देहरादून, विकास धूलिया। बतौर कांग्रेस अध्यक्ष चुनावी महासमर का शंखनाद करने देहरादून पहुंच रहे राहुल गांधी के निशाने पर मुख्यतया केंद्र की मोदी सरकार का कामकाज ही रहेगा। प्रदेश नेतृत्व द्वारा सुझाए गए मुद्दों पर उत्तराखंड की भाजपा सरकार को भी कांग्रेस अध्यक्ष कठघरे में खड़ा करेंगे। माना जा रहा है कि सैन्य बहुल उत्तराखंड में कांग्रेस अध्यक्ष पाक के बालाकोट में एयर स्ट्राइक के मुद्दे से परहेज कर सकते हैं। इसकी बजाए कांग्रेस ने उन्हें पुलवामा आतंकी हमले और इसके बाद शहीद हुए अधिकारियों के परिजनों से मिलवाने का कार्यक्रम तय किया है।

केंद्र सरकार और मोदी होंगे निशाने पर

राहुल गांधी शनिवार को देहरादून आ रहे हैं। हालांकि उनका कार्यक्रम लोकसभा चुनावों की घोषणा से पहले ही तय हो गया था लेकिन अब बदली परिस्थितियों में इसकी अहमियत और ज्यादा बढ़ गई है। राहुल देहरादून में जनसभा को संबोधित करेंगे। तय है कि पार्टी के लिए लोकसभा चुनाव अभियान का श्रीगणेश करते हुए राहुल के तेवर भाजपा और प्रधानमंत्री के प्रति तीखे रहेंगे। भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र की जन कल्याणकारी योजनाओं को केंद्र में रखकर ही चुनावी महासमर में उतरी है, तो लाजिमी है कि कांग्रेस अध्यक्ष के निशाने पर भी यही दोनों रहेंगे।

राफेल और भ्रष्टाचार होंगे मुख्य मुद्दे 

राहुल के तरकश में जो चुनावी तीर रहेंगे उनमें राफेल खरीद और भ्रष्टाचार मुख्य हो सकते हैं। दरअसल, प्रदेश कांग्रेस इन दिनों राहुल गांधी की जनसभा के लिए उन मुद्दों की फेहरिस्त तैयार कर रही है, जो उत्तराखंड में प्रभावी साबित हो सकते हैं। उत्तराखंड सैन्य बहुल प्रदेश है। इस नाते हर परिवार की भावनाएं सेना से जुड़ी हुई हैं। कांग्रेस अध्यक्ष इस नजरिए से राफेल खरीद को उत्तराखंड में चुनावी अस्त्र के रूप में आजमा सकते हैं। इसके अलावा भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की केंद्र व प्रदेश सरकार की नीति को लेकर भी राहुल हमलावर हो सकते हैं। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि केंद्र व प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार के मामलों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए।

लोकपाल और किसान भी सियासी अस्त्र

इसी कड़ी में केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त कानून लागू न होने को कांग्रेस उत्तराखंड में भाजपा के खिलाफ इस्तेमाल कर सकती है। इसके अलावा किसानों की कर्जमाफी और उनसे जुड़ी योजनाओं पर कांग्रेस अध्यक्ष भाजपा को घेरने की कोशिश कर सकते हैं। केंद्र की महत्वाकांक्षी उज्ज्वला योजना राहुल के निशाने पर रह सकती है। प्रदेश में भाजपा सरकार आगामी 18 मार्च को दो साल का कार्यकाल पूरा कर रही है तो काफी संभावना है कि राहुल गांधी इस पर भी अपने तल्ख तेवर प्रदर्शित करें।

एयर स्ट्राइक पर कर सकते हैं परहेज 

सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान के बालाकोट में भारतीय वायु सेना की एयर स्ट्राइक पर कांग्रेस अध्यक्ष देहरादून में कुछ भी कहने से परहेज कर सकते हैं। यह इसलिए, क्योंकि पुलवामा हमले और इसके बाद उत्तराखंड ने चार शहादत देखी हैं। इन शहीदों में से तीन, मेजर चित्रेश बिष्ट, मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल और सीआरपीएफ के सब इंस्पेक्टर मोहनलाल रतूड़ी देहरादून के ही निवासी थे। इतनी शहादतों के बाद पाक में एयर स्ट्राइक से उत्तराखंड में उत्साह का माहौल दिखा। अगर कांग्रेस की तरफ से इसे सियासी मुद्दे के रूप में इस्तेमाल किया गया तो इसका विपरीत असर भी हो सकता है। इसकी बजाए कांग्रेस ने इन तीनों शहीदों के परिजनों से राहुल गांधी की मुलाकात का कार्यक्रम रखा है।

कांग्रेस के पास खोने को कुछ भी नहीं

दरअसल, कांग्रेस के पास लोकसभा चुनाव में खोने को कुछ भी नहीं है। राज्य की पांचों सीटों पर भाजपा काबिज है। दो साल पहले हुए विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस को भाजपा के हाथों करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी। 70 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा अकेले 57 सीटें ले आई तो कांग्रेस को 11 पर सिमटना पड़ा। अब अगर लोकसभा चुनाव में कांग्रेस अपनी प्रतिद्वंद्वी भाजपा से एक भी सीट झटक लेती है तो यह उसके लिए बड़ी उपलब्धि से कम नहीं होगा। यही वजह है कि कांग्रेस और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के तेवर लोकसभा चुनावों में पूरी तरह तीखे और हमलावर रहने तय हैं।

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Posted By: Sunil Negi

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