धनबाद,श्रवण कुमार। धनबाद में छठे चरण के तहत 12 मई को मतदान होना है। अब यहां चुनाव की सरगर्मी तेज हो गई है। चुनाव के मद्देनजर राष्ट्रीय से लेकर स्थानीय मुद्दे छाए हुए हैं। बिजली, पानी, विस्थापन, रोजगार, एयरपोर्ट जैसे ज्वलंत मुद्दे उठ रहे हैं, लेकिन आश्चर्य की बात खेल, खिलाड़ी व मैदान चुनावी मुद्दे से गौण हैं। यहां खेल व खिलाडिय़ों का विकास भाजपा हो या कांग्रेस किसी की प्राथमिकता सूची में नहीं है। वह भी तब जब धनबाद में एक अच्छा खेल का मैदान नहीं है। जो है भी उसमें राजनीतिक, धार्मिक व सरकारी आयोजन अधिक होता है। गोल्फ ग्राउंड अक्सर धार्मिक, राजनीतिक व सरकारी कार्यक्रम में व्यस्त रहता है। इसी तरह इंडोर स्टेडियम भी अधिकतर शादी-ब्याह के लिए बुक रहता है। शादी के मौसम में इंडोर स्टेडियम बुक रहने से बैडमिंटन खिलाड़ी पै्रक्टिस नहीं कर पाते हैं। पहले बैडमिंटन टूर्नामेंट के लिए जिला संघ का बुकिंग चार्ज नहीं लगता था। अब बकायदा शुल्क देकर बुक करना पड़ता है।

एक दशक से मेगा स्पोर्ट्स कांप्लेक्स अधूराः ठाकुरकुल्ही में मेगा स्पोर्ट्स कांप्लेक्स का निर्माण एक दशक से अधूरा पड़ा है। इस एक दशक में कई लोकसभा व विधानसभा चुनाव बीत चुके हैं। इस दौरान अधूरे स्पोर्ट्स कांप्लेक्स को पूरा कराने के लिए कईयों ने राजनीतिक वादे किए पर सब धरे के धरे रह गए। अन्य वादों की तरह ये भी राजनीतिक वादा साबित हुआ है। यह बन जाता तो धनबाद के खेलों में निखार आ जाता।

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बीसीसीआई स्टेडियम बनाने को तैयार, जमीन उपलब्ध नहीं : बीसीसीआई धनबाद में क्रिकेट स्टेडियम बनाने को तैयार है, पर जमीन उपलब्ध नहीं के चलते यह भी अटका पड़ा है। धनबाद क्रिकेट एसोसिएशन क्रिकेट स्टेडियम की जमीन के लिए जिला प्रशासन से लेकर सांसद व विधायक से मदद की गुहार लगा चुका है। क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण के लिए जमीन नहीं मिली है। स्वतंत्र क्रिकेट स्टेडियम नहीं होने से डीसीए घरेलू व बोर्ड के टूर्नामेंट के लिए रेलवे, टाटा व बीसीसीएल के मैदान पर निर्भर है।

नौकरी में स्पोर्ट्स कोटा भी खत्म : धनबाद में स्पोर्ट्स कोटा से नौकरी भी खत्म हो गई है। अभी केवल रेलवे में ही स्पोर्ट्स कोटा से नौकरी है, जबकि पहले बीसीसीएल व टाटा भी खिलाडिय़ों को स्पोर्ट्स कोटा से रखती थी। बीसीसीएल व टाटा खिलाडिय़ों की बहाली बंद कर चुकी है। इस दिशा में कभी राजनीतिक पहल नहीं हुई।

धनबाद में मैदान की स्थिति

- 34वें राष्ट्रीय खेल के समय बिरसा मुंडा पार्क व मैथन स्थित गोगना में बना स्पोर्ट्स हॉस्टल बेकार पड़े हैं।

- गोल्फ ग्राउंड के पास निर्मित स्क्वैश कोर्ट 34वें राष्ट्रीय खेल के बाद से बंद पड़ा है।

- ठाकुरकुल्ही में मेगा स्पोट्र्स कांप्लेक्स एक दशक से अधूरा पड़ा है।

- गोल्फ ग्राउंड में अधिकांश समय राजनीतिक, धार्मिक, सामाजिक व सरकारी कार्यक्रम होते हैं।

- इंडोर स्टेडियम शादी-ब्याह के लिए अधिकतर बुक रहता है।

- बिरसा मुंडा पार्क कैंपस में बना स्पोट्र्स हॉस्टल कभी खिलाडिय़ों के काम न आया। फिलहाल ईवीएम रखे हैं। होटल बनाने की है योजना।

धनबाद में फुटबाल का अच्छा मैदान नहीं है। मेगा स्पोट्र्स कांप्लेक्स एक दशक से अधूरा पड़ा है। रेलवे, बीसीसीएल व टाटा के मैदान पर टूर्नामेंट को निर्भर हैं।

-मो. फैयाज, महासचिव, जिला फुटबॉल संघ

इंडोर स्टेडियम बैडमिंटन के लिए बना था। यहां बैडमिंटन कम शादी- ब्याह अधिक होता है। टूर्नामेंट कराने के लिए हमें भी शुल्क देकर बुक कराना पड़ता है, जबकि पहले नहीं लगता था।

-सम्राट चौधरी, सचिव, जिला बैडमिंटन एसोसिएशन

मैदान की कमी से यहां खेल के बड़े आयोजन नहीं करा पाते हैं। बड़े आयोजन में खिलाडिय़ों को कहां ठहराएंगे सोचना पड़ता है जबकि बिरसा मुंडा पार्क व गोगना में बना स्पोट्र्स हॉस्टल बेकार पड़ा है।

-रंजीत केसरी, महासचिव, जिला ओलंपिक संघ

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Posted By: mritunjay

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