जयपुर। राजस्थान में इस बार मेवाड़ यानी उदयपुर सम्भाग के सत्ता की चाबी होने का मिथक टूट गया। पिछले चार चुनाव में यह पहली बार है कि जब मेवाड़ में ज्यादा सीटें हासिल करने वाली पार्टी विपक्ष में बैठेगी।

राजस्थान में उदयपुर सम्भाग में आने वाले उदयपुर, राजसमंद, प्रतापगढ़, बासंवाड़ा, डूंगरपुर और चित्तौडगढ़ जिलों की 28 सीटों को सत्ता की चाबी माना जाता रहा है। ये सभी जिले आदिवासी बहुल जिले है और राजस्थान की ज्यादातर अनुसूचित जनजाति की सीटें इसी सम्भाग में है। दोनों प्रमुख दल हमेशा अपने प्रचार अभियान की शुरूआत भी इसी सम्भाग से करते है। इस बार भी वसुंधरा राजे ने राजसमंद के चारभुजा से गौरव यात्रा की शुरूआत की और राहुल गांधी ने उदयपुर से प्रचार अभियान शुरू किया। प्रधानमंत्री ने भी बेणेश्वर धाम में बडी चुनाव सभा की। माना जाता है कि आदिवासी बहुल जिला होने के कारण यहां का मतदाता एकमुश्त एक पार्टी के पक्ष में वोट डालता है।

यही कारण है कि 2013 में भाजपा ने यहां 28 में से 25 सीटें ली और सरकार बनाई। इससे पहले 2008 में कांग्रेस ने 28 में से 20 सीटें जीती और सरकार बनाई। इससे पहले 2003 में भाजपा ने 28 में से 21 सीटें जीती और सराकर बनाई। लेकिन इस बार यह मिथक टूट गया। इस बार यहां से भाजपा ने 28 में से 15 और कांग्रेस ने 10 सीट हासिल की है। ऐसे में ज्यादा सीटे भाजपा के पास है, लेकिन यह पार्टी इस बार विपक्ष में बैठेंगी। यहां बाकी बची तीन मे से दो सीटें एक नई पार्टी भारत ट्राइबल पार्टी ने जीती है। एक अन्य निर्दलीय के खाते में गई है। भाजपा के यहां से गुलाबचंद कटारिया और किरण माहेश्वरी जैसे बड़े नेता जीत कर पहुंचे है। जबकि कांग्रेस की ओर से सी.पी.जोशी और रघुवीर मीणा जैसे नेता जीत कर आए है।

 

Posted By: Sonal Sharma

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