नई दिल्ली (संजीव गुप्ता)। रद नामांकन वाले प्रत्याशी भले ही यह उम्मीद लगाए बैठे हों कि शायद कुछ राहत मिल जाए, लेकिन ऐसी कोई भी संभावना नहीं है। राज्य चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि जो नामांकन रद हुए हैं, नियमों के तहत ही हुए हैं। अब उनमें न तो सुधार संभव है और न ही उन्हें मान्यता दिया जाना।

जागरण से बातचीत में राज्य चुनाव आयुक्त एसके श्रीवास्तव ने बताया कि तीनों नगर निगमों के 272 वार्डो के लिए कुल 4605 नामांकन आए जिनमें से 1719 यानी लगभग 38 फीसद नामांकन रद हुए। इनमें कुछ नामांकन भाजपा प्रत्याशियों के हैं, कुछ स्वराज इंडिया के और ज्यादातर निर्दलीयों के, लेकिन रद सभी वैध कारणों से हुए हैं।

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उन्होंने बताया कि यह पहले ही स्पष्ट कर दिया गया था कि नामांकन पत्र में एक भी कॉलम खाली छोड़ा गया तो नामांकन रद कर दिया जाएगा। अगर कोई अपने नामांकन में हस्ताक्षर ही नहीं कर रहा है, पार्टी का नाम नहीं भर रहा है, एफिडेविट नहीं दे रहा है तो क्या किया जा सकता है ।

इसी तरह निर्दलीय प्रत्याशी के नामांकन पर 10 प्रस्तावकों के हस्ताक्षर चाहिए। अगर कोई 9 ही दे रहा है तो उसको मान्य करार कैसे दिया जा सकता है।

एसके श्रीवास्तव ने बताया कि नामांकन को रद करने का अधिकार भी सिर्फ आरओ यानी रिटर्निग अधिकारी को है और यथोचित स्थिति में उसमें सुधार करवाने का भी। लेकिन जायज सुधार के लिए भी आरओ को बाकायदा नोटिस निकालना पड़ता है।

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उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रद किए गए नामांकन पत्रों को लेकर आयुक्त होने के बावजूद वे कोई निर्णय नहीं दे सकते। बृहस्पतिवार को उन्होंने ऐसे नामांकन पत्रों को लेकर पुनर्विचार का आश्वासन भी यथास्थिति संभालने के लिए दिया था।

किसी आरओ को ऐसा निर्देश देकर वह उस पर प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष दबाव नहीं बना सकते। अत: अब कुछ नहीं हो पाएगा। शनिवार शाम नाम वापसी का समय खत्म होने के बाद मैदान में बचे कुछ उम्मीदवारों की संख्या और उनके नामों की सूची जारी कर दी जाएगी।

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Posted By: JP Yadav

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