रांची, राज्य ब्यूरो। लोकप्रियता के पैमाने पर खरा उतरकर चुनाव जीतना और सत्ताधारी मंत्री के रूप में परफार्म करना, दोनों अलग-अलग विषय हैं। झारखंड कोटे से पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्रियों का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट की पहली लिस्ट से गायब रहना यह बता रहा है कि कहीं कुछ तो कमी रह गई। यही वजह है कि पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री सुदर्शन भगत और जयंत सिन्हा दोनों को Modi Sarkar 2.0 में जगह नहीं मिली।

केंद्रीय राज्यमंत्री सुदर्शन भगत के कार्यकाल के दौरान उनके मंत्रालय कई बार बदले गए। ग्रामीण विकास राज्यमंत्री, कृषि राज्यमंत्री के बाद आखिर में उन्हें जनजातीय मंत्रालय का राज्यमंत्री बनाया गया। तीन-तीन बार मंत्रालय बदलने से स्पष्ट है कि वे सरकार के मानक पर खरे नहीं उतरे। अब तकरीबन यह तय हो गया है कि सुदर्शन भगत दोबारा मंत्री नहीं बनाए जाएंगे। सुदर्शन आदिवासी चेहरे के रूप में झारखंड का प्रतिनिधित्व करते थे, अब केंद्र के पास अर्जुन मुंडा के रूप में उनसे कहीं बड़ा और प्रभावशाली चेहरा है। मुंडा ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ भी ले ली है।

वहीं, रिकार्ड वोटों से जीतकर आने वाले जयंत सिन्हा प्रधानमंत्री की कैबिनेट लिस्ट में प्राथमिकता सूची में नहीं रहे। संभव है आगे विस्तार के क्रम में उन्हें मौका मिल जाए। जयंत सिन्हा के कामकाज को नकारा नहीं जा सकता। बतौर वित्त राज्य मंत्री और नागर विमानन मंत्री उन्होंने काफी काम किया है। चर्चा यह भी है कि पिता यशवंत सिन्हा के कड़ुए बोल का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा है। बहरहाल, जयंत का चैप्टर अभी पूरी तरह से क्लोज नहीं हुआ है। 

अब अगले विस्तार पर टिकीं निगाहें
प्रधानमंत्री की कैबिनेट की सूची में झारखंड से अर्जुन मुंडा को कैबिनेट का दर्जा दिया गया है जबकि पिछली बार दो राज्य मंत्री पद झारखंड के कोटे में आए थे। चर्चा है कि कैबिनेट के अगले विस्तार में झारखंड को एक राज्यमंत्री और मिल सकता है। वह भाग्याशाली कौन होगा सबकी निगाहें इस पर टिकी हुईं हैं।

मुख्तार अब्बास नकवी भी झारखंड से ही हैं राज्यसभा सदस्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में शामिल मुख्तार अब्बास नकवी भी झारखंड से ही राज्यसभा सदस्य हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो झारखंड के कोटे में दो कैबिनेट मंत्री पद आए हैं। राज्य गठन के बाद यह पहला मौका है जब दो कैबिनेट मंत्री पद झारखंड को मिले हैं।

जयंत-सुदर्शन की उपेक्षा से हजारीबाग-लोहरदगा निराश
मोदी सरकार प्रथम में राज्य वित्त मंत्री और राज्य नागरिक उड्डयन मंत्री के रूप में अपनी जवाबदेही को बखूबी निभाने वाले सांसद जयंत सिन्हा को मोदी सरकार दो में कैबिनेट मंत्री के रूप में देखने की आस लगाए हजारीबाग की जनता को निराशा हाथ लगी। जयंत सिन्हा को मोदी सरकार में जगह नहीं मिलने पर लोगों ने निराशा जताई। लोगों ने कहा कि शानदार और रिकार्ड जीत के साथ संसद जाने वाले जंयत को सरकार में मंत्री बनने से हजारीबाग सहित देश में उनके अनुभव का लाभ जनता को मिलता।

  • सुदर्शन भगत ने कहा, यह प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार, फैसले का स्वागत करता हूं 

वहीं, लोहरदगा संसदीय क्षेत्र से जीत की चुनावी हैट्रिक बनाने वाले भाजपा के सुदर्शन भगत को गुरुवार को गठित प्रधानमंत्री नरेेंद्र मोदी के कैबिनेट में जगह नहीं मिलने से समर्थक निराश हैं। लोहरदगा-गुमला व आसपास के समर्थकों को यह विश्वास था कि संघर्ष की भूमि पर लगातार तीसरी बार कमल खिलाने में कामयाब सुदर्शन भगत को निश्चित रूप से मोदी कैबिनेट में जगह मिलेगी। भगत के मंत्री बनने की उम्मीद को लेकर बड़ी संख्या में लोग बुधवार को दिल्ली भी गए थे। साथ ही गुरुवार को दिल्ली में पीएमओ के फोन आने का लोग इंतजार करते रहे।

दिल्ली गए सुदर्शन भगत के समर्थक भोला चौधरी ने बताया कि इस बार सिर्फ झारखंड से अर्जुन मुंडा को ही जगह मिली है। उम्मीद है कि कैबिनेट के अगले विस्तार में झारखंड के अन्य सांसदों को भी जगह मिले। उधर सांसद सुदर्शन भगत ने कहा है कि मंत्रीमंडल में किसी को शामिल करना प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार होता है। मैं प्रधानमंत्री के फैसले का स्वागत करता हूं। उधर सुदर्शन भगत के परिवार के सदस्यों को भी उम्मीद है कि कैबिनेट के अगले विस्तार में सुदर्शन भगत को जगह मिलेगी। उनकी मां मानो देवी का कहना है कि उन्हें पक्का भरोसा है कि उनका बेटा फिर मंत्री बनेगा। 

वहीं हजारीबाग में डा. मेजर पीके सिन्हा ने कहा कि सांसद जयंत कई मायने में बेहतर मंत्री और सांसद हैं। प्रथम सरकार में अपनी क्षमता का अहसास कराने वाले सांसद दूसरी सरकार में और भी बेहतर तरीके से काम करते। मोदी सरकार में मंत्री नहीं बनाए जाने से निराशा हाथ लगी है। बार संघ अध्यक्ष मिथिलेश कुमार मन्ने ने कहा कि मंत्री नहीं बनने से हजारीबाग को संवारने का उनके सपनों को अल्प विराम लगा है।

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Posted By: Alok Shahi