भागलपुर [संजय सिंह]। बांका के महासमर का अंदाज ही कुछ अलग है। पूर्व बिहार की पांच लोकसभा सीटों में बांका ही एक ऐसी सीट है, जहां त्रिकोणीय मुकाबले के आसार दिख रहे हैं। चुनावी बिसात बिछ चुकी है। नेताओं के आने-जाने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। 

2014 के चुनाव में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ीं पुतुल कुमारी के बागी तेवर से यहां का चुनाव दिलचस्प हो गया है। एनडीए और महागठबंधन ने भी चुनावी समर में विजय पाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। यहां के संसदीय चुनाव का इतिहास भी गजब का रहा है। बागी प्रत्याशी पुतुल कुमारी के पति दिग्विजय सिंह बांका से तीन बार सांसद रहे हैं। दो बार उन्होंने एनडीए प्रत्याशी (तब राजद में) गिरधारी यादव को पराजित किया था।

गिरधारी ने भी उन्हें 1996 और 2000 में पराजित कर चुनावी बाजी अपने पक्ष में कर ली थी। गिरधारी भी यहां एक बार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपना भाग्य आजमा चुके हैं। बागी तेवर अपनाने के कारण पुतुल कुमारी को भाजपा ने छह साल के लिए पार्टी से बाहर भी कर दिया है। दिग्विजय सिंह के निधन के बाद 2010 में हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी पुतुल कुमारी ने वर्तमान राजद सांसद जयप्रकाश नारायण यादव को पराजित कर संसद का सफर तय किया था।

2014 के आम चुनाव में जयप्रकाश नारायण यादव ने पुतुल कुमारी को 10 हजार वोटों से पराजित कर अपने राजनीतिक पराजय का बदला चुका लिया। बांका के चुनावी महासमर में सांसद जयप्रकाश नारायण यादव (राजद), गिरधारी यादव (जदयू) और पुतुल कुमारी (निर्दलीय) प्रत्याशी के रूप में अपना भाग्य आजमा रही हैं।

पुतुल को अपने पति द्वारा किए गए विकास कार्यों के साथ-साथ अपने कार्यकाल में किए गए विकास कार्यों को गिनाने का मौका मतदाताओं के बीच है। पुतुल लोगों के बीच यह कहने से नहीं चूक रही हैं कि उनकी लड़ाई देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नहीं है। वे प्रधानमंत्री ही नाम पर वोट मांग रहीं हैं। वे कहतीं हैं कि मेरा समर्थन प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी को हैं। उन्होंने कहा टिकट बांटने के दौरान की गई उपेक्षा की वजह से ही उन्हें चुनाव मैदान में आना पड़ा।

भाजपा के बिहार राज्य सह संगठन मंत्री शिव नारायण ने पुतुल को चुनाव मैदान से हटने को भी कहा, लेकिन वे नहीं मानीं। इसके पहले प्रदेश अध्यक्ष सहित अन्य कई नेताओं ने उन्हें टिकट वापस लेने को कहा था, लेकिन उन्‍होंने बात नहीं मानीं। इस कारण यहां मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।

दिलचस्प बात तो यह है कि 2009 में भी पुतुल के पति दिग्विजय सिंह को टिकट से वंचित रखा गया था। वे भी निर्दलीय चुनाव लड़े और जीत हासिल की।

राजद प्रत्याशी जयप्रकाश नारायण यादव राजनीति के अनुभवी खिलाड़ी रहे हैं। वे बिहार सरकार और केंद्र सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। उनका दावा है कि बांका में उनके प्रयास से पुल और सड़क का निर्माण हुआ है। उन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी। बांका की पहचान आज भी दूसरे जगहों में पुलों वाला जिले के रूप में हो रही है। अपने कार्यकाल के दौरान जयप्रकाश ने यहां संगठन को भी मजबूत किया है। उन्हें भरोसा है कि विकास और कैडर वोटर की बदौलत चुनाव में वे जीत हासिल करेंगे।

राजद की राजनीति से ही उपजे गिरधारी यादव किसी से कम नहीं हैं। इन्हें भी राजद के कार्यकाल में जयप्रकाश नारायण यादव का करीबी माना जाता था, लेकिन राजनीति में ना तो कोई दोस्त होता है और ना ही कोई दुश्मन।

गिरधारी और जयप्रकाश चुनावी समर में आमने-सामने है। बांका संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने का अवसर गिरधारी को भी मिला। इनके प्रयास से यहां केंद्रीय विद्यालय खोल गया। उपेक्षित इलाके में सड़कें बनाई गईं। किसानों के हित में सिंचाई योजना का भी काम हुआ। गिरधारी फिलहाल कटोरिया से जदयू के विधायक हैं। इस नाते इस इलाके में इनकी पकड़ मजबूत है।

मतदाताओं को रिझा रहे प्रत्याशी

तीनों प्रत्याशी अपने-अपने दम पर मतदाताओं को रिझाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे हैं। कल चुनाव प्रचार के लिए राजद की ओर से पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव तो एनडीए की ओर से वर्तमान उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी की चुनावी सभा होगी। इधर, निर्दलीय प्रत्याशी पुतुल कुमारी की पुत्री व राष्ट्रीय खिलाड़ी श्रेयसी सिंह भी चुनाव प्रचार की बागडोर थामे है। इस त्रिकोणात्मक संघर्ष में जो उम्मीदवार कैडर व जातीय वोट जितना अधिक बटोर पाएंगे, जीत उन्हीं की होगी।

छह साल के लिए सस्पेंड 

बांका लोकसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी पुतुल कुमारी पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) बीजेपी की गाज गिरी है। उन्‍हें पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया है। पुतुल कुमारी ने बीजेपी के बिहार प्रदेश उपाध्‍यक्ष पद पर रहते हुए बांका से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन किया है। बीजेपी ने उन्हें पहले पत्र देकर चेताया। जब बीजेपी नेत्री पुतुल कुमारी ने संगठन की बात नहीं मानी, तो पार्टी ने उन्हें 6 साल के लिए सस्‍पेंड कर दिया है। 

पुतुल कुमारी के लिए चुनाव प्रचार भाजपा, जदयू सहित कई पार्टी के नेता गुपचुप तरीके से भी कर रहे हैं। कई पार्टी के कुछ असंतुष्ट नेता तो प्रत्याशी पुतुल कुमारी और श्रेयसी साथ घूमकर लोगों से वोट मांग रहे हैं। उनको कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों का भी समर्थन मिला हुआ है। सैकड़ों युवाओं की टोली प्रतिदिन उनके लिए चुनाव प्रचार करते हैं, ऐसा युवाओं का किसी पार्टी से संबंध नहीं है। लेकिन पुतुल के लिए प्रचार करते हैं। 

Posted By: Dilip Shukla

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