जयपुर, नरेन्द्र शर्मा। राजस्थान में सत्ता वापसी के जुगाड़ में जुटी कांग्रेस के लिए घटता वोट प्रतिशत चिंता बढ़ा रहा है । कांग्रेस के नेता वोट प्रतिशत बढ़ाने को लेकर कवायद में जुटे है । इसके लिए पिछले कुछ सालों में पार्टी से दूर हुए ओबीसी, मुस्लिम और दलित वोट बैंक को साथ लाने के प्रयास किए जा रहे है । पार्टी नेतृत्व ने संगठन के ओबीसी और दलित नेताओं को वोट प्रतिशत बढ़ाने और कांग्रेस के पक्ष में मतदान करवाने की जिम्मेदारी सौंपी है।

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे स्वयं इस काम को देख रहे है। पिछले तीन दशक के आंकड़ों के अनुसार कांग्रेस के वोट प्रतिशत में 13 फीसदी से अधिक की कमी आई है। वैसे तो प्रदेश में कांग्रेस की खराब स्थिति के कई सारे कारण है, लेकिन घटता वोट प्रतिशत सबसे बड़ी चिंता की बात है । कांग्रेसी नेता भी अब अलग-अलग मंच से घटते वोट प्रतिशत पर चिंता जाहिर कर चुके है । कांग्रेस नेताओं का मानना है कि वोट प्रतिशत बढ़े बिना सत्ता तक पहुंचना मुश्किल होगा। अब अलग-अलग जातियों और वर्ग के सम्मेलन के जरिए कांग्रेस भाजपा के वोट बैंक में सेंधमारी की कोशिश कर रही है । 

1951 से 1985 तक कांग्रेस रहा एकछत्र राज   

आजादी के बाद हुए पहले चुनाव 1951 में प्रदेश में कांग्रेस का वोट प्रतिशत था 39. 46 प्रतिशत था । इसके बाद कांग्रेस लगातार इस वोट प्रतिशत में साल-दर-साल इजाफा करती गयी । 1980 में राजस्थान में भाजपा ने पहली बार कांग्रेस गढ़ माने जानी वाली सीटों पर जीत हासिल की थी । लेकिन फिर भी कांग्रेस का वोट प्रतिशत 42. 96 प्रतिशत बरकरार रहा था । कांग्रेस ने इस चुनाव में133 सीटें हासिल की थी । 1985 के चुनाव में भी कांग्रेस के वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी हुई थी. राजस्थान में इस चुनाव में कांग्रेस ने सबसे अधिक प्रतिशत 46.57 के साथ 113 सीट जीतने में कामयाब रही थी, भाजपा ने इस चुनाव में 21 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 39 सीटें जीती थी । इस चुनाव के बाद से लगातार राजस्थान में कांग्रेस के वोट प्रतिशत में गिरावट आती चली गई । 

1990 के चुनाव से कांग्रेस के बुरे दिन हुए थे शुरू 

1990 के चुनाव में कांग्रेस को मात्र 50 सीटें मिली थी, जबकि वोट प्रतिशत रह गया था 33. 64 । वहीं भाजपा ने चुनाव में 22. 25 वोट प्रतिशत के बावजूद 85 सीटें हासिल की थी । 1993 के चुनाव में कांग्रेस ने वोट प्रतिशत में कुछ बढ़ोतरी की थी, कांग्रेस ने 38.27 के वोट प्रतिशत के साथ 76 सीटें हासिल की थी जबकि बीजेपी ने 95 सीटें प्राप्त की थी और इसके लिए उसके पास था 38.6 वोट प्रतिशत । इसके बाद 1998 के चुनाव में कांग्रेस ने 153 सीटें जीती थी और वोट प्रतिशत 44.95 था,जबकि भाजपा ने 33.23 वोट प्रतिशत के साथ 33 सीटें जीती थी । लेकिन इस के बाद के चुनाव में कांग्रेस की स्थिति फिर से खराब होती चली गई । 2008 के चुनाव में कांग्रेस के पास 96 सीटें थी लेकिन वोट प्रतिशत घटकर 36. 82 ही रह गया था । भाजपा ने 78 सीटें जीती थी और उसका वोट प्रतिशत 34. 27 वोट शेयर हासिल किया था । 

2013 में रही सबसे खराब परफॉर्मेंस 

2013 के चुनाव में भी कांग्रेस की स्थिति खराब रही । इस चुनाव में कांग्रेस ने अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन किया था । कांग्रेस महज 21 सीटों पर सिमट गई थी और वोट प्रतिशत में भी गिरावट दर्ज की गई । कांग्रेस के पास 33. 67 वोट प्रतिशत था. जबकि भाजपा ने 163 सीटें हासिल की और वोट प्रतिशत रहा अब तक का सबसे ज्यादा 45.17 प्रतिशत । 

Posted By: Babita

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