जम्मू, जेएनएन। लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में उधमपुर-डोडा सीट पर बुजुर्गों के साथ युवाओं और महलाओं में भी मतदान के लिए खासा उत्साह नजर आया। कठुआ, ऊधमपुर, रामनगर, डोडा, रियासी, किश्तवाड़ के जिलों में लगभग सभी मतदान केंद्रों पर सुबह से ही मतदान करने वालों की कतारें देखने को मिली। मताधिकार का प्रयोग करने के लिए युवा ही नहीं बुजुर्ग मतदाता भी पूरे उत्साह के साथ मतदान केंद्रों में पहुंच रहे थे। युवाओं में इस बात को लेकर उत्सुक दिखे कि वे पहली बार वोट कर लोकतंत्र के महाकुंभ में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने जा रहे हैं तो वहीं बुजुर्ग इसे धर्म मानकर उसका निर्वाह करने के लिए पहुंच रहे थे।

 

हैरत की बात यह है कि मतदान करने को वे बुजुर्ग भी पहुंच रहे हैं जिनकी उम्र 90 साल से अधिक है। इनमें से तो कई चलने की हालत में भी नहीं थे। वोट को धर्म मानने वाले इन बुजुर्गों की इच्छापूर्ति के लिए उनके परिजन पालकी, स्कूटर, व्हीलचेयर आदि पर मतदान केंद्र लेकर पहुंचे। रियासी नगरपालिका कार्यालय में स्थापित केंद्र में मतदान करने के लिए बुजुर्ग दंपति 95 वर्षीय तारामणि और 84 वर्षीय उनकी धर्मपत्नी पुष्पा देवी पहुंची। रामनगर निवासी 102 वर्षीय बीके सलाथिया भी मतदान करने के लिए अपने पुत्रों के साथ पोलिंग बुथ पहुंचे। वहीं कटड़ा के दूरदराज इलाके में रहने वाले पूर्णातदूर के रहने वाले 94 वर्षीय संसार सिंह पैदल ज्यादा नहीं चल पाते हैं परंतु वोट डालना जरूरी है। इसीलिए उनके बेटा उन्हें पालकी में बैठाकर मतदान केंद्र पहुंचा।

चिनैनी की रहने वाली 95 वर्षीया राजदाई भी मताधिकार करने को पीछे नहीं रही। वह भी अपने बच्चों के साथ बीडीओ कार्यालय में बनाए गए मतदान केंद्र में वोट डालने के लिए पहुंची। ऊधमपुर के दूरदराज इलाके में रहने वाले 88 वर्षीय बिल राम ने भी मतदान किया। इस तरह की मिसाल देने वाले बुजुर्ग मतदाता लगभग हरेक मतदान केंद्र में देखने को मिले। दूरदराज के इलाकों में बनाए गए मतदान केंद्रों तक पहुंचने के लिए बुजुर्ग मतदाताओं का उत्साह देखने लायक था।

कठुआ, रियासी, उधमपुर, डोडा जिले के कई इलाके ऐसे हैं, जहां के गांवों में सड़कें नहीं हैं। ऐसे में कई बुजुर्ग लोगों को मतदान केंद्रों तक पहुंचने के लिए पैदल ही आना पड़ा। मतदान केंद्र पहुंचे इन बुजुर्गों का कहना था कि उन्हें याद नहीं उन्होंने कभी वोट न डाला हो। यह कर्तव्य नहीं सभी का धर्म है और इसे हर हाल में पूरा करना चाहिए। जब तक वे जिंदा है, इस धर्म का पालन करते रहेंगे। उन्होंने केंद्र में पहली बार वोट डाल रहे युवाओं से भी कहा कि एक वोट की भी बहुत कीमत है, इसलिए वोट जरूर डालना चाहिए। बनी, लोहाई मल्हार, महानपुर आदि इलाकों में मतदान केंद्रों तक पहुंचने के लिए बुजुर्गों को काफी परेेशानियों का सामना करना पड़ा। वे कई किलोमीटर पैदल चलने के बाद मतदान केंद्र पहुंचे थे, जहां उन्होंने वोट डाले। बुजुर्गों में कई ऐसे भी थे जिनको को मतदान केंद्र तक पहुंचने के लिए परिवार के सदस्यों का सहारा लेना पड़ा। कई बुजुर्गों को लोग गोद में उठाकर मतदान करवाने के लिए ले आए थे।

वहीं पहली बार वोट डालने पहुंचे युवा के चेहरने पर भी खासी खुशी दिख रही थी। दोस्तों के साथ मतदान के लिए पहुंचे कई युवाओं ने वोट डालने के लिए कतारों में खड़े होकर घंटों इंतजार भी किया। बिलावर के कुणाल, रोहण, अभिषेक का कहना था कि वोट डालने के लिए उन्होंने बड़ी मुश्किल से मतदाता पहचान पत्र बनवाया है। वोट डालने के बाद उंगली पर लगी स्याही देख उन्हें बड़ी खुशी हो रही है। इसी तरह बड़ी संख्या में महिलाएं भी मतदान के लिए पहुंची थीं। सुबह ही अपने घर के कामकाज निपटाकर वोट डालने के लिए ये महिलाएं मतदान केंद्र पहुंच गई थी। उधमपुर, डोडा, कठुआ के ज्यादातर इलाकों में मतदान केंद्रों के बाहर महिलाओं की लंबी कतार देखी गई।

Posted By: Rahul Sharma

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