दिनेश सिंह, वाराणसी। महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय की नींव न केवल शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए बल्कि राजनीति की नर्सरी के रूप में भी रखी। इसी नर्सरी ने कई समाजवादी नेता दिए। भले बाद में कुछ ने समाजवादी खेमे को छोड़ कर कांग्रेस व भाजपा या अन्य दलों का दामन थाम लिया। इन नेताओं ने पूरे देश से विधायक, सांसद ही नहीं मंत्री तक बने। वर्तमान केंद्र सरकार में तो कई मंत्री और सांसद बीएचयू से ही हैं।

बीएचयू के कुलपति रहे भारत रत्न सर्वपल्ली राधाकृष्णन को जवाहर लाल नेहरू राजनीति में लाए। इसके बाद उन्होंने उपराष्ट्रपति व राष्ट्रपति तक का सफर पूरा किया। इसके साथ ही अफसोस इस बात है कि पिछले दो दशक से महामना की यह बगिया से कोई ऐसा शख्स नहीं निकला जो राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक परिदृश्य पर अपनी छाप छोड़ी हो। इसके उलट पिछले कुछ वर्षो से तो यहां अराजकता की स्थिति बनी हुई है। बार-बार विश्वविद्दालय बवाल से कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ जाती है। फिर भी बीएचयू का नाम आते ही उसके नेताओं की उपलब्धियां जेहन में कौंध जाती हैं। 

 

उच्च शिक्षा की खुराक लेकर यहां की राजनीति से निकले नेताओं की पौध ने राजनीति को एक मुकाम प्रदान किया। उन्होंने न केवल अपनी नेतृत्व क्षमता बल्कि बुद्धिमता से शासन को मजबूत किया। स्वच्छ राजनीति के लिए पहचाने जाने वाले कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री रामकृष्ण हेगड़े सहित बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री भोला पासवान शास्त्री भी सर्वविद्दा की राजधानी से ही पढ़े-लिखे थे। बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार के शैक्षणिक सफर का भी एक पड़ाव यही विश्वविद्दालय रहा है। एशिया के सबसे बड़े विश्वविद्दालय बीएचयू की राजनीतिक उर्वरा शक्ति काफी प्रचुर साबित हुई है।

भले ही फिलहाल बीएचयू की ‘नर्सरी’ (छात्रसंघ) दो दशक से मृतप्राय हो लेकिन अब तक इसने लगभग दस सांसद, डेढ़ दर्जन से अधिक विधायकों व एमएलसी के साथ ही लोहिया, अशोक सिंहल और गोविंदाचार्य जैसी चर्चित हस्तियों को तैयार किया है। अंग्रेजी हटाओ आंदोलन से चर्चा में आये देवव्रत मजुमदार भी बीएचयू छात्रसंघ के अध्यक्ष थे। किसी जमाने में उनके स्टेटमेंट का प्रसारण सीधे बीबीसी से हुआ करता था।

बहरहाल बीएचयू में छात्र राजनीति करने वाले डॉ. बलिराम (लालगंज), बरखूराम वर्मा (विधानसभा अध्यक्ष) डॉ. राजेश मिश्र (वाराणसी), वीरेंद्र सिंह मस्त (बलिया), लालमुनि चौबे (बक्सर बिहार), मनोज सिन्हा (गाजीपुर), हरिकेश बहादुर सिंह (महाराजगंज), भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय गोयल, मनोज तिवारी, भरत सिंह आदि सांसद बने हैं।

विधायक ओमप्रकाश सिंह (गाजीपुर, दिलदारनगर), बलिया के विधायक इकबाल सिंह, चकिया के स्व. सत्यप्रकाश सोनकर, मंत्री शाकिर अली, यशवंत सिंह (चिरैयाकोट), महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री चंद्रकांत त्रिपाठी, कैलाश टंडन, यदुनाथ सिंह (राजगढ़), सुरजीत सिंह डंग (मीरजापुर), शतरूद्र प्रकाश, भाजपा सरकार में शिक्षामंत्री ओमप्रकाश सिंह, ज्योत्सना श्रीवास्तव, पूर्व मंत्री कैलाश यादव, मोहन प्रकाश (राजस्थान) आदि विधायक यहीं से पढ़े हैं।

एमएलसी रह चुकी वीणा पाण्डेय उनके पति प्रो. आद्या प्रसाद पांडेय, केदारनाथ सिंह, मणिशंकर पाण्डेय के अलावा पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष बीएचयू शिवकुमार सिंह, दुर्ग सिंह चौहान, जेपीएस राठौर, देवानंद सिंह, पूर्व महापौर कौशलेंद्र सिंह, आदि ने भी छात्र राजनीति बीएचयू में ही की है। सूबे के पूर्व मंत्री हरिश्चंद्र श्रीवास्तव ने भी बनारस में ही राजनीति की शुरूआत की थी। अनिल चंचल, सुबेदार सिंह, स्व. अनिल कुमार मिश्र उर्फ झुन्ना, अनिल श्रीवास्तव, मोहन प्रकाश, आदि ने भी बीएचयू में अपनी राजनीति पारी खेली।

 लोकनायक ने बीएचयू के सिंह द्वार से फूंका था संपूर्ण क्रांति का बिगुल : 

बात 1974 की है जक काशी हिंदू विश्वविद्यालय सिंह द्वार पर लोकनायक जय प्रकाश नारायण की सभा थी। कांग्रेस का विरोध चरम पर था। यहीं से उन्होंने संपूर्ण क्रांति का बिगुल फूंका और कहा था कि ‘संपूर्ण क्रांति का अब नारा है, भावी इतिहास हमारा है’।

 छात्रसंघ अध्यक्ष को कालिख पोती:

बात उन दिनों (1962) की है जब बीएचयू में छात्रसंघ के लिए चुनाव नहीं बल्कि मनोनयन हुआ करता था। नेहरूजी प्रधानमंत्री थे। तत्कालीन छात्रसंघ अध्यक्ष गंगाशरण राय ने एक बार सार्वजनिक रूप से कांग्रेस की प्रशंसा की तो छात्रों ने कालिख पोत कर उनको घुमाया था।

 गेस्ट हाउस कांड भी नहीं डिगा सकी चंचल की कुर्सी: 

बात उन दिनों (1977) की है जब समाजवादी खेमे से अनिल चंचल छात्रसंघ अध्यक्ष के प्रत्याशी थे जबकि विद्यार्थी परिषद से महेंद्र नाथ। एबीवीपी ने चंचल को हराने के लिए गेस्ट हाउस कांड को उछाला। गेस्ट हाउस कांड का जवाब दो उनका मुख्य मुद्दा था। गेस्ट हाउस एक लड़की व चंचल को लेकर जुड़ा था।

 इंदिरा गांधी को दिखाया था काला झंडा:

वर्ष 1974 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय में साइंस कांग्रेस के आयोजन के दौरान प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का भाषण चल रहा था। उस समय समाजवादी खेमे के मोहन प्रकाश छात्रसंघ अध्यक्ष थे। उन्होंने भारी भीड़ के बीच बहुरुपिया बनकर प्रधानमंत्री को काला झंडा दिखाया। इसके बाद बवाल हो गया और मोहन प्रकाश की गिरफ्तारी के साथ ही विश्वविद्यालय तीन माह के लिए बंद कर दिया गया था। हालांकि अब मोहन प्रकाश कांग्रेस के एक कद्दावर नेता के रूप में जाने जाते हैं।

Posted By: Dhyanendra Singh

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