ओमप्रकाश तिवारी, मुंबई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को मुंबई में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जब भी आतंक से पीड़ितों को न्याय देने की बात आती है, तो कांग्रेस और उसके साथी आतंकियों का बचाव करने लगते हैं।

दोषियों को पकड़ने के बजाय मिर्ची का व्‍यापार कर रहे

प्रधानमंत्री ने बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में भाजपा-शिवसेना महागठबंधन की सभा को संबोधित करते हुए 1993 के बम धमाकों की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि 1993 के बम धमाकों का घाव कभी भी मुंबई, महाराष्ट्र और हिंदुस्‍तान भूल नहीं सकते। धमाकों में मारे गए परिवारों के साथ उस समय की सरकारों ने कोई न्याय नहीं किया। जिन लोगों ने हमारे अपनों को मारा, वो भाग निकले। और उसकी वजह अब खुल करके सामने आने लगी है। ये लोग दोषियों को पकड़ने के बजाय उनके साथ मिर्ची का व्यापार कर रहे हैं। कभी मिर्ची का व्यापार , कभी मिर्ची से व्यापार ।

ये कहते हुए प्रधानमंत्री का इशारा राकांपा नेता प्रफुल पटेल की ओर था। हाल ही में जिनके व्यावसायिक संबंधों का खुलासा भगोड़े माफिया सरगना दाऊद इब्राहिम के साथी इकबाल मिर्ची के साथ हुआ है। प्रधानमंत्री ने ऐसे लोगों को पहचानकर उनके दलों से सावधान रहने का आह्वान लोगों से किया। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को महाराष्ट्र और देश के गौरव की कोई परवाह नहीं है।

आतंक को पालने वालों को मिलेगी पूरी सजा

प्रधानमंत्री ने कांग्रेस शासनकाल में मुंबई में अक्सर होनेवाली आतंकी घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि एक समय था, जब मुंबई आतंकियों का प्रवेशद्वार बन गई थी। यहां कभी भी आतंकी हमले हो जाते थे। तब विदेशों में बैठे आतंकी संगठन खुद आगे आकर हमलों की जिम्मेदारी लेते थे। लेकिन तब की सरकारें कहती थीं, कि नहीं-नहीं ये आपने नहीं, हमारे लोगों ने ही किया है। प्रधानमंत्री लोगों से पूछा – क्या अब भी वही हो रहा है ? फिर स्वयं ही जवाब दिया, कि अब आतंक को पालने वाले जानते हैं कि यदि अब कोई गलती की, तो उसकी पूरी सजा मिलेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट सिर्फ दो-तीन शब्द नहीं हैं। ये भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगियों की रीति-नीति और पहचान भी है।

कांग्रेस जैसे दल अपने स्वार्थ की राजनीति करते रहे

मोदी ने अनुच्छेद 370 के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि ये वही लोग थे, जो दशकों से जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 और धारा 35ए को पाले रहे। इसके कारण आतंकवाद और भ्रष्टाचार बढ़ता गया। अनेक लोगों को उनके अधिकारों से वंचित रखा गया। लेकिन कांग्रेस जैसे दल अपने स्वार्थ की राजनीति करते रहे। जब हमने 370 और 35ए हटाया जम्मू-कश्मीर-लद्दाख और पूरे देश के साथ एकजुटता से खड़े होने के बजाय हमारे विरोधियों की भाषा देखिए। कांग्रेस-राकांपा की ओर इशारा करते हुए प्रधानमंत्री ने पूछा कि ये किसकी मदद कर रहे हैं ? किसका भला कर रहे हैं ? उनका एक-एक शब्द किसकी वकालत कर रहा है ?

भयमुक्त करनेवाली व्यवस्था की ओर बढ़ रहे

एक दिन पहले ही मुंबई आकर आर्थिक मोर्चे पर केंद्र की मोदी सरकार एवं राज्य की फड़नवीस सरकार को घेरकर गए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भी प्रधानमंत्री ने जवाब दिया। नौकरियां देनेवालों को दी जा रही सुविधाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि गरीबी के खिलाफ लड़ाई में ‘जॉब क्रियेटर’ की भूमिका बहुत बड़ी होती है। हम लाइसेंस राज को कम कर रहे हैं। लोगों को भयमुक्त करनेवाली व्यवस्था की ओर बढ़ रहे हैं। ईमानदारी से टैक्स चुकानेवाला कभी परेशान न हो, सका ध्यान रख रहे हैं। एक वो थे, जिन्होंने एंजल टैक्स लगाया। एक हम हैं, जिसने एंजल टैक्स खत्म किया। एक वो थे, जिन्होंने भारी-भरकम कार्पोरेट टैक्स लगाया। एक हम है, जिसने कम किया।

वीर सावरकर का नाम लिए बगैर कांग्रेस पर व्यंग्य किया

एक वो थे, जो फोन बैंकिंग के जरिए करोड़ों रुपए उनको दिए, जिनमें से कुछ आज तिहाड़ में हैं, तो कुछ मुंबई की जेल में। एक हम है, जो मुद्रा लोन के जरिए गरीबों को मदद दे रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले की सरकारों का ध्यान जनता को नियंत्रित करने पर था, हमारा ध्यान जनभागीदारी पर है। प्रधानमंत्री ने वीर सावरकर का नाम लिए बगैर ही कांग्रेस पर व्यंग्य किया। उन्होंने कहा कि इन लोगों (कांग्रेस) ने यही अहसास दिलाया कि देश को गुलामी से एक ही परिवार ने आजादी दिलाई। ऐसे में कई योद्धाओं का कभी जिक्र ही नहीं आने दिया गया। बता दें कि महागठबंधन की इस चुनावी सभा में प्रधानमंत्री के साथ मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के अलावा शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे एवं रिपब्लिकन नेता रामदास आठवले भी मौजूद थे।

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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