जयपुर, मनीष गोधा। महिलाओं के पिछड़ेपन के लिए पहचाने जाने वाले राजस्थान में लोकसभा चुनाव में भी आधी आबादी का प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा है। आजादी के बाद 2014 तक हुए आम चुनाव में कुल 180 महिला प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा और इनमें से 28 संसद में पहुंच पाईं। हालांकि इतना जरूर रहा है कि देश के पहले आम चुनाव से ही राजस्थान में महिलाएं चुनाव मैदान में नजर आईं। तीसरे आम चुनाव में जयपुर राजघराने की पूर्व राजमाता गायत्री देवी स्वतंत्र पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ीं और जीत गईं। स्वतंत्र पार्टी राजा-महाराजाओं की पार्टी मानी जाती थी और गायत्री देवी एक बार नहीं बल्कि लगातार तीन बार इसी पार्टी से जयपुर से सांसद रहीं।

शुरुआती चुनाव में औसतन पांच से छह महिलाएं चुनाव मैदान में उतर रही थीं लेकिन 1991 के बाद इसमें तेजी आई और चुनाव मैदान में उतरने वाली महिलाओं की संख्या 20 से 25 तक हो गई। वर्ष 2009 में सबसे ज्यादा 31 महिलाओं ने चुनाव लड़ा, जबकि 2014 में 27 महिलाएं चुनाव मैदान में थीं। दो आम चुनाव 1957 और 1977 ऐसे रहे, जब एक भी महिला चुनाव मैदान में नहीं थी।

राजनीतिक दलों ने भी नहीं दिए ज्यादा अवसर

राजस्थान में मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच ही रहा है लेकिन इन दलों ने भी महिलाओं को ज्यादा अवसर नहीं दिए। अब तक हुए चुनावों की बात करें तो भाजपा ने महिला प्रत्याशियों को 19 और कांग्रेस ने 27 टिकट दिए हैं। कांग्रेस हालांकि पहले लोकसभा चुनाव से ही मैदान में रही है लेकिन राजस्थान में उसने 1980 में पहली बार महिला प्रत्याशी निर्मला कुमारी को टिकट दिया। वहीं भाजपा का तो जन्म ही 1980 में हुआ और इसने 1984 में ही दो महिलाओं को टिकट दे दिया था।

अधिकांश प्रत्याशियों को कई बार मिला टिकट

भाजपा और कांग्रेस ने भी अधिकांश महिला प्रत्याशियों को कई बार टिकट दिए। यानी प्रत्याशियों की संख्या भले बढ़ी हो लेकिन चेहरे पुराने रहे। वसुंधरा राजे 1989 से 1999 तक हुए पांच लोकसभा चुनाव में हर बार चुनाव मैदान में रहीं और जीतीं। इसी तरह कांग्रेस की ओर से गिरिजा व्यास को 1991 से 2004 तक लगभग हर बार टिकट मिला और एक बार छोड़कर वे लगातार जीती भी।

राजस्थान में लोकसभा चुनाव में महिलाओं की भागीदारी का हाल:

- पहले चुनाव में दो महिलाएं खड़ी हुईं, दोनों की जमानत जब्त हो गई।

- तीसरे आम चुनाव में छह महिलाएं मैदान में उतरीं और जयपुर राजघराने की पूर्व राजमाता गायत्री देवी स्वतंत्र पार्टी के टिकट पर जयपुर सीट से सांसद बनीं। इस तरह वे राजस्थान की पहली महिला सांसद बनीं।

- 1971 का चुनाव महिलाओं के हिसाब से अच्छा चुनाव रहा। चार महिलाओं ने चुनाव लड़ा। दो जीत गईं और दो हार गईं।

- 1980 के चुनाव में पहली बार कांग्रेस ने निर्मला कुमारी को टिकट दिया और वे चित्तौड़गढ़ से सांसद चुनी गईं। इसी चुनाव में पहली बार जनजाति क्षेत्रों के लिए आरक्षित दो सीटों पर भी महिलाओं ने चुनाव लड़ा। हालांकि एक की जमानत जब्त हो गई और दूसरी पांचवें स्थान पर रहीं।

- 1989 के चुनाव में भाजपा ने एक और कांग्रेस ने तीन महिलाओं को टिकट दिए। एक टिकट जनता दल ने भी दिया। कांग्रेस की तीनों प्रत्याशी चुनाव हार गईं। वहीं भाजपा की वसुंधरा राजे पहली बार झालावाड़ से सांसद बनीं।

- 1991 के बाद से लोकसभा का चुनाव लड़ने वाली महिला प्रत्याशियों की संख्या लगातार बढ़ती रही और हर चुनाव में औसतन 20 से 25 महिलाओं ने चुनाव लड़ा। सबसे ज्यादा 31 महिलाएं 2009 के चुनाव में मैदान में थीं।

राजस्थान से ये महिलाएं पहुंची लोकसभा में

वर्ष नाम पार्टी का नाम

1962 गायत्री देवी स्वतंत्र पार्टी

1967 गायत्री देवी स्वतंत्र पार्टी

1971 गायत्री देवी स्वतंत्र पार्टी

कृष्णा कुमारी निर्दलीय

1980 निर्मला कुमारी कांग्रेस आई

1984 इंदुबाला सुखाड़िया कांग्रेस

निर्मला कुमारी कांग्रेस

1989 वसुंधरा राजे भाजपा

1991 महेंद्र कुमारी भाजपा

कृष्णेंद्र कौर भाजपा

वसुंधरा राजे भाजपा

गिरिजा व्यास कांग्रेस

1996 महारानी दिव्या सिंह भाजपा

उषा देवी कांग्रेस

वसुंधरा राजे भाजपा

गिरिजा व्यास कांग्रेस

1998 उषा मीणा कांग्रेस

प्रभा ठाकुर कांग्रेस

वसुंधरा राजे भाजपा

1999 जसकौर मीणा भाजपा

वसुंधरा राजे भाजपा

गिरिजा व्यास कांग्रेस

2004 किरण माहेश्वरी भाजपा

सुशीला बंगारू भाजपा

2009 ज्योति मिर्धा कांग्रेस

चंद्रेश कुमारी कांग्रेस

गिरिजा व्यास कांग्रेस

2014 संतोष अहलावत भाजपा 

Posted By: Preeti jha

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