पानीपत/कैथल, [पंकज आत्रेय]। शिरोमणि अकाली दल (बादल) के प्रदेशाध्यक्ष शरणजीत सिंह सौथा ने कहा कि हरियाणा में भाजपा के साथ गठबंधन की सरकार बनते ही एसवाइएल की लड़ाई लड़ी जाएगी। यहां किसानों के हक के लिए कानूनी लड़ाई लडऩे से भी अकाली दल पीछे नहीं हटेगा। सौथा भाजपा-शिअद गठबंधन के संदर्भ में बातचीत कर रहे थे।

पंजाब में एसवाइएल का पानी देने के विरोध के सवाल पर सौथा ने कहा कि स्टेट के अपने मसले होते हैं। हम हरियाणा के वासी हैं तो विधानसभा में भाजपा के साथ सरकार बनते ही यह मुद्दा उठाया जाएगा। फिलहाल लोकसभा में शिअद ने भाजपा को बिना शर्त समर्थन दिया है, लेकिन विधानसभा में 15 सीटों पर अकाली उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे। उनके साथ करतार कौर, तेजेंद्रपाल सिंह ढिल्लों, प्रीतिपाल सिंह, बलदेव सिंह कैमपुर भी थे।

गठबंधन में देरी हुई
बता दें कि शिरोमणि अकाली दल कुछ दिन पहले तक प्रदेश की सभी 10 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़ा करने के दावे कर रहा था। मार्च में पिपली और पिहोवा में सुखबीर बादल ने रैलियां भी कीं। प्रदेश प्रवक्ता कंवलजीत सिंह अजराना ने कहा कि गठबंधन सिरे चढऩे में देरी हुई है। अकाली दल ने चार सीटों पर तो अपने उम्मीदवारों के नाम भी तय कर लिए थे। पार्टी हाईकमान की भाजपा से बात होने के बाद ही सब फाइनल हुआ है।

55 साल निभाया चौटाला से रिश्ता
इनेलो से रिश्ता खत्म करने पर राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुखबीर सिंह मांडी ने कहा कि 55 साल तक चौटाला से संबंध निभाया है। उन्होंने ही नाता तोड़ा। वे पीछे हट गए। वैसे भी उन्होंने सरकार में रहते हुए प्रदेश के किसानों के लिए कुछ नहीं किया। एसवाइएल पर भी उन्होंने कोई काम नहीं किया। मांडी ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल की सबसे बड़ी दुश्मन कांग्रेस है। इसे हराने के लिए भाजपा से समझौता किया है। वैसे भी पंजाब, दिल्ली, उत्तराखंड में यह समझौता चल रहा है। जहां भी अकालियों का भाजपा से गठबंधन है, वहां तरक्की हुई है। कांग्रेस के बाद देश की सबसे पुरानी पार्टी शिरोमणि अकाली दल है और सबसे बड़ी सेकुलर भी। लोकसभा चुनाव में देश की 60 सीटों पर सिख निर्णायक भूमिका में हैं।

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Posted By: Anurag Shukla

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