धार, प्रेमविजय पाटिल। मध्य प्रदेश के धार जिले में भौगोलिक रूप से काफी विषमताएं हैं। इस वजह से मतदान का प्रतिशत कमजोर रहता है। कुक्षी विधानसभा क्षेत्र के दो मतदान केंद्र ग्राम कष्ठा और करोंदिया के मतदाता नर्मदा नदी की चुनौती को भी पार करने को तैयार है। इन मतदाताओं को नाव से लाने के लिए व्यवस्था की जा रही है। इस तरह की चुनौतीभरे क्षेत्र में मतदाता उत्साहित हैं

आपको तो सिर्फ मतदान केंद्र से कुछ मीटर की दूरी ही तय करना है। लोकतंत्र के लिए अब आपकी बारी है। 15 लाख लोगों का महापर्व 28 नवंबर को है, जो सात क्षेत्रों की तस्वीर बनाने और तकदीर संवारने का काम करेगी। निश्चित रूप से इस बार निर्वाचन आयोग ने आयोग के निर्देश पर जिला प्रशासन ने डेढ़ किमी से अधिक की दूरी पर मतदान केंद्र नहीं बनाए हैं। 1921 मतदान केंद्र में से कुछ ही केंद्र ऐसे हैं, जहां पर दो से तीन किमी पैदल चलने की स्थिति निर्मित होगी। लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत मतदाताओं के पास है। अब समय सिर्फ 24 घंटे शेष है। ऐसे में कुक्षी विधानसभा क्षेत्र के दो मतदान केंद्र कष्ठा और करोंदिया अपने हक के लिए उत्साहित हैं।

भले ही इनकी संख्या कम है लेकिन ये हर हाल में नर्मदा नदी में भरे पड़े बैक वॉटर और उसकी चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हैं। जब इन मतदाताओं ने इच्छाशक्ति दिखाई तो प्रशासन भी तैयारी में आया। वहीं इन मतदाताओं की परेशानी को नईदुनिया ने भी प्रमुखता से उठाया था। इसी का परिणाम है कि इन लोगों को अब बैक वॉटर की परेशानी से नहीं जूझना पड़ेगा। बल्कि उनको नाव के माध्यम से कुछ सहारा मिल जाएगा। जिससे कि वे आसानी से मतदान केंद्र पहुंच जाएंगे।

सोमवार की देर शाम कु क्षी एसडीएम अंशुल गुप्ता ने बताया कि डही ब्लॉक के मतदान केंद्र क्रमांक 187 कष्ठा के पटेलपुरा के मतदान केंद्र तक नदीपुरा फलिया से आने वाले मतदाताओं से आने वाले व निसरपुर ब्लॉक के मतदान केंद्र क्रमांक 263 ग्राम करोंदिया जो कि डूब क्षेत्र में है, वहां तक पहुंचाने के लिए नाव की व्यवस्था की गई है। मतदान के लिए बीच में ग्राम करोंदिया के नाले को पार करने के लिए यह व्यवस्था की गई है। नदीपुरा में 150 से अधिक मतदाता है। धार जिले के अंतिम छोर डही ब्लॉक में यह नदीपुरा फलिया है, जो ग्राम कष्ठा से निकट है।

पैदल भी चलकर आते थे

कभी इस क्षेत्र के मतदाता कभी 6 से 7 कि मी की दूरी पैदल तय करने को मजबूर रहते थे। अब इन मतदाताओं में इस बात का जज्बा था कि वे पैदल चलकर आएंगे। लेकिन नाव की व्यवस्था हो जाने से इन लोगों को महज कुछ किमी की दूरी पर ही चलना पड़ेगा। हालांकि इसके बाद भी एक पहाड़ी चढ़कर एक से दो कि मी पैदल चलकर यह मतदान केंद्र पर पहुंचेंगे। करोंदिया पुनर्वास केंद्र से मतदान केंद्र तक पहुंचने के लिए 250 मतदाताओं को परेशानी हो सकती थी। यहां के लोगों को 10 से 11 कि मी की दूरी तय करना पड़ जाती। अब नाले पर नाव की व्यवस्था हो जाने से इन्हें पांच किमी की दूरी ही तय करना पड़ेगी। हमारे जिले के ये मतदाता ऐसे हैं जो कि जागरूक है और इनके लिए प्रशासन भी जागा है। ऐसे में अब लोकतंत्र के उन पुजारियों की बारी है जो कि आसानी से मतदान केंद्र तक पहुंच सकते हैं।

ये जज्बा सभी में हो

- जैन समाज के वैभव जैन ने कहा कि हमारे यहां पर तो मतदान केंद्र महज कुछ कदम की दूरी पर है। जज्बा देखना है तो आदिवासी अंचल के लोगों का देखो। ऐसे प्रेरक उदाहरण निश्चित रूप से हमें मतदान केंद्र तक ले जाने के लिए प्रेरणा देते हैं।

- राजपूत समाज के दुर्गेश ठाकुर ने कहा कि गांव जो कि पठारी क्षेत्र में हैं, उनके लिए तो बहुत ही आसान है कि वे पैदल चलकर ही मतदान केंद्र पहुंच सकते हैं। लोकतंत्र में भागीदारी निभाने की अब है हमारी बारी।

- ब्राह्मण समाज के अजय शर्मा का कहना है कि दूरी कोई बड़ा बहाना नहीं है। जिम्मेदारी हमें निभाना है। वोट आज डाला तो कल वह हमारी ताकत बनेगा। आज चूके तो फिर मौका नहीं मिलेगा।  

Posted By: Prashant Pandey

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