लखनऊ, जेएनएन। उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव के दौरान चुनावी झूठ प्रचारित करने वाले 74 शरारती तत्वों पर पुलिस ने शिकंजा कसा। इन्होंने वॉट्सएप, फेसबुक व ट्विटर पर जानबूझकर गलत फोटो व वीडियो शेयर कर चुनाव की प्रक्रिया पर सवालिया निशान खड़े किए। जांच में घटना पूरी तरह गलत पाई गई। ऐसे में इन सभी लोगों पर एफआइआर दर्ज करवाई गई और कई को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

पुलिस महानिरीक्षक (कानून व्यवस्था) प्रवीण कुमार ने बताया कि चंदौली, डुमरियागंज, मऊ, गाजीपुर व झांसी में रिजर्व ईवीएम को स्ट्रांग रूम में रखने के लिए डीएम व अधिकारियों की निगरानी में भेजा जा रहा था, इसकी हकीकत जाने बगैर गाड़ियों पर ले जा रही अप्रयुक्त ईवीएम की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल करने से बवाल खड़ा हो गया। चुनाव आयोग व प्रशासनिक अमला कठघरे में खड़ा हो गया। किसी तरह पुलिस व प्रशासन ने मामले को शांत करवाया। जब हकीकत सामने आई तो विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों ने आयोग को संतुष्ट होकर लिखित सहमति तक दी कि वह सोशल मीडिया के कारण भ्रम में पड़ गए थे।

इसी तरह नोट के बदले वोट देने और प्रत्याशियों द्वारा फर्जी वोट डलवाने की भी अफवाहें भी प्रचारित की जा रही हैं। लोकसभा चुनाव में पूरी पादर्शिता बरती जा रही है। सिर्फ सोशल मीडिया के माध्यम से तरह-तरह के झूठ प्रचारित कर सनसनी फैलाने की कोशिश शरारती तत्व कर रहे हैं। पुलिस विभाग का आइटी सेल लगातार इसकी निगरानी में लगा है। फिलहाल सोशल मीडिया पर चुनाव से जुड़ी कोई भी सामग्री पोस्ट करने से पहले सर्तकता बरतने के निर्देश सभी को लगातार दिए जा रहे हैं। इसके बावजूद जो लोग इसे खिलवाड़ समझकर अफवाह फैलाने का काम कर रहे हैं, उन्हें चिह्नित कर सजा दी जा रही है।

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Posted By: Umesh Tiwari