गाजीपुर [जागरण स्‍पेशल]। पूर्वी उत्‍तर प्रदेश में 1965 में पाकिस्‍तान के खिलाफ परमवीर चक्र विजेता अब्‍दुल हमीद की वीरता को लोग अब भी याद करते हैं। उन्‍होंने 1965 के भारत-पाकिस्‍तान युद्ध में पैटन टैंक को नष्‍ट कर दिया थ। ऐसे समय में जब पुलवामा आतंकी हमले के बाद देश के लोगों का गुस्‍सा पाकिस्‍तान के खिलाफ चरम पर था, ऐसे में वीर अब्‍दुल हमीद जैसे जाबांज सैनिक सैनिक का याद आना स्‍वाभाविक है। लोकसभा चुनाव के दौरान पत्रकारों ने वीर अब्‍दुल हमीद के गांव धामूपुर और उनके घर की पड़ताल की और क्षेत्र के जरूरी मुद्दों पर लोगों से चर्चा की।  यह गांव पूर्वी यूपी के गाजीपुर जिले में आता है।   

 वीर अब्‍दुल हमीद के साधारण से घर के बाहर नीम के पेड़ के नीचे उनके नाती मोहम्‍मद वसीम नौकरियों और उनके न रहने के बारे में बताते हैं। एंथ्रोपोलॉजी में स्‍नातक वसीम का कहना है कि किस तरह से उन्‍होंने जबलपुर, बारासात और अन्‍य जगहों पर सेना में नौकरी के लिए कड़ी मेहनत की। उनके रिश्‍तेदार बेचैन अली कहते हैं कि नौकरियां सीमित हैं। कुछ लड़के नौकरियों की तलाश में गुजरात, पंजाब और मुंबई चले गए हैं।

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गाजीपुर में मनोज सिन्‍हा के कार्यकाल में हुआ है विकास
धामूपुर गांव के ग्राम प्रधान जनार्दन यादव का कहना है कि केंद्र और राज्‍य सरकार के सहयोग से हाल के दिनों में तीन सौ शौचालय बनाए गए हैं। गांव के कुछ घरों को गैस सिलेंडर भी मिला है। उनका कहना है कि मनरेगा का बजट कम हुआ है। गांव के वसीम, बेचैन और जर्नादन तीनों इस बात पर सहमत हैं कि केंद्रीय मंत्री और स्‍थानीय सांसद मनोज सिन्‍हा के पिछले पांच सालों के कार्यकाल में गाजीपुर का जबरदस्‍त विकास हुआ है।

लोगों का मानना है कि उन्‍होंने जितना क्षेत्र का दौरा किया उतना किसी भी सांसद ने नहीं किया। जनार्दन यादव कहते हैं कि गाजीपुर के स्‍टेशनों पर रुकने वाली गाड़ि‍यों की संख्‍या बढ़ी है। जिले के स्‍टेशनों को सुंदर बनाया गया है। वर्ष 2016 में गाजीपुर से दिल्‍ली के लिए सुहेलदेव सुपरफास्‍ट एक्‍सप्रेस शुरू की गई है। देश के सभी महानगरों के लिए यहां से रेलगाड़ियां चलाई गई हैं। गाजीपुर की सभी सड़कें अब काफी अच्‍छी हो गई हैं। हालांकि तीनों ही लोग चुनाव में मनोज सिन्‍हा को वोट देने नहीं जा रहे हैं। ज्‍यादातर मुस्लिम, यादव और दलित इस बार सपा-बसपा के गठबंधन को वोट देने जा रहे हैं।

बसपा अब तक नहीं जीती है गाजीपुर सीट

ग्राम प्रधान ने कहा कि यहां जाति के आधार पर वोट होता है, लेकिन 10 से 15 प्रतिशत लोग स्‍वार्थ या लगाव से किसी और को वोट दे सकते हैं। वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक गाजीपुर में 20 फीसदी दलित और 10 प्रतिशत मुस्लिम हैं। यादव करीब 20 प्रतिशत हैं। एक स्‍थानीय पत्रकार का कहना है कि बड़ा सवाल यह है कि कितने यादव बसपा उम्‍मीदवार को वोट देंगे? उन्‍हें संदेह है कि बड़ी संख्‍या में वोट ट्रांसफर हो सकते हैं। बसपा ने इससे पहले कभी भी गाजीपुर सीट नहीं जीती है।

मनोज सिन्‍हा अब गाजीपुर लोकसभा सीट से तीन बार सांसद रहे हैं। उन्‍हें पहली बार सपा-बसपा के संयुक्‍त उम्‍मीदवार से चुनावी टक्‍कर होगी। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्‍हें तीन लाख वोट मिले थे और वह करीब 32 हजार वोटों से जीते थे। सपा को यहां 2.7 लाख और बसपा को 2.4 लाख वोट मिले थे। वर्ष 2017 के लोकसभा चुनाव में गाजीपुर की चार विधानसभा सीटों में से दो एसपी और दो बसपा को मिली थीं।

अफजाल अंसारी को मिल सकता है बसपा का टिकट
माना जा रहा है कि बसपा यहां से क्षेत्र के बाहुबली और मऊ के विधायक मुख्‍तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी को टिकट दे सकती है। अफजाल वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में यहां से सपा के टिकट पर जीत चुके हैं। ग्राम प्रधान जनार्दन यादव कहते हैं कि जब अफजाल अंसारी जैसे नेता फोन करते हैं तो सरकारी अधिकारी सुनते हैं और काम भी होता है। इससे उन्‍हें लोकप्रियता मिलती है।

सवर्ण और गैर ओबीसी है भाजपा का मतदाता
सवर्ण और कई गैर यादव पिछड़ा वर्ग एनडीए के कोर वोटर हैं। बीटेक छात्र अनुज सिंह ने कहा कि वह भाजपा को वोट करेंगे लेकिन समृद्ध ठाकुर परिवार से आने वाले उनके पिता ओमप्रकाश कांग्रेस को वोट करेंगे। ओमप्रकाश का कहना है कि मैं हमेशा से कांग्रेस को वोट देता रहा हूं। लेकिन मेरा अभी भी यह मानना है कि विकास को बढ़ावा देने वाले मनोज सिन्‍हा को दोबारा चुने जाना चाहिए।

दलित देंगे गठबंधन को वोट 
गांव में कुछ ही दूरी पर कुछ दलित युवाओं से बात करने पर उन्‍होंने कहा कि यहां 90 फीसदी लोग बसपा को वोट देंगे। कई ऐसे भी थे जो भीम आर्मी के मुखिया को पसंद करते हैं। यहां लोग आवारा पशुओं से परेशान हैं। वीर अब्‍दुल हमीद के निधन के साढ़े तीन दशक बाद वर्ष 1999 में उनका स्‍मारक बनाया गया था। यहां एक अस्‍पताल बन रहा है, जिसका काम पिछले कुछ समय से रुका हुआ है। वसीम को उम्‍मीद है कि यह स्‍मारक से कम समय में तैयार हो जाएगा।

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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