नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव 2019 के लिए पार्टी की तैयारियों को रफ्तार देते हुए सभी राज्य इकाइयों को संगठन को तत्काल पूरी तरह दुरुस्त करने का निर्देश दिया है। साथ ही कुछ राज्यों में नये अध्यक्षों की नियुक्ति कर अपने स्तर पर भी राहुल ने सूबे के संगठनों को नये तेवर और कलेवर देने की शुरुआत कर दी है। दिल्ली में शीला दीक्षित को तो हिमाचल प्रदेश में कुलदीप राठौर को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की कमान तो छत्तीसगढ में सीएम भूपेश बघेल को प्रदेश चुनाव अभियान समिति की जिम्मेदारी सौंपकर राहुल ने चुनावी तैयारी में अब देर नहीं करने का संकेत दे दिए हैं।

लोकसभा चुनाव की तैयारियों के लिए राज्यों इकाइयों की अब तक की रूपरेखा की समीक्षा के लिए राहुल गांधी ने सभी प्रदेशों के कांग्रेस अध्यक्षों की गुरूवार को बैठक बुलाई थी। दुबई की अपनी आधिकारिक यात्रा पर रवाना होने से एक दिन पहले राहुल ने प्रदेश अध्यक्षों से साफ कहा कि सूबे के ब्लाक स्तर के संगठन तक का ढांचा अगले एक हफ्ते तक पूरी तरह गठित हो जाना चाहिए। मोदी सरकार के 2014 के चुनावी वादों के पूरे नहीं होने की पूरी फेहरिस्त गिनाते हुए कांग्रेस नेतृत्व ने सूबे की इकाइयों से साफ कहा है कि भाजपा की नाकामियों को गांव-गांव तक ले जाने के लिए संगठन को पूरी तरह सक्रिय करना होगा।

सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष ने राज्यों के प्रमुखों को केवल यही टास्क नहीं दिया बल्कि ब्लॉक स्तर तक के पार्टी के तय कार्यक्रमों और आंदोलनों की पूरी रपट भी लगातार हाईकमान को देते रहने के निर्देश दिए हैं। कांग्रेस का साफ मानना है कि किसानों की बदहाली और कर्ज माफी को जिस तरह राहुल गांधी ने भाजपा सरकार के लिए बड़ी सियासी चुनौती बना दी है उसका दबाव बनाए रखने की जिम्मेदारी राज्यों इकाइयों पर है। ताकि किसानों की कर्ज माफी पर राहुल का रुख और कांग्रेस के चुनावी वादे में इसे अहम रहने को गांव-गांव तक पहुंचाया जा सके।

इसी रणनीति के तहत कांग्रेस नेतृत्व ने सभी राज्य इकाइयों को निर्देश दिए हैं वे ब्लाक स्तर पर किसान कर्ज माफी, एमएसपी बढ़ाने और खरीद प्रक्रिया की खामियों जैसे मसले को लेकर विरोध प्रदर्शन कार्यक्रम करें। सूत्रों ने बताया कि इस बैठक में हाईकमान ने सूबे के नेताओं से सवर्णों को 10 फीसद आरक्षण देने के सरकार के फैसले को लेकर भी विचार मंथन किया। इसमें यह राय बनी कि कांग्रेस ने पूरी तरह आरक्षण के इस बिल का समर्थन किया है। इसीलिए सभी राज्यों के नेताओं की जिम्मेदारी है कि वे सुनिश्चित करें कि भाजपा अकेले इसका श्रेय न बटोर सके क्योंकि कांग्रेस के समर्थन के बिना राज्यसभा में आरक्षण बिल पारित नहीं हो सकता था।

Posted By: Manish Negi