जयपुर, जागरण संवाददाता। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अशोक गहलोत का कहना है कि उन्होंने पद पर रहते हुए कभी बेटे वैभव के चुनाव मैदान में उतरने का समर्थन नहीं किया। अब यदि वैभव चाहे तो चुनाव लड़ सकता है, लेकिन इसका फैसला पार्टी करेगी कि उन्हें प्रत्याशी बनाया जाए या नहीं।इसमें मेरी कोई भूमिका नहीं होगी।

जोधपुर में मंगलवार को मीडियाकर्मियों के साथ बातचीत में गहलोत ने कहा कि सबसे पहले मेरे मुख्यमंत्री रहते वैभव ने युवक कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष का चुनाव लड़ना चाहा, लेकिन मैंने मना कर दिया। यदि वह जीत जाता तो कहा जाता कि मेरे प्रभाव से वह चुनाव जीत गया। इसके बाद वर्ष 2009 में वैभव को सवाई माधोपुर से लोकसभा चुनाव लड़ने का प्रस्ताव आया, लेकिन मैंने एक बार फिर से मना कर दिया। उस समय प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी सहित कई अन्य नेताओं ने दबाव डाला, लेकिन हमारा फोकस अधिक से अधिक सीट जीतने पर था। इसका लाभ भी हमें मिला और पार्टी ने 25 में से 20 सीट पर जीत हासिल की।

गहलोत ने बताया कि वैभव अब स्वतंत्र है और यदि वह चाहेगा तो चुनाव लड़ेगा। अब मेरी तरफ से किसी प्रकार की बंदिश या रोक नहीं रहेगी। एक सवाल के जवाब में गहलोत ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में पत्नी को कभी किसी प्रकार का गिफ्ट नहीं दिया। आपस में बेहतरीन सामंजस्य होने के कारण कभी इस बारे में सोचा भी नहीं। अलबत्ता जयपुर में हाउसिंग बोर्ड का एक मकान अवश्य पत्नी सुनीता के नाम किया है, लेकिन अभी उसका ढांचा ही बना हुआ है। मेरी ख्वाहिश है कि उसे समय पर पूरा करवा कर सुनीता को दे सकूं, ताकि कभी भविष्य में मैं दुनिया में नहीं रहूं तो उसे रहने के स्थान का संकट नहीं हो। 

Posted By: Sachin Mishra

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस