पटना [राज्य ब्यूरो]। उम्मीद यह की जा रही कि अगले दस दिनों में यह दृश्य बहुत हद तक साफ हो जाएगा कि कितने पुराने लड़ाके फिर से मैदान में रहेंगे और कितनी संख्या में नए, लोकसभा की चुनावी जंग में उतरेंगे। इस दस दिन के पूर्व का मंजर यह है कि नए और पुराने लड़ाकों की जुबानी जंग और दावे रोचक अंदाज में है। एक-दूसरे पर टिप्पणी का स्टाइल भी मजेदार है। कुछ पार्टी के भीतर बोल रहे तो कई ऐसे हैैं जिन्हें पार्टी के बाहर बोलने में भी परहेज नहीं।

शुरुआत पाटलिपुत्र लोकसभा सीट से हुई। राजद की मीसा भारती ने पिछली बार इस सीट से चुनाव लड़ा था। इस बार चर्चा थी कि भाई वीरेंद्र को वहां से महागठबंधन का उम्मीदवार बनाया जाएगा। भाई वीरेंद्र की उम्मीदवारी की बात से क्षुब्ध तेजप्रताप ने गुस्से में खुलेआम उनके खिलाफ खूब बोला और ऐलान कर दिया कि मीसा भारती ही चुनाव लड़ेगी पाटलिपुत्र सीट से।

भाई वीरेंद्र ने कुछ कहा तो नहीं पर यह बोलकर अपनी नाराजगी जरूर जाहिर कर दी कि उनके नेता लालू प्रसाद हैैं। मीसा भारती की रामकृपाल यादव पर की गई टिप्पणी भी खूब चर्चा में रही।

एक दिन उन्होंने रामकृपाल यादव के हाथ में लालू प्रसाद के घोटाले पर लिखी पुस्तक को देख लिया और इस पर उन्होंने कहा- मन किया कि रामकृपाल चाचा का हाथ काट लूं। मीसा को रामकृपाल यादव ने ही हराया था। इस पर रामकृपाल का यह वक्तव्य आया कि मैैं कटे हाथ से भी मीसा को आशीर्वाद देता रहूंगा।

पटना साहिब सीट को लेकर यह तय है कि इस बार शत्रुघ्न सिन्हा वहां से एनडीए के उम्मीदवार नहीं रहेंगे। शत्रुघ्न सिन्हा यह कहते रहे हैैं कि वह बिहार के मोदी को नहीं जानते हैैं। बिहार के मोदी यानी उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी।

उधर मोदी सार्वजनिक रूप से यह वक्तव्य दे चुके हैैं कि शत्रुघ्न सिन्हा को भाजपा छोड़ देनी चाहिए। चर्चा है कि शत्रुघ्न राजद के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे। इस पर भी सुशील मोदी का वक्तव्य आ गया है कि वह राजद के टिकट पर लड़ के तो दिखाएं...।

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह नवादा सीट के पुराने लड़ाके हैैंं। उम्मीद है कि नवादा सीट लोजपा को चली जाए। इस भनक पर गिरिराज सिंह दो बार सार्वजनिक रूप से यह कह चुुके हैैं कि अगर नवादा सीट उन्हें नहीं मिली तो वह चुनाव ही नहीं लड़ेंगे यानी इस आम चुनाव में वह संन्यास लिए रहेंगे। उनके इस वक्तव्य पर एनडीए के बाहर से टिप्पणी हो रही।

यह कहा जा रहा कि वामदल यह चाहते हैैं कि कन्हैया को बेगूसराय से प्रत्याशी बनाया जाए। इस पर राजद के शिवानंद तिवारी कहते हैैं कि अभी कन्हैया को चुनाव लडऩे का विचार छोड़ देना चाहिए। अश्विनी चौबे के बारे में भी यह चर्चा होती है कि इस बार उन्हें बक्सर से टिकट नहीं मिलेगा पर चौबे कह चुके हैैं कि वह बक्सर से ही लड़ेंंगे। कांग्रेस में औरंगाबाद सीट को लेकर पुराने और नए लड़ाकों के बीच दावे-प्रतिदावे की बात कही जा रही। 

Posted By: Kajal Kumari

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