नई दिल्ली, जेएनएन। कांग्रेस के पास पूर्वोत्तर का एकमात्र राज्य है। बाकी राज्यों से उसका सफाया हो चुका है। इस कारण से कांग्रेस के लिए मिजोरम का चुनाव नाक का सवाल बन गया है। बीजेपी के कांग्रेस मुक्त पूर्वोत्तर की रणनीति से यह छोटा सा राज्य काफी महत्वपूर्ण होने जा रहा है। बीजेपी ने यहां की छोटी पार्टियों से गठबंधन करके कांग्रेस की संभावनाओं पर पलीता लगाने की पूरी तैयारी की है। 

सत्ता विरोधी लहर
कांग्रेस सत्ता में काफी समय से काबिज है और उसके लिए सबसे बड़ी चुनौती सत्ता विरोधी लहर से लड़ना है। कई मंत्री भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे हैं। खदानों के डिप्टी कंट्रोलर ने मिजोरम के मुख्यमंत्री पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं।

उन्होंने आरोप लगाए हैं कि मुख्यमंत्री कोलकाता में बहुमंजिला इमारत का निर्माण करा रहे हैं। हाल ही में राज्य के किसान राजधानी आइजवाल की सड़कों पर उतरकर भूमि सुधार और बाजार को नियंत्रित करने की मांग कर चुके हैं। राज्य में करीब 11 लाख किसान है और ये राज्य की करीब 70 फीसदी आबादी है।
एनपीपी ने मिजोरम में चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी कर ली है। एनपीपी मेघालय और मणिपुर में बीजेपी की नेतृत्व वाली सरकार में शामिल है। मेघालय के मुख्यमंत्री और एनपीपी के अध्यक्ष कोनराड के संगमा ने हाल ही में मिजोरम यूनिट का गठन किया है।

मिजोरम के रण को लड़ने के लिए कांग्रेस ने कई फेरबदल किए हैं। लुजिंहो फेलेरियो को ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के पूर्वोत्तर यूनिट का महासचिव बनाया गया है और भूपेन कुमार बोरा को मिजोरम का सचिव बनाया गया है।

दोनों ही नेता 2013 के विधान सभा चुनाव और 2014 के लोकसभा चुनाव में पर्यवेक्षक की भूमिका निभा चुके हैं। 2013 के चुनावों में कांग्रेस को शानदार जीत हासिल हुई थी। मिजोरम 1987 में देश का 23वां राज्य बना। यहां पर बीस सालों तक कांग्रेस सत्तासीन रही है। बीजेपी यहां पर 1193 से चुनाव लड़ रही है लेकिन अभी तक उसका खाता नहीं खुला है।

Posted By: Prateek Kumar

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