रांची, [प्रदीप सिंह]। Jharkhand Election Results 2019 - झारखंड में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में एक बार फिर विपक्ष औंधे मुंह गिर गया। भाजपा के प्रत्याशियों ने बाजी मारी। विपक्ष को सबसे बड़ा झटका दुमका में लगा जहां झारखंड मुक्ति मोर्चा के करिश्माई नेता शिबू सोरेन चुनाव मैदान में परास्त हो गए। इसे विपक्षी महागठबंधन की बड़ी रणनीतिक हार माना जा रहा है। भाजपा ने दुमका में जीत हासिल करने के लिए व्यापक रणनीति बनाई थी। साझा प्रचार अभियान में सुस्ती से लेकर आपसी समन्वय का घोर अभाव विपक्ष की पराजय का बड़ा कारण बना।

दरअसल शुरूआत में सीटों की दावेदारी को लेकर हुई मारामारी का भी गलत संदेश मतदाताओं तक गया। महागठबंधन में शामिल प्रमुख दल इसी कवायद में लगे रहे जबकि इससे ठीक विपरीत एनडीए ने तीन सीटिंग सांसदों का टिकट काटकर नए चेहरे उतारे और तीनों जगह कामयाबी हासिल की। वहीं विपक्षी महागठबंधन में प्रत्याशियों के चयन को लेकर भी सस्पेंस बना रहा। कुछ स्थानों पर सही प्रत्याशी का चयन नहीं होना भी हार की बड़ी वजह बनी। कांग्रेस ने सबसे ज्यादा 7 सीटों पर दावेदारी की जबकि महज एक सीट का परिणाम कांग्रेस के पक्ष में आया है। इस परिणाम में कांग्र्रेस के लिए खुश होने लायक कुछ नहीं है।

चुनाव के ऐन पहले गीता कोड़ा ने कांग्र्रेस की सदस्यता हासिल की। उनका और उनके पति पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा का सिंहभूम में प्रभाव है। हजारीबाग सीट पर कांग्र्रेस की मिïट्टीपलीद हो गई। चतरा में भी कुछ खास प्रदर्शन पार्टी नहीं कर पाई। रांची में कद्दावर नेता सुबोधकांत सहाय लगातार दूसरी बार हार गए। धनबाद में कीर्ति आजाद को पराजय का सामना करना पड़ा। अलबत्ता लोहरदगा और खूंटी सीट पर कांग्र्रेस के प्रत्याशियों सुखदेव भगत और कालीचरण मुंडा ने कड़ी टक्कर दी। 

मशक्कत करनी होगी मुकाबले के लिए
सुस्त प्रचार अभियान, नेतृत्व की उदासीनता, धरातल पर जमीनी मुद्दों को नहीं पकड़ पाने की कमी विपक्ष के धड़ाम होने का कारण बनी। खोई राजनीतिक जमीन को पाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ेगी। झारखंड मुक्ति मोर्चा के रणनीतिकारों की विफलता भी दुमका से शिबू सोरेन की हार के लिए उत्तरदायी होगी। शिबू सोरेन की हार झारखंड मुक्ति मोर्चा के लिए बड़े झटके के समान है। हालांकि पार्टी ने इससे उबरने का दावा किया है।

शिबू सोरेन को हराने में कामयाब रही भाजपा को इससे मनोवैज्ञानिक बढ़त मिली है। दुमका की जीत के भरोसे अब भाजपा संताल परगना में पूरी तरह काबिज होने की ओर अग्रसर है। भाजपा ने झारखंड मुक्ति मोर्चा के अभेद्य किले में सेंधमारी की है। हालांकि इसकी शुरुआत 2014 में विधानसभा चुनाव के वक्त ही हो गई थी जब मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए हेमंत सोरेन दुमका से विधानसभा का चुनाव हार गए थे। कुछ ऐसा ही हश्र गिरिडीह में भी हुआ।

झारखंड मुक्ति मोर्चा ने बड़े-बड़े दावे किए थे लेकिन भाजपा की मजबूत रणनीति यहां कारगर रही। आजसू के प्रत्याशी ने बड़े अंतर से झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रत्याशी को हरा दिया। गिरिडीह में टिकट की दावेदारी के चक्कर में झामुमो ने एक विधायक भी गंवाया। टिकट नहीं मिलने से नाराज मांडू के विधायक जयप्रकाश भाई पटेल एनडीए के लिए प्रचार करने लगे।

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Posted By: Alok Shahi