कानपुर, जेएनएन। कानपुर लोकसभा सीट पर कांग्रेस, भाजपा और गठबंधन समेत कुल 14 प्रत्याशी भाग्य आजमा रहे हैं। इनके भाग्य का फैसला 16 लाख 31 हजार 249 मतदाता 29 अप्रैल सोमवार को करने जा रहे हैं। इनमें 8 लाख 92 हजार 283 पुरुष, 7 लाख 38 हजार 873 और 93 र्थड जेंडर मतदाता शामिल हैं। लोकसभा क्षेत्र में मतदान के लिए 1532 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। इस संसदीय क्षेत्र में सीसामऊ, आर्यनगर, कैंट, गोविंद नगर और किदवई नगर विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। इनमें गोविंद नगर में एक लाख 62 हजार 669 वोटर, सीसामऊ में एक लाख 26 हजार 275, आर्य नगर में एक लाख 29 हजार 628, किदवई नगर में एक लाख 65 हजार 345 वोटर शामिल हैं। कानपुर सीट पर कांग्रेस से पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल, भाजपा से सत्यदेव पचौरी, सपा-बसपा गठबंधन से रामकुमार चुनाव मैदान में हैं, जिनके बीच दिलचस्प मुकाबला होने की उम्मीद है। 

कांग्रेस प्रत्याशी श्रीप्रकाश जायसवाल

कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में शुमार पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल 1989 में महापौर बने। इसके बाद 1999 में कांग्रेस ने कानपुर लोकसभा सीट का टिकट दिया तो उनकी किस्मत के द्वार खुल गए। वह 1999, 2004 और 2009 का चुनाव लगातार जीते। मनमोहन सिंह सरकार में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और कोयला मंत्री के पद पर रह चुके हैं।

भाजपा प्रत्याशी सत्यदेव पचौरी

भाजपा से प्रत्याशी सत्यदेव पचौरी पार्टी के पुराने सक्रिय नेता हैं। शहर की आर्यनगर विधानसभा सीट से विधायक रह चुके हैं। वर्ष 2004 में कानपुर संसदीय सीट से भी चुनाव लड़ा था और कांग्रेस प्रत्याशी श्रीप्रकाश जायसवाल से काफी कम अंतर से हार गए थे। इसके बाद 2017 में गोविंदनगर विधानसभा सीट से भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। प्रदेश सरकार में वह एमएसएमई मंत्री हैं। उनपर भरोसा जताते हुए भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने अब लोकसभा सीट पर मैदान में उतारा है।

गठबंधन प्रत्याशी रामकुमार

रामकुमार एडवोकेट गठबंधन के सपा प्रत्याशी हैं। वह 1977 में भारतीय लोकदल से कानपुर संसदीय सीट से सांसद चुने गए मनोहर लाल के पुत्र हैं। छोटे भाई दीपक कुमार 1999 में उन्नाव से सांसद बने। उन्नाव सदर सीट रिक्त होने पर उपचुनाव में सपा की टिकट पर लड़े रामकुमार ने जीत हासिल की। वह अखिल भारतीय लोधी निषाद बिंद कश्यप एकता समता महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। जाजमऊ के वाजिदपुर में रहने वाले रामकुमार की पुरानी राजनीतिक विरासत कानपुर रही है। वर्ष 1952 में पिता नगर पालिका के सभासद हुए थे। इसके बाद वर्ष 1959, 1962, 1967 और 1969 में पिता चुनाव लड़े और परिवहन, श्रम और न्याय मंत्री भी रहे।

Posted By: Abhishek