जयपुर, नरेन्द्र शर्मा। दो दिन बाद राजस्थान में मतदान होना है। इस बार टोंक सीट पर लोगों की नजर टीकी हुई है। पिछले 46 सालों में पहली बार कांग्रेस ने यहां मुस्लिम उम्मीदवार नहीं उतारा है, तो 38 साल बाद पहली बार भाजपा ने यहां किसी मुस्लिम को टिकट दिया है। कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में पीसीसी अध्यक्ष सचिन पायलट और भाजपा प्रत्याशी के रूप में वसुंधरा सरकार के परिवहन मंत्री यूनुस खान चुनाव मैदान में है।

नवाबों का शहर टोंक का सियासी समीकरण

प्राचीन समय में टोंक नवाबों की रियासत हुआ करती थी। आमिर खान पिंडरी ने बनास नदी के ठीक दक्षिण में टोंक शहर बसाया था। उल्लेखनीय है कि 1972 से लेकर 2013 तक टोंक से कांग्रेस मुस्लिम प्रत्याशी ही उतारती रही है, 1980 से लेकर 2013 तक भाजपा ने यहां केवल हिंदू प्रत्याशी को मैदान में उतारा है। टोंक की सियासत को अब तक हिंदू और मुसलमान के नजरिए से देखा जाता रहा है, लेकिन इस बार सियासत की हवा उल्टी बह रही है।

अब तक संघ की प्रयोगशाला के तौर पर रहे टोंक सीट पर चुनाव भाजपा और कांग्रेस के बीच होने के बजाय हिंदू-मुस्लिम के आधार पर होता रहा है। इस बार राजनीति सांप्रदायिक नहीं बल्कि जातिगत बन गई है। यहां गुर्जर मतदाताओं की संख्या करीब 45 हजार है,वहीं 70 हजार मुस्लिम मतदाता है। करीब 80 हजार एससी-एसटी है। अगर कांग्रेस का गणित माने तो मुस्लिम,गुर्जर औद एससी मतदाताओं के एक साथ आने पर पायलट आसानी से चुनाव जीत जाएंगे।

यूनुस खान बीजेपी के तुरुप का इक्का या बलि का बकरा

भाजपा ने बड़ी राजनीतिक चाल चलते हुए राज्य के प्रमुख मुस्लिम नेता यूनुस खान को चुनाव मैदान में उतारा। पहले जहां चुनाव एक तरफा पायलट के पक्ष में माना जा रहा था,वहीं यूनुस खान ने मात्र दो सप्ताह में मुकाबले को दिलचस्प बना दिया ।मंगलवार को सीएम वसुंधरा राजे और केन्द्रीय मंत्री नितिन गड़करी के रोड़ शो को मिले जनसमर्थन से भाजपा खेमा उत्साहित है। अब बड़ा सवाल है कि क्या यूनुस खान भाजपा के लिए तुरुप का पत्ता है या फिर पार्टी ने उन्हें बलि का बकरा बना दिया है?

ये है टोंक के मुद्दे

टोंक एक पिछड़ा हुआ ग्रामीण इलाका है। यहां पर सुविधाओं के नाम की कोई चीज नहीं है। ना तो यहां रेलवे लाइन है और ना ही बड़ा अस्पताल है। यहां की 80 फीसदी आबादी खेती पर निर्भर है। गांव के लोगों का कहना है कि इस बार सचिन पायलट से उन्हें काफी उम्मीदें है। सचिन पायलट युवा है। जयपुर से दिल्ली तक उनकी पहुंच है। अजमेर और दौसा में सांसद रहते हुए उन्होंने बहुत विकास किया है, अब टोंक में भी करेंगे। टोंक में ही प्रदेश का सबसे बड़ा बीसलपुर बांध है, जहां से जयपुर की प्यास बुझती है लेकिन टोंक को लोगों को पानी नहीं मिलता । किसानों की बड़ी समस्या फसलों का सही मूल्य नही मिलना है।  

Posted By: Preeti jha