मनीष गोधा, जयपुर। राजस्थान में लोकसभा चुनाव में भाजपा की एकतरफा जीत के बाद अब यहां की भाजपा प्रदेश इकाई में जहां पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की भूमिका सीमित होने की बात कही जा रही है, वहीं केंद्रीय राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, राज्यवर्धन सिंह राठौड़ व अर्जुनराम मेघवाल और नवनिर्वाचित सांसद दीया कुमारी जैसे नेताओं का कद बढ़ने और उन्हें अहम जिम्मेदारियां दिए जाने की बात सामने आ रही है।

राजस्थान में भाजपा ने एक बार फिर सभी 25 सीटों (एक सीट पर सहयोगी दल के साथ) पर जीत हासिल की है। पिछले लोकसभा चुनाव में जब भाजपा ने सभी सीटें जीती थी तो इसका पूरा श्रेय पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को मिला था, क्योंकि उस समय प्रदेश में भाजपा की सरकार थी और चुनाव की कमान राजे के हाथ में थी। इस बार तस्वीर जरा अलग रही है।

हाल में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी यहां चुनाव हार गई और लोकसभा चुनाव परिणाम में हुई एकतरफा जीत ने यह साबित कर दिया कि उस समय जनता ने राजस्थान की तत्कालीन भाजपा सरकार के खिलाफ वोट दिया था। लोगों की नाराजगी पार्टी से नहीं थी, बल्कि तत्कालीन राज्य सरकार से थी। यही कारण है कि इस बार की जीत का श्रेय वसुंधरा राजे और यहां की प्रदेश इकाई के खाते में जाता नहीं दिख रहा है।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस लोकसभा चुनाव में कुछ ऐसी बातें हुई हैं जो यह बता रही हैं कि पार्टी अब वसुंधरा राजे की भूमिका प्रदेश में सीमित कर रही है। पार्टी ने उनके विरोधी माने जाने वाले हनुमान बेनीवाल से गठबंधन किया और उन्हें एक सीट पर चुनाव लड़वाया। इसी तरह पूर्व विधायक दीया कुमारी को राजसमंद से टिकट दिया और दौसा में भी राजे की इच्छा के खिलाफ जसकौर मीणा को टिकट दिया गया।

इसके अलावा भाजपा सरकार के लिए हमेशा मुश्किल खड़ी करने वाले गुर्जर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला को पार्टी में शामिल किया गया और राजे के नजदीकी रहे केंद्रीय मंत्री सीआर चौधरी का टिकट काट दिया। अब चुनाव परिणाम चूंकि पूरी तरह पार्टी के पक्ष में आए हैं, इसलिए पार्टी आलाकमान के सभी निर्णय सही साबित हो गए हैं। गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद राजे को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर केंद्र में बुलाए जाने के स्पष्ट संकेत भी दे दिए गए थे और अब इस बात की पूरी संभावना है कि उन्हें केंद्र में कोई भूमिका दी जाए।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस जीत के बाद राज्य में अब पार्टी में नए चेहरों को आगे बढ़ाया जाना तय है। इनमें प्रमुख तौर पर केंद्रीय राज्यमंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, राजसमंद से सांसद बनीं दीया कुमारी, केंद्रीय राज्यमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़, केंद्रीय राज्यमंत्री अर्जुनराम मेघवाल और कोटा से दोबारा सांसद बने ओम बिड़ला का नाम प्रमुख तौर पर सामने आ रहा है। इनमें से गजेंद्रसिंह शेखावत प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए आलाकमान की पसंद के रूप में सामने आ चुके हैं।

मेघवाल का नाम भी इस पद के लिए सामने आ चुका है। पार्टी सूत्रों की मानें तो इन पांच नामों में से तीन का केंद्र में मंत्री बनना तय है। बाकी दो को राज्य में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। इनमें भी गजेंद्र सिंह को कुछ बड़ा इनाम मिलना तय माना जा रहा है, क्‍योंकि जोधपुर में राजस्थान का सबसे बड़ा मुकाबला था और उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव को इसमें पराजित कर दिया।

गौरतलब है कि प्रदेश में अब दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव, नवंबर में नगरीय निकाय चुनाव और जनवरी में पंचायत चुनाव हैं और भाजपा लोकसभा चुनाव में मिली इस बढ़त को कायम रखना चाहेगी, ऐसे में हो सकता है कि प्रदेश इकाई में जल्दी ही बड़े बदलाव हो जाएं।  

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Posted By: Arun Kumar Singh