नई दिल्ली, जेएनएन। पूर्वोत्तर का मिजोरम छोटा राज्य बेहद खास होने जा रहा है। यहां पर विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग की की तारीखों का एलान चुनाव आयोग ने कर दिया है। चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि मिजोरम में वोटिंग 28 नवंबर को होगी।

बीजेपी पूर्वोत्तर में अपने पांव पसारने में जुटी हुई है ऐसे हालत में 2008 से राज्य की सत्ता पर काबिज कांग्रेस के लिए मिजोरम का किला बचाना आसान नहीं दिख रहा है। सत्तारूढ़ कांग्रेसी नेता और सामाजिक कल्याण मंत्री पीसी ललथनलिआना ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस समिति विधानसभा चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है।

मिजोरम की राजनैतिक लड़ाई दो धुरियों पर ही घूमती रही है, कांग्रेस और मिजो नेशनल फ्रंट। इस विधानसभा के पहले चुनावों में कांग्रेस को जीत मिली थी और लालथन्हावला को मुख्यमंत्री चुना गया था।

मिजोरम में 6 बार विधानसभा चुनाव हुए जिसमें से चार बार कांग्रेस और दो बार मिजो नेशनल फ्रंट को जीत हासिल हुई है। संयोग की बात यह है कि पहली बार मुख्यमंत्री बने थान्हवला ही आज भी मुख्यमंत्री हैं।

2013 के चुनावों मिजोरम देश का एकमात्र ऐसा राज्य रहा, जहां महिला मतदाताओं की संख्या पुरुष मतदाताओं से 9,806 अधिक थी। राज्य में कुल मतदाता 690,860 है। ललथनहवला चार बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं। वे अभी लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए चुनाव लड़ रहे हैं।

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 2013 के चुनावों में मिजोरम विधानसभा की 40 सीटों में से कुल 39 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित थीं, और बाकी बची एक सीट अनारक्षित थी। मिजोरम की कुल जनसंख्या में से लगभग 95 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति से ताल्लुक रखती है।

Posted By: Digpal Singh

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