मुंबई, ओमप्रकाश तिवारी। अनुच्छेद 370 हटाए जाने के मुद्दे पर चौतरफा घिर चुकी कांग्रेस का यू टर्न आज भौचक करने वाला रहा। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 370 संबंधी एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस ने 370 के हक में वोट दिया, इसके खिलाफ वोट नहीं दिया। मनमोहन सिंह आज मुंबई एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

महाराष्ट्र के चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को 370 के मुद्दे पर लगातार घेरते आ रहे हैं। आज कांग्रेस की ओर से आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में जब इसी मुद्दे पर मनमोहन सिंह से एक सवाल पूछा गया तो उन्होंने साफ कहा कि जब अनुच्छेद 370 का विधेयक संसद के सामने आया और उस पर बातचीत हुई तो कांग्रेस पार्टी ने इसके हक में वोट दिया, इसके खिलाफ वोट नहीं दिया। कांग्रेस पार्टी का विचार है कि अनुच्छेद 370 एक अस्थायी व्यवस्था है। लेकिन यदि इसमें कोई परिवर्तन करना है तो जम्मू-कश्मीर के लोगों को भरोसे में लेकर किया जाना चाहिए। इसे खत्म करने का जो तरीका अपनाया गया, उस दबंगई का हम विरोध करते हैं, न कि 370 हटाए जाने का। 

बता दें कि अगस्त के पहले सप्ताह में संसद के दोनों सदनों में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने संबंधी विधेयक लाए जाने पर कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी जैसे कई राजनीतिक दलों ने न सिर्फ बहस के दौरान खुलकर इसका विरोध किया था, बल्कि मतदान के समय भी उनका मत इस विधेयक के विरोध में ही गया था। इसके बावजूद आज दो बार प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह का अनुच्छेद 370 के हक में वोट करने की बात कहना आश्चर्यजनक माना जा रहा है। मनमोहन सिंह ने एक सवाल का जवाब देते हुए यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी से ज्यादा देशभक्त और कोई दल नहीं है। आजादी के लड़ाई में कांग्रेस के योगदान को सब जानते हैं। कांग्रेस को अपनी देशभक्ति साबित करने के लिए किसी के प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है। 

मनमोहन सिंह से ज्यादातर सवाल आर्थिक विषयों पर पूछे गए। जिनका जवाब देते हुए अर्थशास्त्री नेता ने भाजपानीत सरकार को घेरने की भरपूर कोशिश की। हाल में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमन द्वारा आज की खराब आर्थिक स्थिति के लिए यूपीए सरकार को जिम्मेदार बताए जाने पर मनमोहन ने कहा कि संप्रग सरकार में जो कुछ भी किया गया, उसे आप सब जानते हैं। यदि संप्रग कार्यकाल में इतना ही खराब काम हुआ है, तो उसको दुरुस्त करने के लिए मोदी सरकार ने पांच साल में क्या किया, उसका हिसाब क्यों नहीं देते। इसके बजाय यह कहते रहने से कि संप्रग ने यह किया, वह किया, इसके जनता की समस्याएं तो हल नहीं होंगी। मनमोहन ने कहा कि बेरोजगारी दूर करने के लिए अर्थव्यवस्था में 8 से 10 फीसद की दर से बढ़त की जरूरत है। जिसके कोई संकेत फिलहाल नहीं मिल रहे हैं। सरकार में जनहितकारी नीतियां अपनाने की इच्छाशक्ति नहीं दिखाई देती। 

मनमोहन सिंह के संवाददाता सम्मेलन में हाल ही में संकट में आए पीएमसी बैंक के कई भुक्तभोगी भी मौजूद थे। उनके द्वारा इस समस्या के हल के बारे में पूछे जाने पर स्वयं एक समय आरबीआई गवर्नर रहे मनमोहन सिंह ने कहा कि जिस मामले में 16 लाख निवेशक न्याय की उम्मीद कर रहे हों, उसमें भारत सरकार, रिजर्व बैंक और महाराष्ट्र सरकार को एक साथ बैठकर कोई रास्ता निकालना चाहिए। मनमोहन ने कहा कि एक समय महाराष्ट्र एक समय निवेश आकर्षित करने के मामले में पहले स्थान पर हुआ करता था। आज यह राज्य किसानों की आत्महत्या के मामले में पहले स्थान पर पहुंच गया है। 

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Posted By: Babita kashyap

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