हैदराबाद, जेएनएन। लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Election 2019) के पहले चरण (11 अप्रैल) के तहत 20 राज्यों की 91 सीटों के लिए मतदान हो रहा है। केंद्र में बनने वाली अगली सरकार के लिहाज से ये सभी सीटें बेहद अहम हैं। लोकसभा के पहले चरण में सबसे अधिक सीटें आंध्र प्रदेश से ही हैं। यहां की सभी 25 लोकसभा सीटों पर आज मतदान हो रहा है।

इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि राज्यल में लोकसभा के साथ ही विधानसभा की सभी 175 सीटों के लिए भी आज ही मतदान हो रहा है। इस तरह लोकसभा चुनाव के साथ ही इस बार राज्य में किसकी सरकार बनेगी और अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसका फैसला भी वोटर्स आज ही कर रहे हैं।

रुचिकर तथ्य यह भी है कि राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू पिछले कुछ समय से भाजपा के खिलाफ देशभर में गठबंधन की हुई असफल कोशिशों के अगुआ भी हैं। वैसे राज्य में ही उनकी चुनौती कम नहीं है, क्योंकि वाईएसआर कांग्रेस के प्रमुख जगनमोहन रेड्डी ने उनकी नाक में दम कर रखा है। आंध्र प्रदेश की राजनीति पर करीब से नजर रखने वालों की मानें तो इस बार का विधानसभा चुनाव चंद्रबाबू नायडू के लिए उनके राजनीतिक करियर के लिहाज से सबसे निर्णायक होगा।

दो दलों में है मुख्य मुकाबला
आंध्र प्रदेश में भले ही राष्ट्रीय दल- भाजपा और कांग्रेस भी मुकाबले में दिख रही हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला टीडीपी और जगनमोहन रेड्डी की वाईएसआर के बीच ही है। कांग्रेस के आला नेताओं के साथ गलबहियां करने के बावजूद चंद्रबाबू नायडू के साथ कांग्रेस का चुनावी गठबंधन संभव नहीं हुआ। इस तरह आंध्र ऐसा अखाड़ा बन गया है, जहां किसी को किसी पर यकीन नहीं।

भाजपा के करीब आ सकते हैं जगन
चारों दलों में चुनाव पूर्व गठबंधन नहीं होने के बावजूद राजनीतिक जानकारों का अनुमान है कि चुनाव नतीजे के बाद जगन, भाजपा खेमे में आ सकते हैं। इससे एनडीए की ताकत बढ़ेगी। इसकी वजह भी साफ है, कांग्रेस से जगन के काफी खराब संबंध रहे हैं। हालांकि कुछ ही दिन पहले जगन ने कहा था कि उन्होंसने कांग्रेस से पुरानी दुश्मेनी भुला दी है।

मजबूती से उभरे जगन
चुनावी जानकारों की मानें तो इस बार जगन पहले हुए सभी चुनावों की तुलना में अधिक मजबूती से उभरे हैं। उनके पक्ष में साफ तौर हवा देखी जा रही है। पिता के निधन के बाद के वर्षों में राजनीतिक और चुनावी संघर्ष ने उन्हेंम एक नेता के तौर पर भी मजबूत बनाया है। ऐसे में इस बार अपने दम पर या चुनाव बाद गठबंधन के तहत उनकी सरकार बन सकती है।

कांग्रेस और टीडीपी में इसलिए नहीं हुआ समझौता
एक्स्पर्ट का मानना है कि तेलंगाना विधानसभा चुनाव में टीडीपी और कांग्रेस का गठबंधन बुरी तरह असफल रहा था। इसीलिए राहुल गांधी और नायडू में अच्छेा संबंध होने के बावजूद दोनों दलों ने लोकसभा चुनाव 2019 के लिए गठबंधन नहीं किया।

आंध्र प्रदेश विधानसभा की वर्तमान स्थिति
आंध्र प्रदेश विधानसभा में इस समय टीडीपी के पास 99 विधायक, जगनमोहन की पार्टी के 66 विधायक और भाजपा के 3 विधायक हैं। इसी तरह लोकसभा की 25 सीटों में टीडीपी के पास 15, वाईएसआर कांग्रेस के पास 8 और भाजपा के पास दो सीटें थीं। हैरानी की बात है कि आंध्र प्रदेश में कांग्रेस पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में एक भी सीट हासिल नहीं कर सकी थी। मतलब आंध्र प्रदेश में कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो चुका है।

Posted By: Amit Singh

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