नई दिल्ली, एजेंसी। मध्यप्रदेश की चुनावी जंग में बेहद ही दिलचस्प और नया मोड़ आया है। साध्वी प्रज्ञा भाजपा में शामिल हो गई हैं और पार्टी ने उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह के खिलाफ भोपाल सीट से चुनावी मैदान में उतारा है। इसी बीच दिग्विजय सिंह ने भी साध्वी प्रज्ञा के लिए एक संदेश शेयर किया  है। दिग्विजय सिंह ने ट्वीट कर लिखा कि मैं साध्वी प्रज्ञा जी का भोपाल में स्वागत करता हूं। आशा करता हूं कि इस रमणीय शहर का शांत, शिक्षित और सभ्य वातावरण साध्वी जी को पसंद आएगा। मैं मां नर्मदा से साध्वी जी के लिए प्रार्थना करता हूँ और नर्मदा जी से आशीर्वाद माँगता हूँ कि हम सब सत्य, अहिंसा और धर्म की राह पर चल सकें। नर्मदे हर!

बता दें कि पार्टी ने बुधवार को मध्यप्रदेश से चार उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की है पार्टी ने भोपाल सीट से साध्वी प्रज्ञा, गुना सीट से के पी यादव, सागर से राज बहादुर सिंह, विदिशा से श्री रमाकांत भार्गव को टिकट दिया है। साध्वी प्रज्ञा ने टिकट मिलने के बाद कहा कि हम तैयार हैं और अब उसी कार्य में लग गई हूं।

गौरतलब है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता शिवराज सिंह चौहान, राम लाल और प्रभात झा से मुलाकात करने के बाद साध्वी प्रज्ञा भाजपा में शामिल हो गई हैं। पार्टी में शामिल होने के बाद साध्वी प्रज्ञा ने कहा कि मैं आधिकारिक तौर पर भाजपा में शामिल हो गई हूं। साथ ही उन्होंने कहा कि मैं चुनाव लडूंगी भी और जीतूंगा भी। बता दें कि भोपाल लोकसभा सीट पर 12 मई को मतदान किया जाएगा।

भोपाल सीट को भाजपा का गढ़ माना जाता है। 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार आलोक सांजर ने 7.14 लाख वोट अपने नाम किए थे। जबकि कांग्रेस प्रत्याशी पी.सी. शर्मा को महज 3.43 लाख वोट ही मिले थे। इस बार कांग्रेस ने इस सीट से पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह को चुनावी मैदान में उतरा है।

जानकारी के लिए बता दें कि साध्वी प्रज्ञा मालेगांव ब्लास्ट के बाद से चर्चा में आईं थी। दरअसल, 29 सितंबर, 2008 को मालेगांव में एक मस्जिद के बाहर एक मोटर साइकिल में धमाका हुआ। इसमें छह लोगों की मौत हुई थी और 100 घायल हुए थे।

जोशी हत्याकांड में बरी
साध्वी प्रज्ञा भारती 2007 के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रचारक सुनील जोशी हत्याकांड में भी आरोपित थीं। हालांकि, कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया। इतिहास में स्नातकोत्तर उपाधि लेने के साथ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) में भी प्रज्ञा सक्रिय सदस्य रह चुकी हैं। उनका रुझान शुरू से ही राष्ट्रवादी संगठनों की तरफ रहा।

एक नजर में साध्वी का सफर
-मध्य प्रदेश के भिंड जिले कछवाहा गांव में जन्मी साध्वी प्रज्ञा के पिता आरएसएस के स्वयंसेवक व आयुर्वेदिक चिकित्सक थे।
-48 वर्षीय साध्वी आरएसएस व एबीवीपी की सक्रिय सदस्य रही हैं। विश्व हिंदू परिषद की महिला विंग दुर्गा वाहिनी से भी जुड़ी रही।
-2002 में 'जय वंदे मातरम जन कल्याण समिति' का गठन किया। स्वामी अवधेशानंद से प्रभावित होकर संन्यास लिया।
-मालेगांव ब्लास्ट में नाम आने से उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई। कोर्ट ने उन पर लगे मकोका एक्ट को कुछ समय बाद हटा लिया था। उन पर गैर-कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला चला।
-2017 में उनको बड़ी राहत तब मिली, जब देवास कोर्ट ने आरएसएस प्रचारक सुनील जोशी हत्याकांड से उन्हें बरी कर दिया।
-साध्वी को प्रयागराज कुभ के दौरान 'भारत भक्ति अखाड़े' का आचार्य महामंडलेश्वर घोषित किया गया था। प्रज्ञा ठाकुर अब आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी पूर्णचेतनानंद गिरि के नाम से जानी जाती हैं।

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Posted By: Atyagi.jimmc