जयपुर, नरेन्द्र शर्मा। राजस्थान के कांग्रेसी दिग्गजों ने पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के "फार्मूले" को टिकट तय करने में कामयाब नहीं होने दिया। प्रदेश के दिग्गजों ने अपने-अपने चहेतों और रिश्तेदारों को टिकट दिलाने के चक्कर में राहुल गांधी के "फार्मूले" को दरकिनार कर दिया। इस काम में प्रदेश के नेताओं का सहयोग यहां तैनात राष्ट्रीय सचिवों ने भी किया। इनमें सबसे बड़ी भूमिका विवेक बंसल की रही।

विधानसभा अध्यक्ष जैसे सैंवधानिक पद पर बैठे दिग्गज नेता डॉ.सी.पी.जोशी ने अपने दो चहेतों को टिकट दिलाने के चक्कर में पार्टी के जातिगत समीकरण ही बिगाड़ दिए। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अविनाश पांडे डॉ.जोशी के इतने दबाव में रहे कि सब कुछ जानने के बावजूद उन्होंने राजसमंद सीट से देवकीनंदन गुर्जर और भीलवाड़ा से रामपाल शर्मा को टिकट दिलवा दिया। राजसमंद से टिकट की दावेदारी करने वाले राज्य के पूर्व मंत्री लक्ष्मण सिंह रावत खुलकर आरोप लगाते है कि जोशी जब बिहार के प्रभारी महासचिव थे तो पांडे उनके सहयोगी सचिव थे। इसी के चलते पांडे ने कार्यकर्ताओं से मिले फीडबैक,शक्ति प्रोजेक्ट की राय,सीएम अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री एवं पीसीसी अध्यक्ष डॉ.सी.पी.जोशी की सलाह को दरकिनार कर दिया। जोशी के प्रभाव के चलते राष्ट्रीय सचिव तरूण कुमार ने भी केन्द्रीय नेतृत्व को गलत रिपोर्ट दी।

राहुल गांधी ने यह तय किया था फार्मूला

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रदेश के करीब 50 पोलिंग बूथों पर तैनात कार्यकर्ताओं से शक्ति प्रोजेक्ट के माध्यम से संभावित प्रत्याशियों के बारे में फीडबैक लिया था। इसके साथ ही चार राष्ट्रीय सचिवों विवेक बंसल,देवेंद्र यादव,काजी निजामुद्दीन और तरूण कुमार ने जिलों में जाकर कार्यकर्ताओं से संभावित प्रत्याशियों के बारे में राय जानी थी,हालांकि इनमें से बंसल पर गलत रिपोर्ट देने के आरोप लगे है। राहुल गांधी ने अपने स्तर पर सर्वे भी कराया था। करीब दो माह पहले राहुल गांधी ने साफ कहा था कि तय फार्मूले के आधार पर ही टिकट दिए जाएंगे,लेकिन जैसे ही टिकट तय करने की प्रक्रिया शुरू हुई अशोक गहलोत,सचिन पायलट और डॉ.सी.पी.जोशी ने अपने-अपने चहेतों को टिकट दिलवा दिया,इनमें से अधिकांश के नाम राहुल के फार्मूले के आधार पर आगे नहीं आए थे।

दिग्गजों ने ऐसे किया राहुल के फार्मूले को दरकिनार

विधानसभा अध्यक्ष डॉ.सी.पी.जोशी ने अपने खास देवकीनंदन गुर्जर को राजसमंद सीट से टिकट दिलाने के लिए अविनाश पांडे पर इतना दबाव बनाया कि वे नहीं चाहते हुए भी गुर्जर को टिकट देने के लिए तैयार हो गए। जातिगत समीकरणों के लिहाज से इस सीट पर रावत और राजपूत समाज का प्रभाव है,गहलोत और पायलट इन्ही में से किसी एक जाति के नेता को टिकट देना चाहते थे,लेकिन जोशी की जिद के कारण वे सफल नहीं हो सके ।

जोशी ने भीलवाड़ा सीट से रामपाल शर्मा को टिकट दिलवा दिया,जबकि जातिगत समीकरणों के लिहाज से यहां ब्राहम्ण का जीत मुश्किल है। गहलोत ने अपने बेटे वैभव को जोधपुर सीट से मैदान में उतार दिया। हालांकि राहुल गांधी ने किसी नेता के रिश्तेदार को टिकट देने की बात कही थी। चित्तौडगढ़ से गोपाल सिंह ईडवा को टिकट देना भी राहुल के फार्मूले के खिलाफ बताया जा रहा है। ईडवा कभी इस क्षेत्र में सक्रय नहीं रहे,वे करीब 400 किमी.दृर नागौर जिले के रहने वाले है। इसी तरह से झालावाड़ सीट से मजबूत दावेदारों को दरकिनार करते हुए प्रमोद शर्मा को मैदान में उतारा गया है।  

Posted By: Preeti jha

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