इंदौर, उज्जवल शुक्ला/दिनेश शर्मा। विधानसभा चुनाव 2018 के लिए जनता ने अपना फैसला सुना दिया। इस बार करीब 75 प्रतिशत मतदान हुआ। किसके हाथ सत्ता लगेगी, वो तो 11 दिसंबर को पता चलेगा। लेकिन पिछले 33 सालों में हुए 7 चुनावों की वोटिंग की बात करें तो रोचक बात सामने आती है। जब-जब मतदान लगभग 5 प्रतिशत बढ़ता है तो सत्ता परिवर्तन हो जाता है।

1985 की तुलना में 1990 में लगभग साढ़े चार फीसदी ज्यादा लोगों ने वोटिंग की तब प्रदेश में भाजपा ने कांग्रेस से सत्ता छीनी थी। इसके तीन साल बाद हुए चुनाव में करीब साढ़े 6 प्रतिशत ज्यादा मतदान हुआ तो फिर परिवर्तन हुआ, अब कांग्रेस के हाथ में सत्ता थी। बात करें 2003 की तो इस बार 1998 के मुकाबले 7 प्रतिशत ज्यादा वोट गिरे। इस बार प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी। उमा भारती ने दिग्विजय सरकार का तख्ता पलट किया था। 2003 के बाद हुए दो चुनावों में क्रमश: 2.03 प्रतिशत और 3.38 प्रतिशत ज्यादा वोटिंग हुई। प्रदेश में भाजपा सत्ता में बरकरार रही।

इंदौर में रिकॉर्ड वोटिंग : देपालपुर में सबसे ज्यादा, 5 नंबर में 2013 के चुनाव से 14% ज्यादा मतदान

देश में सबसे स्वच्छ शहर इंदौर मताधिकार को लेकर भी जागरूक और सतर्क नजर आया। बुधवार को इंदौर में रिकॉर्ड तोड़ मतदान हुआ। सबसे ज्यादा मतदान देपालपुर में 84% हुआ तो, विधानसभा क्षेत्र क्रमांक पांच में वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव की तुलना में 14 % ज्यादा मतदान हुआ। सबसे कम मतदान इंदौर क्षेत्र क्रमांक एक में 67% हुआ है।  

Posted By: Prashant Pandey

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