नई दिल्ली (जेएनएम)। लोकसभा चुनाव के पहले चरण में उत्तर प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र में वोट डाले जाएंगे। जाट, जाटव और मुस्लिम बहुल इस इलाके में सपा-बसपा और रालोद का गठबंधन चुनावी मैदान में बीजेपी को चैलेंज कर रहा है। बागपत से चौधरी चरण सिंह के पोते जयंत चौधरी ने गठबंधन के सवाल पर जागरण डॉट कॉम से बातचीत में कहा कि मजबूरियों से समझौते नहीं होते, समझौते तब होते हैं, जब आप दिल में जगह बनाएं। तीनों पार्टी के कार्यकर्ताओं की ये डिमांड थी, तो ऐसा नहीं है कि गठबंधन के बारे में फैसला तीनों पार्टियों के नेतृत्व ने लिया हो।

जयंत चौधरी ने कहा कि जमीनी कार्यकर्ताओं से हमें फीडबैक मिल रहा था कि तीनों पार्टियों को साथ मिलकर काम करना चाहिए। तीनों पार्टियों का वोटबैंक और उनके कार्यकर्ता मुख्यधारा में नहीं आते हैं। लोगों को मानना था कि अगर सपा-बसपा और रालोद एक साथ मिलकर काम करते हैं, तो कामयाबी मिलेगी।

सपा-बसपा और रालोद के नेताओं के बीच तालमेल के बारे में जयंत चौधरी ने कहा कि यूपी में चार उपचुनाव हुए हैं और तीनों उपचुनावों के नतीजे देख लीजिए। यही सवाल उस समय भी किए जा रहे थे कि ये जल्दबाजी का फैसला है, एक दूसरे के वोट पार्टियों को ट्रांसफर नहीं होंगे, जहां तक जाति की बात है, तो देश के प्रधानमंत्री खुद को पिछड़ी जाति का बताते हैं। हमारी पार्टी ने कभी भी किसी जाति विशेष को लेकर कोई संगठन नहीं बनाया।

लोकसभा चुनाव और उपचुनाव नतीजों की तुलना के सवाल पर आरएलडी नेता ने कहा कि बहुत कम समय में तीनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने ये दिखा दिया कि हम साथ मिलकर लड़ें तो कोई भी चुनाव हो, कोई फर्क नहीं पड़ता। तीनों पार्टियों के नेताओं के बीच पूर्व में रहे मतभेद पर जयंत ने कहा कि राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं होता, हम पर जो लोग आरोप लगा रहे हैं, वो खुद 30 से ज्यादा पार्टियों के सहारे चल रहे हैं। राजनीति में कुछ भी पत्थर की लकीर नहीं होता है, जब तक पार्टियां अपनी विचारधारा को लेकर अडिग हैं, राजनीति में समझौते होते हैं, हमने यूपी विधानसभा चुनावों में भी कोशिश की थी, लेकिन कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का गठबंधन हुआ।

चौधरी अजित सिंह के मुजफ्फरनगर से चुनाव लड़ने के सवाल पर जयंत चौधरी ने कहा कि चौधरी चरण सिंह भी मुजफ्फरनगर से चुनाव लड़े थे और वहां बड़ी संख्या में किसान हैं, और उनकी उम्मीद थी, 2013 में मुजफ्फरनगर में जो कुछ हुआ, उसका हमें दुख है। अगर आज चौधरी अजित सिंह वहां से चुनाव लड़ते हैं, और उनके समर्थन में हिंदू-मुस्लिम एक साथ आते हैं, तो ये एक बहुत अच्छी पहल है। हम जोड़ने की बात करते हैं, हम पाकिस्तान, पलायन और बांग्लादेश की बात नहीं करते। हम इस देश के मुसलमानों के साथ प्रॉक्सी वॉर नहीं लड़ रहे हैं।

बागपत से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि किसानों के भुगतान की समस्या बहुत बड़ी है, बीजेपी ने जो वादे किए थे, उसे पूरा नहीं किया। 14 दिन के भीतर भुगतान की बात कही गई थी, लेकिन आज मलकपुर मिल का बकाया सबसे ज्यादा है। यमुना एक्सप्रेस्वे की तरह हाइवे बनाने की बात कही गई थी, लेकिन क्या हुआ? जयंत चौधरी ने ये भी सवाल उठाया कि केंद्र सरकार ने विदेश से चीनी क्यों आयात की? उन्होंने कहा कि अपने अनुभवों और बीजेपी की वादाखिलाफी से आहत होकर किसान आज महागठबंधन के साथ खड़ा है।

चौधरी अजित सिंह की ओर से क्षेत्र के विकास के लिए किए गए कामों के बारे में जयंत चौधरी ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इंडस्ट्रियलाइजेशन का जो वेब आया है, ये चौधरी अजित सिंह की वजह से संभव हुआ। बतौर केंद्रीय मंत्री उन्होंने ही मिल लगाने के लिए 40 किमी की दूरी के मानक को कम करके 25 किमी किया। उन्होंने कहा कि चौधरी अजित सिंह ने किसानों के लिए बड़े काम किए हैं और मुझे गिनाने की जरूरत नहीं है।

बालाकोट स्ट्राइक से क्या चुनावी माहौल बदलेगा? इस पर रालोद नेता ने कहा कि हम किसी चीज पर शक नहीं कर रहे हैं, इन विषयों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, लेकिन सवाल ये है कि ये हमले हुए क्यों? कश्मीर घाटी में आतंकियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और हमारे जवान आतंकियों की साजिश का शिकार हो रहे हैं, तो इसकी जवाबदेही भी सरकार की बनती है, आज देश सुरक्षित नहीं है, इसे सुरक्षित नहीं मानेंगे। बस इतना हो रहा कि ढ़िढोरा अच्छी तरह पीट लो, हमारे जवान पहले भी मुंहतोड़ जवाब देते थे, लेकिन जिस तरह से जवानों के काम को राजनीतिक रूप से भुनाया जा रहा है, वो सही नहीं है, लोग उसे भी देख रहे हैं। 

Posted By: Nitesh

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