मुंबई, एएनआइ। महाराष्ट्र में भारतीय जनता पाटी (भाजपा) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के बीच जारी घमासान के बीच शुक्रवार को एनसीपी ने सरकार बनाने का दावा किया है। एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा है कि भाजपा और शिवसेना को महाराष्ट्र में एक स्थिर सरकार बनाने के लिए लोगों का जनादेश मिला है। हम चाहते हैं कि वे सरकार बनाए और सदन के पटल पर बहुमत साबित करें। यदि वे बहुमत साबित करने में सक्षम नहीं हैं, तो हम निश्चित रूप से सरकार बनाने की कोशिश करेंगे।

शरद पवार से मिले संजय राउत और कांग्रेस नेता

महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना के बीच सरकार गठन को लेकर जारी गतिरोध के बीच अन्य विकल्पों को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इस क्रम में गुरुवार को शिवसेना नेता संजय राउत ने राकांपा सुप्रीमो शरद पवार से मुलाकात की। वहीं, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बाला साहब थोरात, वरिष्ठ नेता अशोक चव्हाण और पृथ्वीराज चव्हाण ने भी शरद पवार से उनके आवास पर मुलाकात की।

पवार से राउत की मुलाकात ने राज्य में गैर भाजपा सरकार की अटकलों को हवा दे दी है। हालांकि राउत ने चुनाव परिणाम की घोषषणा वाले दिन (24 अक्टूबर) भी पवार से मुलाकात की थी। वहीं, कांग्रेस नेताओं की पवार से मुलाकात के बारे में सूत्रों ने बताया कि उन्होंने वर्तमान राजनीति हालात के मद्देनजर अपने गठबंधन की रणनीति पर विचार-विमर्श किया। इसके बाद तीनों नेता पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात के लिए दिल्ली रवाना हो गए। बताते हैं कि पवार ने ही उनसे इस बारे में सोनिया से बात करने के लिए कहा है। कांग्रेस ने गुरुवार को अपने नवनिर्वाचित विधायकों के साथ भी बैठक की। इसमें महासचिव मल्लिकार्जुन ख़़डगे भी मौजूद थे।

इससे पहले कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चह्वाण ने एक बार फिर शिवसेना को उकसाते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव में भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है। इसके बावजूद यदि वह सरकार बनाने में अक्षम रहती है तो दूसरे बड़े दल के रूप में शिवसेना को मौका मिलना चाहिए। ऐसी स्थिति में यदि शिवसेना सरकार बनाने के लिए कांग्रेस से समर्थन मांगती है तो हम कांग्रेस आलाकमान से इस पर विचार करने को कहेंगे। पृथ्वीराज चह्वाण चुनाव ने परिणाम आने के दिन भी कहा था कि शिवसेना-कांग्रेस-राकांपा की संयुक्त सरकार बन सकती है।

हालांकि राकांपा के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल एक दिन पहले ही कह चुके हैं कि सरकार बनाने का जनादेश भाजपा-शिवसेना गठबंधन को मिला है। यदि उनमें कोई मतभेद है तो उन्हें आपस में सुलझाकर राज्य को स्थिर सरकार देने का प्रयास करना चाहिए। पटेल का साफ कहना था कि राकांपा किसी को समर्थन देने के बजाय विपक्ष में बैठेगी।

गौरतलब गै कि 2014 के चुनाव के बाद 288 सदस्यीय विधानसभा में जब 122 विधायकों वाली फडणवीस की अल्पमत सरकार ने शपथ ली थी तो राकांपा ने उसे बाहर से समर्थन दिया था, जबकि इस बार भाजपा ने 105, शिवसेना ने 56, राकांपा ने 54 और कांग्रेस ने 44 सीटों पर जीत हासिल की है।

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Posted By: Sachin Mishra

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