भोपाल (नईदुनिया स्टेट ब्यूरो)। सवर्ण समाज पार्टी का इस विधानसभा चुनाव में कोई अधिकृत प्रत्याशी नहीं होगा। इन्हें निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव चिन्ह मिलेंगे। चुनाव आयोग ने पार्टी पदाधिकारियों के विवाद के चलते 'ए" और 'बी" फार्म को मान्य करने से इंकार कर दिया है। दरअसल, पूर्व विधायक लक्ष्मण तिवारी और अर्चना श्रीवास्तव खुद को पार्टी अध्यक्ष बता रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक पार्टी पर वर्चस्व को लेकर लक्ष्मण तिवारी और अर्चना श्रीवास्तव के बीच विवाद चल रहा है। तिवारी ने सवर्ण समाज पार्टी का गठन किया था लेकिन वे 2008 में उमा भारती की पार्टी लोक जनशक्ति में शामिल हो गए और विधायक भी बने। कुछ समय बाद इन्होंने भाजपा की सदस्यता ले ली। इस बार पार्टी ने उन्हें प्रत्याशी नहीं बनाया तो उन्होंने सवर्ण समाज पार्टी के पदाधिकारियों की बैठक बुलाई और अध्यक्ष बन गए।

इसके खिलाफ अर्चना श्रीवास्तव ने शिकायत भी दी। पार्टी पर वर्चस्व के विवाद के बीच दोनों नेताओं ने प्रत्याशियों की घोषणा भी कर दी है। इसको लेकर दोनों नेता चुनाव आयोग पहुंचे और खुद को पार्टी का असली अध्यक्ष बताया। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अधिकारियों ने बताया कि पार्टी पदाधिकारियों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने के चलते चुनाव आयोग ने 'ए" और 'बी" फार्म को मान्य नहीं करने का फैसला किया है। इसके मायने यह हुए कि पार्टी की ओर से जिन अभ्यर्थियों ने फार्म दाखिल किए हैं, वे निर्दलीय माने जाएंगे और रिटर्निंग ऑफिसर उन्हें मुक्त चिन्हों में से कोई एक आवंटित कर देंगे।

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