नई दिल्ली। तेलंगाना में टीआरएस प्रमुख और मौजूदा मुख्‍यमंत्री के चंद्रशेखर राव का राज्‍य में जल्‍द विधानसभा चुनाव कराने का दांव सफल साबित हो गया है। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि टीआरएस की गुलाबी आंधी में राज्‍य की दूसरी पार्टियां धूल चाट रही हैं। दरअसल, तेलंगाना राष्ट्रीय समिति पार्टी का चुनाव चिन्ह गुलाबी रंग का है। तेलंगाना राष्ट्र समिति अपनी सभी प्रचार सामग्री गुलाबी रंग का इस्तेमाल करती है। टीआरएस प्रमुख के चंद्रशेखर राव सहित तेलंगाना राष्ट्रीय समिति के सभी नेता गले में गुलाबी रंग का स्कार्फ़ पहनते हैं। इतना ही नहीं इस पार्टी का जो भी आयोजन होता है उसमें विधायकों के अलावा उनके समर्थक भी गुलाबी रंग का स्‍कार्फ पहनते हैं। वहीं पार्टी के आयोजन के लिए लगने वाला शामियाना भी लगभग गुलाबी रंग का ही होता है।  

रुझानों में यहां टीआरएस को भारी बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। इसके साथ ही अपने दम पर सरकार बना की राह पर बढ़ सकते हैं। इस तरह टीआरएस ने राज्य में पहली बार हुए विधानसभा चुनाव में धमाकेदार वापसी की है। इस दमदार जीत के साथ उन्‍होंने राज्‍य में अपनी मजबूत होती छवि को बखूबी साबित कर दिया है। अब वह राज्‍य की दोबारा कमान संभालने के लिए भी पूरी तरह से तैयार है। चंद्रशेखर राव ने गजवेल सीट से पचास हजार से अधिक मतों से जीत दर्ज की है जबकि उनके बेटे केटी रामाराव ने लगभग 89009 मतों से दमदार जीत हासिल की है।  

ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्‍योंकि रुझानों में उनकी पार्टी बहुमत से कहीं आगे बढ़ती हुई दिखाई दे रही है। बहरहाल, आपको यहां पर ये बताना बेहद जरूरी होगा कि चंद्रशेखर राव ने विधानसभा को उसका कार्यकाल पूरा होने के आठ माह पहले ही भंग कर दिया था। उनका यह फैसला अब सही साबित होता दिखाई दे रहा है।

यहां पर एक खास बात और है कि विधानसभा चुनाव से पहले ही उनके बेटे और राज्‍य के आईटी मंत्री तारक रामाराव ने चुनाव से पहले दावा किया था की यदि टीआरएस अपने दम पर सरकार नहीं पायी तो वो राजनीति से संन्यास ले लेंगे।

रुझानों की मानों तो तेलंगाना में टीआरएस फिलहाल 90 सीट पर आगे है। इस चुनाव से पहले राज्य में टीआरएस की 63 सीट थीं। आपको बता दें कि तेलंगाना के गठन के बाद राज्‍य में पहली बार विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। वोटों की गिनती से पहले टीआरएस की नेता के कविता ने भी राज्य में दोबारा सत्ता मे वापसी का विशवास जताया था।

पार्टी कार्यकर्ताओं और उनके नेताओं द्वारा पार्टी का रंग धारण करने की बात करें इसमें दक्षिण से लेकर उत्तर भारत तक में काफी कुछ समानता पाई जाती है। दक्षिण में ही जहां डीएमके विधायक अकसर काले रंग की शर्ट में दिखाई देते हैं तो वहीं चंद्रबाबू नायडू के विधायक असेंबली में भी पीले रंग की ड्रेस पहने दिखाई देते हैं। इनका ऐसा कोई ड्रेसकोड भले ही न हो लेकिन इस तरह से यह जगह-जगह अपनी पार्टी का प्रचार और उसकी मौजूदगी को दर्ज करवाने में जरूर सफल होते हैं।

उत्तर भारत की बात करें तो यहां पर हरियाणा में इनेलो के कार्यकर्ता अकसर ही हरे रंग की टोपी या पगड़ी पहने दिखाई देते हैं। वहीं उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी के आयोजन में शामियाने से लेकर लोगों के सिर पर सजी टोपियां नीले ही रंग में दिखाई देती हैं। यही हाल कुछ समाजवादी पार्टी का भी है, जहां लाल और हरे रंग की चमक साफतौर पर दिखाई देती है।

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