इंदौर। मध्य प्रदेश को स्वर्णिम बनाने को लेकर दोनों बड़े दलों ने अपने घोषणा पत्रों में कई वादे किए, लेकिन एक नजर में प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर डालें तो सोचने पर मजबूर करता है कि कैसे ये वादें पूरे हो सकेंगे। नई सरकार के सामने कई चुनौतियां हैं। घोषणा पत्रों के वादों से आमजन में तो उम्मीद है, लेकिन ये कब और कैसे पूरी होंगी इस पर फिलहाल सवालिया निशान है।

नई सरकार के लिए ये चुनौतियां

- प्रदेश का राजकोषीय घाटा 25688.97 करोड़ रुपए है। नई सरकार के लिए योजनाएं लागू करना आसान नहीं होगा।

- प्रदेश पर मार्च 2018 में 1.60 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है। बाजार से ही 88 हजार करोड़ का कर्ज ले चुकी है सरकार। इसे चुकाना प्रमुख चुनौती होगा।

- कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में सरकार बनते ही दो दिन में 2लाख रुपए तक किसानों का कर्ज माफ करने का वादा किया है। इसे पूरा करने के लिए 16 हजार करोड़ रु. की व्यवस्था करना मुश्किल होगा।

- कर्मचारियों को प्रमोशन में आरक्षण का मुद्दा भी बड़ा है जिससे नई सरकार को जूझना होगा। आरक्षण का मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में है, लेकिन नई सरकार को इस पर निर्णय लेना होगा।

- एससी-एसटी एक्ट में संशोधन से सामान्य वर्ग में रोष है। इससे नई सरकार को ही दूर करना होगा।  

Posted By: Prashant Pandey

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