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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 17, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Rajasthan Election 2023: राजस्थान में BJP को मिलेगा चुनावी फायदा, महाराणा प्रताप के वंशज और भवानी सिंह भाजपा में शामिल

By Jagran NewsEdited By: Shalini Kumari
Published: Tue, 17 Oct 2023 02:17 PM (IST)

प्रसिद्ध मेवाड़ राजा महाराणा प्रताप सिंह के वंशज विश्वराज सिंह मेवाड़ और करणी सेना के संस्थापक लोकेंद्र सिंह कालवी के ...और पढ़ें

विश्वराज सिंह मेवाड़ और भवानी सिंह कालवी ने थामा भाजपा का दामन
विश्वराज सिंह मेवाड़ और भवानी सिंह कालवी ने थामा भाजपा का दामन

HighLights

  1. महाराण प्रताप के वंशज विश्वराज सिंह मेवाड़ ने ज्वाइन किया भाजपा
  2. करणी सेना के संस्थापक लोकेंद्र सिंह कालवी के बेटे भवानी सिंह कालवी ने थामा भाजपा का हाथ
  3. राजपुत नेताओं के जरिए भाजपा का बड़ा दांव

पीटीआई, नई दिल्ली। प्रसिद्ध मेवाड़ राजा महाराणा प्रताप सिंह के वंशज विश्वराज सिंह मेवाड़ और करणी सेना के संस्थापक लोकेंद्र सिंह कालवी के बेटे भवानी सिंह कालवी ने मंगलवार को भाजपा का दामन थाम लिया है। पार्टी 25 नवंबर को होने वाले राजस्थान विधानसभा चुनावों के लिए अपनी कमर कस रही है।

वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में ज्वाइन की पार्टी

भवानी सिंह कालवी और विश्वराज सिंह मेवाड़ ने राजस्थान भाजपा अध्यक्ष सी पी जोशी, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, इसके राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह और भाजपा के मुख्य प्रवक्ता अनिल बलूनी की उपस्थिति में पार्टी में शामिल हुए। बीजेपी में शामिल होने के बाद दोनों नेताओं ने पार्टी की सराहना की। मेवाड़ ने जोर देकर कहा कि लोगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सक्षम और दूरदर्शी नेतृत्व का समर्थन करना चाहिए। वहीं, मेघवाल ने विश्वास जताया कि राजस्थान की जनता कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर भाजपा को सत्ता दिलाएगी।

दोनों हैं राजपुत समुदाय के नेता

मालूम हो कि भवानी सिंह कालवी एक मशहूर पोलो खिलाड़ी भी रहे हैं, जबकि विश्वराज मेवाड़ के पिता महेंद्र सिंह मेवाड़ 1989 में चित्तौड़गढ़ से बीजेपी के टिकट पर लोकसभा के लिए चुने गए थे। दोनों ही नेता राजपूत समुदाय से हैं, जो राजस्थान में एक महत्वपूर्ण मतदान क्षेत्र है।

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एक तीर से तीन निशाने

दरअसल, पांच बार के विधायक और पार्टी के कद्दावर नेता भैरों सिंह शेखावत के दामाद नरपत सिंह राजवी को इस बार टिकट नहीं दिया गया है, जिसके बाद वे लगातार पार्टी नेतृत्व पर निशाना साध रहे थे। ऐसे में भाजपा ने राजपूतों को आश्वस्त करने की कोशिश में इन दोनों नेताओं को अपने साथ जोड़ा है।

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