियों का नहीं, यह गरीबों का गठबंधन है और टूटने वाला नहीं क्योंकि दिलों से बना है। 

बनारस के साथी जागरूक हैं, पहले चरण से सुनाई दे गया कि नहीं सुनाई दे गया। वोट पड़ रहा है या नहीं पड़ रहा। सब जीत कर आ रहे हों, चंदौली में क्या हाल है गठौंधन का। बताओ संजय चौहान जीत रहे हैं कि नहीं, बगल में हमारे निषाद भाई भी जीत रहे हैं मीरजापुर से। 

यह सरकार कहती है कि हम बहुत बहादुर हैं लेकिन आंकड़ों पर गौर करें तो कोई ऐसा दिन नहीं जब हमारा जवान शहीद न हो रहा हो। भाजपा के लोग दावा करते हैं हम सीमा को सुरक्षित रख सकते हैं, भारत की सीमाौं कभी इतनी असुरक्षित न रहीं जितनी अब हैं। हम यदि जानना चाहें इनसे कि कितने किसानों ने आत्महत्या कर ली तो जवाब नहीं देना चाहते। बताओ नौजवान बेरोजगार हैं घर बैठे हैं, सरकार जवाब नहीं देना चाहती। ये सरकार जो आतंकवाद से लडऩा चाहती है, बनारस वालों ने देखा होगा कि वो एक जवान तेजबहादुर यादव से मुकाबला नहीं कर पाए। बताओ क्या ये जवान कुछ सवाल लेकर पूछना चाहता था। आप दाल अच्छी नहीं दे पा रहे हो और बनारस में रबड़ी खा रहे हो। आप इनको वर्दी अच्छी नहीं दे पा रहे। मांग इतनी तो थी कि वर्दी, जूते मोजे अच्छे मिल जाएं। हमें बुलेट ट्रेन नहीं चाहिए, हमें बुलेट प्रूफ जैकेट चाहिए लेकिन ये जवाब नहीं दे पाए। 

बनारस का चुनाव देश देखेगा। बनारस की पहचान और बनारस के बारे में दुनिया जानती है। यही लोग जो दावा करते थे, झूठा सपना दिखाते थे कि दुुनिया के लोग हमारा कितना सम्मान करते हैं। जब प्रांस के राष्ट्रपति आए थे सबसे बड़े सोलर प्लांट का मीरजापुर में उद्घाटन किया बताओ किसने बनाया, समाजवादियों ने। दुनिया के दूसरे राष्ट्रपति को ले आए थे दिल्ली में मेट्रो से नोएडा तक ले गए थे सपा बसपा ने बनया था। दुनिया के न जाने कितने लोगों से गले मिले और पांच साल पूरे हो गए तो दुनिया के अखबार लिखते हैं कि अगर सरकार दोबारा आ गई तो भारत में लोकतंत्र खत्म हो जाएगा। दूसरी मैगजीन लिखती है कि पीएम समाज को बांटने वाले हैं, जिसने तारीफ की तो कुछ नहीं कहा लेकिन लिखने वाला पाकिस्तानी है। जब दुनिया जान गई कि लोकतंत्र खत्म होने वाला है, गुजरात मॉडल जातियों को बांटने वाला और धर्म के बीच नफरत फैलाने वाला था। बनारस के लोगों मदद करोगे कि नहीं करोगे। मदद करोगे कि नहीं करोगे। नौजवान तो करेंगे, हम उन पढ़े लिखे लोगों, व्यापारियों से भी जानना चाहेंगे कि लोकतंत्र खतरे में है या नहीं, लोकतंत्र खतरे में है तो चाभी आपके हाथ है, देश में हार जीत होगी, हम जीतेंगे, सीटें ज्यादा जीत रहे हैं लेकिन बनारस में भी साइकिल चले निवेदन करने आए हैं। 

लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण में गठबंधन गुरुवार को पीएम के संसदीय क्षेत्र बनारस में ताकत दिखाएगी। संत रविदास की स्थली सीर गोवर्धन में रैली कर गठबंधन दलों के प्रमुख पूर्वांचल को साधने का जतन करेंगे। बनारस के साथ ही चंदौली व मीरजापुर के प्रत्याशियों के समर्थन में आयोजित इस रैली को सपा प्रमुख अखिलेश यादव, बसपा प्रमुख मायावती व राष्ट्रीय लोकदल प्रमुख अजीत सिंह संबोधित करने दोपहर एक बजे मंच पर पहुचे। गठबंधन की रैली हालांकि पहले राजातालाब में प्रस्तावित थी। बाद में बदले हालात को देखते हुए इसके लिए सीर को उपयुक्त स्थान माना गया।

वास्तव में सीर गोवर्धन में एक छोर पर संत रविदास स्थली तो इसके दूसरे छोर पर संत मत अनुयायी आश्रम मठ गड़वाघाट है। माना जाता है कि दोनों आश्रम सपा-बसपा के मूल वोट बैंक की श्रद्धा और आस्था से जुड़े हैं। इन दोनों ही स्थलों पर हाल के वर्षों में भाजपा ने भी फोकस किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद संत रविदास मंदिर पूर्व में दो बार आ चुके हैं तो गड़वाघाट आश्रम में पिछले चुनाव के दौरान उनका आना हुआ था। इस चुनाव में गड़वाघाट आश्रम सीएम योगी आदित्यनाथ और भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हाल ही में गए थे। इस लिहाज से गठबंधन नेताओं का दोनों आश्रमों में जाने की संभावना भी जताई जा रही है, हालांकि प्रोटोकाल में इसका जिक्र नहीं है। वैसे सपा प्रमुख भी पहले कई बार गड़वाघाट आश्रम आ चुके हैं तो बसपा सुप्रीमो मायावती संत रविदास मंदिर आ चुकी हैं। रैली की तैयारियों को लेकर तीनों दलों के नेता बुधवार देर रात तक सीर में पंडाल आदि की तैयारियों में जुटे रहे। 

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Posted By: Abhishek Sharma

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