जालंधर [हृदय नारायण मिश्र]। लोकसभा चुनाव में पंजाब में कई दिग्गज मात खा चुके हैैं और उनकी यह हार काफी चर्चा में रही है। इनमें अरुण जेटली, अंबिका सोनी, मायावती, विनोद खन्ना, सुखदेव सिंह ढींडसा जैसे नाम भी शामिल हैैं। पटियाला सीट पर कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनकी पत्नी परनीत कौर को भी एक-एक बार हार मिल चुकी है। अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल, Congress के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़, पूर्व सीएम दरबारा सिंह जैसे दिग्गज भी अपनी हार नहीं टाल सके हैैं।

पंजाब में लोकसभा चुनाव के रोमांचक मुकाबलों की जब भी चर्चा होगी तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दिग्गज नेता अरुण जेटली की अमृतसर में हार जरूर शामिल होगी। यह ऐसी हार थी जो तमाम दिग्गजों की जीत से ज्यादा सुर्खियों में थी। 2014 के आम चुनाव में जबरदस्त मोदी लहर के बीच जेटली Congress के कैप्टन अमरिंदर सिंह से एक लाख से ज्यादा वोटों से हार गए थे। उन्हें पंजाब की अकाली-भाजपा सरकार की Anti Incumbency का खामियाजा भुगतना पड़ा था। जेटली ही नहीं प्रदेश में कई दिग्गजों की हार हो चुकी है जो किसी भी जीत से ज्यादा चर्चा में रही है।

पिछले चुनाव की ही बात करें तो पटियाला लोकसभा सीट से हैट्रिक लगा चुकीं पूर्व विदेश राज्य मंत्री Congress की परनीत कौर को आम आदमी पार्टी के डॉ. धर्मवीर गांधी के हाथों करीब 21 हजार मतों से हार झेलनी पड़ी थी। गांधी का यह पहला चुनाव था। इस बार दोनों फिर मैदान में हैैं। यह अलग बात है कि गांधी आप से अलग हो चुके हैैं। परनीत ही नहीं पटियाला सीट से मौजूदा मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह भी लोकसभा चुनाव हार चुके हैैं। उन्हें 1977 के चुनाव में अकाली दल के गुरचरण सिंह टोहरा ने करीब 90 हजार मतों से शिकस्त दी थी।

Congress की सीनियर लीडर और केंद्र की डॉ. मनमोहन सिंह सरकार में मंत्री रहीं अंबिका सोनी को भी हार का सामना करना पड़ा। पिछले लोकसभा चुनाव में वे Congress की टिकट पर श्री आनंदपुर साहिब सीट से मैदान में थीं, लेकिन शिअद-भाजपा गठबंधन के उम्मीदवार प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने उन्हें मात दे दी।

प्रदेश में कुछ सीटों पर Celebrity व अभिनेताओं का भी सिक्का चला है और दिग्गजों को हार का सामना करना पड़ा है। गुरदासपुर लोकसभा सीट पर अधिकतर समय कब्जा Congress पार्टी का ही रहा है। Congress की सुखबंस कौर भिंडर लगातार पांच बार चुनाव जीती थीं। Congress को हर बार लगता था कि यह सीट तो वह आसानी से जीत ही लेगी, लेकिन विनोद खन्ना ने इसे गलत साबित कर दिया।

भाजपा के टिकट पर 1998 में मैदान में उतरे विनोद खन्ना ने सुखबंस कौर भिंडर को करारी शिकस्त दी और Congress का किला ध्वस्त कर दिया। खन्ना का स्टारडम ऐसा भारी पड़ा कि वे यहां से लगातार तीन बार जीते और हैट्रिक लगाई, लेकिन सियासत कुछ भी हो सकता है। 2009 के चुनाव में Congress के प्रताप सिंह बाजवा ने विनोद खन्ना को भी हरा दिया।

इसी तरह Congress के दिग्गज नेता रघुनंदन लाल भाटिया के साथ हुआ। भाटिया अमृतसर लोकसभा सीट से छह बार सांसद रहे। ऐसा कहा जाने लगा था कि इस सीट से भाटिया को हरा पाना बहुत मुश्किल है, लेकिन यहां भी दिग्गज नेता को Celebrity चेहरे से मात खानी पड़ी। भाजपा ने 2004 में यहां नवजोत सिंह सिद्धू को टिकट दिया और उन्होंने भाटिया को एक लाख से ज्यादा मतों से हरा दिया। भाटिया पर सिद्धू की स्टार छवि भारी पड़ी। सिद्धू यहां से तीन बार जीते।

अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल भी हार का कड़वा स्वाद चख चुके हैैं। फरीदकोट लोकसभा सीट से तीन बार संसद पहुंच चुके सुखबीर बादल को पहली बार यहां से 1999 में पराजय का सामना करना पड़ा था। उन्हें Congress प्रत्याशी जगमीत सिंह बराड़ ने पराजित किया था। ऐसा नहीं है कि बराड़ लोकसभा चुनाव में मात नहीं खाए हैैं। संसद में तब पंजाब की आवाज के नाम से पहचान बनाने वाले बराड़ को वर्ष 2009 में फिरोजपुर लोकसभा क्षेत्र से शिअद प्रत्याशी शेर सिंह घुबाया ने 21 हजार वोटों से हरा दिया था। बराड़ 2004 में शिअद के जोरा सिंह मान और 1989 में आजाद प्रत्याशी ध्यान सिंह मंड से भी मात खा चुके हैैं।

दरबारा सिंह ने भुगता था इमरजेंसी का खामियाजा

दिग्गजों के हारने की सूची में कई और नाम हैैं। सन् 1971 के लोकसभा चुनाव में होशियारपुर से Congress की टिकट पर दरबारा सिंह जीते थे। उसके बाद सन 1977 के लोकसभा चुनाव में Congress ने फिर से उनको मैदान में उतारा था, लेकिन उन्हें चौधरी बलवीर सिंह से एक लाख से ज्यादा वोटों से पराजय का सामना करना पड़ा था। उनको Congress की ओर से लगाई गई इमरजेंसी का खामियाजा भुगतना पड़ा, क्योंकि इसको लेकर लोगों में बहुत गुस्सा था। दरबारा सिंह जून 1980 से लेकर अक्टूबर 1983 तक पंजाब के मुख्यमंत्री रहे थे।

मायावती भी हार चुकी हैं होशियारपुर में

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती भी होशियारपुर सीट से लोकसभा चुनाव हार चुकी हैैं। उन्होंने 1992 में इस सीट पर BSP से चुनाव लड़ा था, लेकिन Congress के कमल चौधरी से 25 हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। BSP के संस्थापक कांशीराम के बाद मायावती तब सबसे पावरफुल थीं लेकिन अपनी हार नहीं टाल सकी थीं।

सुनील जाखड़ दो बार हारे

Congress के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष और गुरदासपुर से सांसद सुनील जाखड़ भी हार का सामना कर चुके हैैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में फिरोजपुर से वे मैदान में उतरे थे लेकिन शिअद-भाजपा प्रत्याशी शेर सिंह घुबाया ने उनको करीब 31 हजार वोटों से हरा दिया। जाखड़ को पार्टी की आपसी गुटबाजी का खामियाजा भुगतना पड़ा था। इससे पहले 1996 के चुनाव में भी जाखड़ को मात खानी पड़ी। BSP के मोहन सिंह ने उन्हें करीब 60 हजार मतों से शिकस्त दी थी।

दिग्गज अकाली नेता ढींडसा को भी मिली मात

केंद्र की वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे मालवा के दिग्गज अकाली नेता सुखदेव सिंह ढींडसा को भी हार का सामना करना पड़ा। 2014 के लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के भगवंत मान ने दो लाख से ज्यादा मतों से उन्हें हरा दिया। इस चुनाव में मान की पंजाब में सबसे बड़ी जीत थी। ढींडसा को Anti Incumbency के कारण ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। इससे पहले 2009 के चुनाव में Congress के विजयइंदर सिंगला से उन्हें मात खानी पड़ी थी। ढींडसा दोनों बार जब हारे तब पंजाब में उनकी ही पार्टी की सरकार की थी।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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