नई दिल्‍ली, प्रेट्र। 17 वीं लोकसभा चुनाव में कई प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ पिताओं के बेटे बुरी तरह से पराजित हुए हैं। ऐसे में नेताओं को विरासत में मिली राजनीतिक प्रगति अप्रभावी साबित हुई।

अमेठी में राजीव गांधी के बेटे राहुल गांधी पराजित हुए। वह स्‍मृति से 55 हजार वोटों से पराजित हुए। राजस्‍थान के मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत चुनाव हार गए। वह भाजपा के गजेंद्र शेखावत से ढाई लाख वोटों से हार गए। राजनीतिक राजवंशों की वर्तमान पीढ़ी स्पष्ट रूप से अपने पूर्ववर्तियों की सफलता को आगे नहीं ले पाई।

मध्‍य प्रदेश के गुना सीट से कांग्रेस के ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया पराजित हुए। वह पूर्व केंद्रीय मंत्री माधव राव सिंधिया के बेटे हैं। 1999 से यह सीट कांग्रेस के पास थी। राजस्‍थान के बाड़मेर में भाजपा के संस्‍थापक सदस्‍य जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह तीन लाख बीस हजार वोटों से पराजित हुए। मानवेंद्र इस बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे।

महाराष्‍ट्र में भी इसी प्रकार का रूझान देखने को मिला। अजित पवार के बेटे पार्थ, मुरली देवड़ा के बेटे मिलिंद देवड़ा और शंकर राव चह्वाण के बेटे अशोक चह्वाण मावल, मुंबर्इ दक्षिण और नांदेड़ में पराजित हुए। दक्षिण में कर्नाटक के मुख्‍यमंत्री एचडी कुमारस्‍वामी मांड्या से जेडीएस के टिकट पर चुनाव में पराजित हुए।

उसके विपरीत बेटियों ने लाज बचाई। महाराष्‍ट्र में एनसीपी नेता शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले बारामती सीट से विजयी रहीं। उन्‍होंने भाजपा के कंचन राहुल कूल को लगभग डेढ़ लाख वोटों से हराया। तमिलनाडु के पूर्व मुख्‍यमंत्री करुणानिधि की पुत्री कनिमोझी थूथुकुडी सीट पर करीब तीन लाख 47 हजार वोटों से विजयी रहीं।  

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Posted By: Arun Kumar Singh

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