मुंबई, एएनआइ। शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि महाराष्ट्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सदस्यों के बीच 288 सीटों का बंटवारा भारत-पाकिस्तान विभाजन से भी ज्यादा बड़ी कसरत है। राउत ने कहा, 'महाराष्ट्र एक बड़ा राज्य है। 288 सीटों की साझेदारी भारत-पाक विभाजन से ज्यादा बड़ी कसरत है। सरकार में होने की जगह हम विपक्ष में होते तो आज की तस्वीर कुछ अलग होती।'

शिवसेना नेता ने कहा कि शिवसेना और भाजपा सीटों की साझेदारी फार्मूले को लेकर तनावमुक्त हैं और इस बारे में गठबंधन शीघ्र ही मीडिया को सूचित करेगा। उन्होंने कहा, 'भाजपा-शिवसेना गठबंधन को लेकर हमारी पार्टियों से कहीं ज्यादा मीडिया चिंतित है। हम तनावमुक्त हैं। चुनाव के लिए सीटों की साझीदारी पर दोनों पार्टियों के नेताओं के बीच सकारात्मक चर्चा चल रही है। जो भी फैसला होगा हम जल्दी ही मीडिया को सूचित करेंगे।'

राउत ने कहा, 'भाजपा को फिफ्टी-फिफ्टी फार्मूले का सम्मान करना होगा। यह फैसला अमित शाह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस की मौजूदगी में लिया गया था। हम गठबंधन तोड़ने की बात नहीं कर रहे हैं लेकिन दिवाकर राओटे ने जो कहा है वह गलत नहीं है।' शिवसेना नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री राओटे ने बुधवार को कहा था कि यदि भाजपा ने बराबर सीटें नहीं दीं तो दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन टूट सकता है।

उद्धव ठाकरे व देवेंद्र फड़नवीस करेंगे घोषणा: भाजपा

भाजपा नेता चंद्रकांत पाटिल ने मंगलवार को कहा कि भाजपा और शिवसेना के बीच सीटों की साझीदारी की घोषणा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे करेंगे। दोनों भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के साथ चर्चा कर रहे हैं। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि भविष्य में सीटों की साझीदारी पर वह कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और शिवसेना के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर रस्साकशी जारी है, ऐसे में शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने स्पष्ट कर दिया था कि उनकी पार्टी बराबरी की स्थिति में ही भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी। राउत ने कहा था कि अगर शिवसेना को 144 सीटें नहीं मिली तो विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ गठबंधन तोड़ दिया जाएगा। संजय राउत का यह बयान शिवसेना नेता और राज्य सरकार में मंत्री दिवाकर राउत के बयान के समर्थन में आया था। महाराष्ट्र में विधानसभा सीट की कुल 288 सीटें हैं। मिली जानकारी के अनुसार कुल 288 सीटों में से भाजपा शिवसेना को केवल 120 सीटें देना चाहती है। जबकि शिवसेना 144 सीटों की मांग कर रही है।

ज्ञात हो कि 2014 में भी विधानसभा चुनाव के दौरान भी अंतिम समय में भाजपा-शिवसेना का गठबंधन टूट गया था। उसके बाद दोनों राजनीतिकपार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था लेकिन चुनाव के बाद दोनों ने मिलकर सरकार बनायी थी। राकांपा प्रमुख शरद पवार सीटों के बंटवारे की घोषणा भी कर चुके हैं। ऐसे में शिवसेना और भाजपा के भी गठबंधन के साथ ही चुनाव मैदान में उतरने की पूरी संभावना है।

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