प्रयागराज : बात करीब दो दशक पुरानी है। जिला प्रशासन ने लगभग 100 मीटर के दायरे में दो चुनावी सभाओं की अनुमति देकर प्रत्याशियों संग अपने लिए भी आफत मोल ले ली थी। पहले कौन प्रत्याशी सभा को संबोधित करेगा, इस पर उम्मीदवार और कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। विवाद को निपटाने के लिए प्रशासन ने टॉस कराया। इसमें सपा प्रत्याशी श्यामाचरण गुप्ता जीत गए लेकिन चुनाव के नतीजे उनके हक में नहीं रहा। वह अपने प्रतिद्वंद्वी भाजपा के डॉ. मुरली मनोहर जोशी से हार गए।

1998 में श्यामाचरण की टक्कर मुरली मनोहर जोशी से थी

श्यामाचरण गुप्ता 1991 में भाजपा से चुनाव लड़े थे लेकिन हार गए थे। बाद में वह सपा में आ गए। 1998 में सपा ने इलाहाबाद संसदीय सीट से श्यामाचरण चरण गुप्ता को अपना प्रत्याशी बनाया। डॉ. मुरली मनोहर जोशी उनके मुकाबले में भाजपा से थे। प्रचार चरम पर था। दोनों प्रत्याशियों ने एक ही दिन आसपास आमसभा की अनुमति ले ली थी। सपा ने एजी ऑफिस और शिक्षा निदेशालय तथा भाजपा ने गवर्नमेंट प्रेस गेट पर सभाओं की स्वीकृति ले ली थी। अनुमति एडीएम सिटी ने दी थी। दोपहर एक से तीन बजे के बीच सभा प्रस्तावित थी। दोनों कार्यालयों के गेटों पर 10-10 माइक लगे। सपा की आमसभा में मुख्य वक्ता महाराष्ट्र संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी की नेता मृणाल गोरे थीं। डॉ. जोशी भी अपने मंच पर आ गए थे।

सपा और भाजपा समर्थकों में नारेबाजी शुरू हो गई

दोनों तरफ जबर्दस्त नारेबाजी शुरू हो गई। शोर ऐसा कि कोई किसी की बात सुन नहीं पा रहा था। समर्थकों में धक्का-मुक्की शुरू हो गई। दोनों प्रत्याशी पहले अपनी बात कहना चाहते थे। कोई पीछे हटने को तैयार नहीं था। इस पर तत्कालीन एडीएम सिटी, एसपी सिटी के साथ पहुंचे। उन्होंने दोनों प्रत्याशियों से बात की कि दोनों नेता एक-एक घंटे भाषण कर लें।

पहले बोलने को लेकर अड़े दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता

कौन पहले बोलेगा इसे लेकर बात फंस गई। एडीएम सिटी ने हेड-टेल (टॉस) का प्रस्ताव रखा। टॉस में श्यामाचरण जीत गए। एडीएम सिटी ने एक से दो बजे तक उन्हें और दो से तीन तक डॉ. जोशी को बोलने की अनुमति दी।

इसलिए पड़ा मृणाल का नाम पानी वाली बाई

महाराष्ट्र के गोरे गांव में पानी की बहुत किल्लत थी। 24 घंटे में सिर्फ चार घंटे सुबह दो और शाम को दो घंटे पानी लोगों को मिल पा रहा था। गोरे गांव जिला की रहने वाली मृणाल गोरे ने 500 महिलाओं को लेकर इसके लिए आंदोलन छेड़ दिया। पुलिस ने उन्हें जिला जेल में  बंद कर दिया। इस आंदोलन के बाद पूरे देश के सपा नेता उन्हें पानी वाली बाई पुकारने लगे थे।

मृणाल गोरे बोलीं, मैं भाजपा का विरोध करने आई हूं

वरिष्ठ कर्मचारी नेता कृपाशंकर श्रीवास्तव बताते हैं कि मृणाल गोरे ने संबोधन की शुरुआत यह कहते हुए की कि- मैं महाराष्ट्र से चलकर भाजपा का विरोध करने के लिए इसलिए आई हूं, क्योंकि यह सांप्रदायिक पार्टी है। समाजवादी विचारधारा वाली पार्टी, जिसका चुनाव चिह्न साइकिल है और जिसके प्रत्याशी श्यामाचरण यहां मंच पर मौजूद हैं। इनके पक्ष में इलाहाबाद (अब प्रयागराज) के मजदूर कर्मचारियों, रिक्शे और ठेले वालों से अपील कर रही हूं। आप लोग सांप्रदायिक ताकतों को रोकने के लिए संगम नगरी से श्यामाचरण को जिताकर लोकसभा भेजें। वैसे इस चुनाव में जीत डा. मुरली मनोहर जोशी की हुई। उन्हें दो लाख 65 हजार 232 मत मिले थे। श्यामाचरण को दो लाख 21 हजार 948 वोट मिले थे।

Posted By: Brijesh Srivastava

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