वाराणसी [अशोक सिंह]। चुनावी बिगुल बजने के साथ ही तय हो गया है कि एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी संसदीय सीट से ही लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। इस कारण वाराणसी एक बार फिर देश-दुनिया के लिए हाई प्रोफाइल हो गई है। इसी कारण मोदी के सामने ताल ठोकने वाले देश भर में कमर कसने लगे हैं। कुछ ने तो घोषणा भी कर दी है। हरियाणा, पंजाब से लेकर सुदूर दक्षिण के राज्यों से थोक के भाव प्रत्याशी हैं। अभी कांग्रेस समेत सपा-बसपा गठबंधन ने तो अपना पत्ता नहीं खोला है लेकिन उनके दलों से बड़े नाम की मांग उठने लगी है। वैसे कुछ के बयान से यह स्पष्ट है कि वे मोदी के सामने चुनौती पेश करने नहीं बल्कि अपना नाम चमकाने के लिए आ रहे हैं। यही हाल कमोवेश 2014 के लोकसभा चुनाव में भी था।

देश में राजनीति मोदी बनाम अन्य की हो गई है। जो राजनीतिक दल एक दूसरे के खिलाफ लड़ रहे हैं उनका भी एक ही लक्ष्य है मोदी हटाओ। मोदी की वजह से एक बार फिर वाराणसी संसदीय सीट लाइम लाइट में है। यहां से मोदी के लडऩे का उद्देश्य पूर्वांचल संग समीपवर्ती बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़ तक भाजपा के कमल को खिलाना है। इसके विपरीत बहुत से लोग इस कारण इस कारण चुनाव लड़ रहे हैं कि वह मीडिया में बने रहें और मोदी विरोधियों में अपना कद बढ़ा सकें। 

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मोदी के खिलाफ लडऩे वालों में भीम आर्मी के चंद्रशेखर ने घोषणा कर दी है। चंद्रशेखर के कांग्रेस से लडऩे की चर्चा जोरों पर रही। कारण था कि पूर्वी उत्तर प्रदेश की कांग्रेस प्रभारी प्रियंका वाड्रा चंद्रशेखर से मिलने गईं उसके बाद वह वाराणसी में एक छोर से दूसरे छोर तक रैली की। इससे पहले चुनाव लडऩे की घोषणा तमिलनाडू के 111 किसानों ने की। ये वो किसान हैं जो दिल्ली में फसलों का उचित कीमत के लिए प्रदर्शन कर चुके हैं। उनके नेता पी. अयाकन्नू का कहना है कि अगर भाजपा अपने घोषणा पत्र में सार्थक वादा कर देती है तो वह अपना फैसला बदल सकते हैं। 

पैरा मीलिट्री फोर्स में खराब खाना का वीडियो वायरल कर चर्चा में आने वाले बीएसएफ के जवान तेज प्रताप यादव ने भी चुनाव लडऩे की घोषणा की है। वैसे तेज प्रताप का कहना है कि वह चुनाव तो नहीं जीतेंगे लेकिन अपना संदेश देश भर में लोगों तक पहुंचा देंगे। दक्षिण भारत के तेलंगाना स्थित नलगोंडा में फ्लोराइड युक्त पानी से परेशान लोगों की आवाज उठाने वाले संगठन का नेतृत्व करने वालों ने चुनाव लडऩे का मन बनाया है। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार उनकी मदद नहीं कर रही है। इसी प्रकार हरियाणा से प्रकाशित होने वाली पत्रिका के संपादक भी मोदी के खिलाफ लडऩे आ रहे हैं। 

मोदी से प्रियंका को लड़ाने की सर्वाधिक मांग : कांग्रेस पार्टी ने मोदी और भाजपा की हवा निकालने के लिए प्रियंका बाड़ा को मैदान में उतारा है। साथ ही पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी भी बनाया है। प्रियंका गंगा यात्रा करते हुए यहां पहुंच कर बाबा विश्वनाथ का दर्शन पूजन कर मोदी पर हमले भी कर चुकी हैं। इस सब को देखते हुए सर्वाधिक मांग प्रियंका गांधी की ही है। वैसे भाजपा के बागी नेता और अभिनेता शत्रुघन सिन्हा की भी चर्चा हुई थी लेकिन पटना से वह हटने को वो तैयार नहीं हुए। चर्चा तो यह भी है कि भाजपा के एक और बागी नेता जो शत्रुघन सिन्हा के साथ मोदी के साथ आग उगलते थे वो भी प्रत्याशी हो सकते हैं। इस सब से पहले मोदी के खिलाफ आग उगलने वाले गुजरात के पाटीदार नेता हार्दिक पटेल को लड़ाने की बात सामने आई थी। हार्दिक ने भी चुनाव अधिसूचना जारी होने के पहले कई दिनों तक यहां सभाएं-गोष्ठियां की। लेकिन गुजरात से ही चुनाव लडऩे और कानूनी अड़चन के बाद सभी संभावनाएं समाप्त हो गई हैं। सूत्र बताते हैं कि संकटमोचन मंदिर के महंत पर भी कांग्रेस विचार कर रही है। 2014 के चुनाव से पूर्व भी कांग्रेस की तरफ से प्रियंका, दिग्विजय सिंह, राशिद अल्वी, मोहन प्रकाश, आनंद शर्मा, राजबब्बर आदि का नाम चर्चा में आया था बाद में आप नेता अरविंद केजरीवाल के आने के बाद कांग्रेस से अजय राय पर चर्चा समाप्त हुई। 

पिछले चुनाव की तरह एक बार फिर सपा से पूर्व मंत्री सुरेंद्र पटेल का भी नाम सुर्खियों में सबसे उपर है। सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस की तरफ से कोई बड़ा नाम नहीं आएगा तो सुरेंद्र ही प्रत्याशी होंगे। वैसे संजय गुप्ता और बीएचयू के एक प्रोफेसर का नाम भी पार्टी के अंदरखाने में चल रहा है। फिर भी इससे पर्दा 12 अप्रैल को घोषणा के बाद ही होगा। चर्चा में आम आदमी पार्टी का नाम कहीं नहीं है। कार्यकर्ता चाहते थे कि केजरीवाल ने जिस प्रकार से मोदी को टक्कर दिया था तो वह फिर वाराणसी को गंभीरता से लें। सूत्र बताते हैं कि केजरीवाल वाराणसी को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। पार्टी के पूर्वांचल अध्यक्ष संजीव सिंह का इस्तीफा उसी की परिणति माना जा रहा है। 

मोदी के खिलाफ 77 उतरे थे मैदान में : 2014 के आम चुनाव के केंद्र में भी नरेंद्र मोदी थे। मोदी के वाराणसी से लडऩे की घोषणा के बाद भी देश भर से नेता चुनाव लडऩे के बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में पहुंचने लगे थे। हालत यह हुई कि मोदी के खिलाफ 77 प्रत्याशियों ने नामांकन किया था। नामांकन के पहले दिन जहां 42 ने पर्चा लिया वहीं अंतिम दिन तो 38 लोगों ने नामांकन किया था। इसमें ज्यादातर प्रत्याशी गंभीर नहीं थे। इसी का परिणाम हुआ कि पर्चे की जांच में 34 के पर्चे खारिज हो गए। बाद में दो नाम वापस ले लिए गए। इस प्रकार मैदान में मोदी के खिलाफ 41 प्रत्याशी ही रह गए। जब मतदान हुआ तो जनता ने ज्यादातर को नकार दिया। दूसरे स्थान पर रहने वाले आप नेता अरविंद केजरीवाल को छोड़ कर सभी 40 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। इसके अलावा कई तो ऐसे रहे जो देश भर से तो यहां पहुंचे लेकिन उन्हें 10 प्रस्तावक ही नहीं मिले। इस कारण वे नामांकन नहीं कर पाए।

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नहीं पहुंच पाए थे अर्थी बाबा : मोदी के खिलाफ मैदान में उतरने वालों में अर्थी बाबा शामिल नहीं हो पाए। वह अंतिम दिन नामांकन करने तिख्ती पर सवार होकर निकले लेकिन मीडिया के बीच नौटंकी करने में समय पर नहीं पहुंच सके।

चुनाव अंतिम और सातवें चरण में : वाराणसी संसदीय सीट पर चुनाव अंतिम व सातवें चरण में होगा। इसके लिए 22 अप्रैल को नोटिफिकेशन और 29 तक नामांकन किया जा सकेगा। पर्चे की जांच 30 अप्रैल को होगी। दो मई तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। मतदान 19 मई को होगा। 

ईवीएम फेल करने का भी उद्देश्य : पिछले चुनाव में एक चर्चा यह रही कि इतने प्रत्याशी मैदान में उतर जाएं कि मतदान ईवीएम की बजाय मतपत्रों से हो। ऐसा इसलिए क्योंकि ईवीएम से नोटा के अलावा 63 प्रत्याशी के लिए ही मतदान हो सकता है। वैसे कुछ सालों से ईवीएम के खिलाफ काफी आवाज उठती रही है। इस बार जब 111 किसानों के तमिलनाडू से आकर लडऩे की बात आई तो एक बार फिर यह बात सामने आई लेकिन गलत साबित हो गई। ऐसा इसलिए क्योंकि नए जमाने की थर्ड जनरेशन ईवीएम से अब 24 बैलेट यूनिट जोड़ा कर 384 प्रत्याशियों के लिए मतदान कराया जा सकता है।  

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Posted By: Abhishek Sharma

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