भोपाल (स्टेट ब्यूरो)। भारतीय जनता पार्टी ने अब तक हार के कारणों की समीक्षा तो नहीं की, लेकिन जो कारण सामने आ रहे हैं। उनमें सबसे बड़ा कारण मालवा में जयस को माना जा रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जयस के बढ़ते प्रभाव से राष्ट्रीय नेताओं को अवगत कराया गया था, तब मालवा के एक बढ़बोले नेता ने यह कहकर आश्वस्त कर दिया था कि वे मैनेज कर लेंगे पर हुआ कुछ नहीं।

मालवा में प्रचार के लिए पार्टी ने कैलाश विजयवर्गीय को एक हेलीकॉप्टर भी प्रदान किया था, लेकिन पराजय मिलते ही उन्होंने सारा ठीकरा बागियों पर फोड़ दिया। पार्टी ने जो कवायद की है, उसके मुताबिक इस चुनाव में भाजपा के तीन बागी खड़े हुए थे। जबकि पिछले चुनाव में 6 बागी चुनाव लड़े थे। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और प्रदेश प्रभारी डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे ने भी जयस के खतरे से अवगत कराकर उपाय निकालने के लिए कहा था। पार्टी का कहना है कि जहां-जहां जयस का प्रभाव ज्यादा रहा, वहीं भाजपा का अंतर भी बढ़ा और पार्टी को हार मिली।

आदिवासी वोट बैंक ही बदलता है सरकार

आदिवासी वोट बैंक जब-जब करवट लेता है, तब-तब सरकार में परिवर्तन होता है। संयुक्त मध्यप्रदेश के दौर में भी 1990 में भाजपा की सरकार सिर्फ आदिवासी सीटों के भरोसे बनी थी। 1993 और 1998 में जब यही वोट बैंक कांग्रेस में चला गया तो कांग्रेस की सरकार बनी। 2003 के चुनाव में अदिवासी भाजपा के साथ आए। तब प्रदेश में आदिवासी सीटों की संख्या 41 थी, जिसमें भाजपा को 34 और कांग्रेस को सिर्फ दो सीट मिली थीं। परिसीमन के बाद 2008 के चुनाव में अजा सीट 47 हो गईं पर भाजपा के खाते में 29 सीट ही आईं। इस चुनाव में कांग्रेस को 17 सीट मिली थीं। 2013 के चुनाव में फिर भाजपा को 32 और कांग्रेस को 15 सीट मिलीं।

मालवांचल में 12 आदिवासी सीटों का नुकसान

भाजपा को मालवांचल से 22 आदिवासी सीटों में 12 का नुकसान हुआ। वर्ष 2013 के चुनाव में भाजपा को यहां से 18 सीटें मिली थीं और कांग्रेस के पास मात्र 4 सीटें थीं। वहीं 2018 के चुनाव में एकदम उल्टा माहौल बन गया। कांग्रेस को 16 सीटें मिली तो भाजपा को मात्र छह सीटों पर समेट दिया गया। पार्टी नेताओं की मानें तो इस नुकसान की वजह जयस भी है। जयस पहले सामाजिक संगठन के रूप में काम किया करता था, लेकिन इस चुनाव में जयस के संरक्षक डॉ. हीरालाल अलावा ने कांग्रेस में शामिल होकर मनावर सीट से चुनाव लड़ा। इसका नुकसान ये हुआ कि जहां-जहां जयस का प्रभाव था, वहां भाजपा को कम वोट मिले।

कब-किसे-कितनी मिलीं सीट

वर्ष              भाजपा           कांग्रेस

2003 (41)       34                 02

2008 (47)       29                 17

2013 (47)       32                 15

2018 (47)       16                 31

(नोट- इस बार सीताराम आदिवासी ने गैर आरक्षित सीट से चुनाव जीता है।)

मालवांचल        कांग्रेस       भाजपा

22 (2018 )         16              06

22 (2013)          04              18

जयस ने फैलाया भ्रम

जयस पहले सामाजिक संगठन के रूप में काम करता था। इस चुनाव में उसने कांग्रेस के पक्ष में काम किया। कांग्रेस ने आदिवासी इलाकों में भ्रम फैलाने का काम किया। इसका मालवांचल में ज्यादा नुकसान भाजपा को हुआ- गजेंद्र सिंह पटेल, प्रदेशाध्यक्ष, भाजपा अजजा मोर्चा

Posted By: Rahul.vavikar

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