इंदौर। मध्य प्रदेश में 15 साल के बाद कांग्रेस वापसी करती दिखाई दे रही है, लेकिन जिस तरह के रुझान आ रहे हैं उससे लग रहा है कि सत्ता के द्वार पर खड़ी होकर भी वह सत्ता से दूर रह सकती है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि छोटे दल और निर्दलीय प्रदेश में किंगमेकर का रोल निभा सकते हैं। फिलहाल भाजपा और कांग्रेस में कांटे की टक्कर चल रही है।

रुझानों और परिणाम पर अगर गौर करें तो छोटे दल और निर्दलीय अपने छोटे आकार और कम सीटों के बावजूद अगली विधानसभा में बड़ा रोल निभा सकते हैं। भाजपा और कांग्रेस के बड़े कद के बाद बसपा 4 सीटों पर आगे चल रही है।

इसके बाद निर्दलीय का नंबर आता है, जो 3 सीटों पर आगे चल रहे हैं। समाजवादी पार्टी ने भी अपनी मौजूदगी दिखाई है और वह 2 सीटों पर आगे चल रही है। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और बहुजन संघर्ष दल के उम्मीदवार 1-1 सीटों पर आगे चल रहे हैं।

230 सदस्यों वाली विधानसभा में रुझानों के मुताबिक भाजपा और कांग्रेस को करीब 41 फीसद वोट अभी तक मिल रहे हैं। इसके बाद निर्दलीय उम्मीदवारों का वोट शेयर करीब 6 फीसद है बहुजन समाज पार्टी का 4.6 फीसद, जीजीपी1.7 फीसद और एसपी अभी तक 1 फीसद वोट हासिल कर चुकी है।

बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने इस बात के साफ संकेत दिए हैं कि वह किसी भी हालत में भाजपा का समर्थन नहीं करेंगी। इसके साथ समाजवादी पार्टी ने अभी तक अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है। इसलिए सत्ता के सूत्र काफी हद तक निर्दलीय उम्मीदवारों के हाथ में हो सकते हैं।

विरोध की इस आंधी में शिवराज सरकार के कई दिग्गजों को हार का मुंह देखना पड़ा है। और कुछ बड़े नेता मुश्किल से जीत हासिल कर पाए हैं।  

Posted By: Hemant Upadhyay

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